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Jitiya Vrat 2026: आप भी रख रही हैं जितिया व्रत? जुटा लें ये जरूरी पूजन सामग्री नहीं तो उपासना रह जाएगी अधूरी!

Jitiya Vrat 2026 Puja Samagri: जितिया का पावन व्रत जब माताएं रखती हैं तो कामना करती हैं कि उनकी संतान की आयु लंबी हो और स्वास्थ्य अच्छा रहे. इस दिन माताएं पूजा करती हैं और निर्जला व्रत रखती हैं. आइए पूजन सामग्रियों की लिस्ट देखें.

Jitiya Vrat 2026: आप भी रख रही हैं जितिया व्रत? जुटा लें ये जरूरी पूजन सामग्री नहीं तो उपासना रह जाएगी अधूरी!

Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत या जीवित्पुत्रिका व्रत इस साल 3 अक्टूबर को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर रखा जाएगा. यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, उनके सुख और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखती हैं. नहाय खाय, व्रत और पारण यानी तीन दिनों तक चलने वाले इस पर्व में महिलाएं निर्जला उपवास रखकर सुबह सूर्य देव और शाम के समय भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं. ऐसे में जरूरी है कि जितिया की पूजा किसी भी तरह से अधूरी न रह जाए. आइए देखें जितिया व्रत की पूजा सामग्री की लिस्ट, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त क्या है.

जितिया पूजा सामग्री लिस्ट

पूजा और स्थापना की सामग्री, चौकी
लाल या पीला कपड़ा, कुशा, गोबर
कलश या लोटा, जल, अक्षत यानी साबुत चावल
रोली, सिंदूर, चंदन, हल्दी, दूर्वा
ताजे फूल, फूलों की माला, पान
सुपारी, मौली, लौंग, इलायची
लाल या पीला जिउतिया धागा
जितिया व्रत की कथा की पुस्तक
दीप-धूप की सामग्री
मिट्टी या पीतल का दीपक
रूई की बाती, घी या तेल
धूप, अगरबत्ती, कपूर
भोग और प्रसाद के लिए मौसमी फल
मिठाई, भिगोया हुआ चना, पंचामृत

जितिया व्रत 2026 मुहूर्त

अष्टमी तिथि का प्रारंभ 3 अक्टूबर 2026, सुबह 7:59 बजे होगा और तिथि का समापन 4 अक्टूबर 2026, सुबह 5:51 बजे होगा. इस तरह 3 अक्टूबर 2026, शनिवार के दिन जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाएगा.
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:38 बजे से लेकर 5:26 बजे तक होगा.
प्रातः संध्या सुबह 5:02 बजे से लेकर 6:15 बजे तक होगा.
अभिजित मुहूर्त सुबह 11:46 बजे से लेकर दोपहर 12:34 बजे तक होगा.
गोधूलि मुहूर्त शाम 6:05 बजे से लेकर 6:29 बजे तक होगा.
सायाह्न संध्या शाम 6:05 बजे से लेकर 7:18 बजे तक होगा.

जितिया व्रत में कैसे करें पूजा?

सबसे पहले स्नान आदि करें और नियमित पूजा कर लें.
शाम के समय पूजा स्थल की सफाई करें.
चौकी रपर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं.
भगवान जीमूतवाहन की प्रतिमा या तस्वीर चौकी पर रखें.
चंदन, अक्षत, सिंदूर, दीप-धूप जलाएं और रोली, फूल और दूर्वा अर्पित करें.
भगवान को फल, मिठाई और प्रसाद अर्पित करें. 
जितिया व्रत की कथा सुनें सुनाएं.
अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें और संतान के सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना करें.

(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

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About the Author

Padma Shree Shubham

Padma Shree Shubham

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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