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क्या खाकर करें जितिया व्रत का पारण? ये रही सही समय विधि और नियम की पूरी डीटेल

Jitiya Vrat Paran Niyam: जितिया व्रत आज यानी 3 अक्टूबर को रखा जा रहा है, वहीं पारण 4 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा. जितिया का पारण करने के लिए शुभ समय, विधि और नियम क्या है? आइए इस बारे में विस्तार से जानें.

Written By Padma Shree Shubham
Published: Oct 03, 2026, 02:52 PM IST | Updated: Oct 03, 2026, 02:54 PM IST
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Jitiya 2026 Paran Shubh Samay: तीन दिवसीय जितिया व्रत का पारण कल यानी 4 अक्टूबर को किया जाएगा. माताएं आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि पर इस व्रत का संकल्प करती है और 24 घंटे तक निर्जला उपावास कर संतान की लंबी उम्र और उत्तम स्वास्थ्य के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं. इस साल जितिया व्रत 3 अक्टूबर 2026 को रखा गया है और भगवान जीमूतवाहन की पूजा शाम के समय की जाएगी. जितिया व्रत मुख्य रूप से झारखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार में माताएं रखती हैं. जितिया व्रत के अगले दिन किस विधि से पारण करें और इसके लिए सही समय क्या है, आइए इस बारे में जानें.

जितिया व्रत 2026 पारण का समय

जितिया व्रत के अगले दिन यानी नवमी तिथि पर पारण करने का विधान है. पंचांग के अनुसार, 4 अक्टूबर 2026, रविवार के दिन  जितिया का पारण सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद नवमी तिथि लगने पर किया जाएगा. जितिया व्रत का पारण नवमी तिथि पर करना उत्तम माना गया है.

जितिया व्रत पारण विधि

जितिया व्रत के पारण वाले दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि कर लें और साफ वस्त्र पहनें. 
अब तांबे के लोटे में जल लें, उसमें लाल फूल और अक्षत मिलाएं और सूर्य देव को अर्घ्य दें.
पूजा स्थल पर धूप-दीप जलाएं और जीमूतवाहन देवता, चील और सियारिन का पूजा और ध्यान करें. 
अब पूजा में जल और उचित भोग भी चढ़ा दें. 
अब प्रणाम करें और पूरे परिवार को प्रसाद बांट दें. 
भगवान को चढ़ाए गए जल और प्रसाद खुद भी ग्रहण करें और व्रत खोलें.
प्रसाद ग्रहण करने के बाद सात्विक और हल्का भोजन करें.
जितिया पारण के दिन नोनी का साग और तोरी की सब्जी का सेवन जरूर करना चाहिए.

जितिया व्रत पारण नियम

जितिया व्रत के दिन सात्विक भोजन करें यानी बिना लहसुन-प्याज वाला शाकाहारी भोजन करें.
पारण के दिन भोजन करने से पहले ब्राह्मण देव को दान-दक्षिणा दें. जरूरतमंद को अन्न, धन का दान करें.
जितिया व्रत का पारण भूलकर भी अष्टमी तिथि में न करें. नहीं तो व्रत पूर्ण नहीं होगा. नवमी तिथि लगने पर ही पारण करें.
पारण वाले दिन व्रती दिन के समय न सोएं, नहीं तो व्रत का पूरा फल प्राप्त नहीं होगा.
नहाय-खाय से लेकर पारण वाले दिन तक किसी के लिए भी मन में बुरी भावना न रखें और न तो बुरा बोलें.

(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

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About the Author

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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