भगवान शिव के तांडव और क्रोध से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं लेकिन उनकी पत्नी पार्वती जी को भयंकर क्रोध आया हो, इसकी कहानियां विरली ही हैं. हनुमान अंश फिल्म का लोकप्रिय गाना 'जब जिद पर आईं पार्वती, समझाने पहुंचे सप्तऋषि...' पार्वती जी के क्रोध और अटल संकल्प की ही कहानी पर आधारित है. लेकिन कमाल की बात यह है कि देवी पार्वती के इस क्रोध और जिद को देखकर भगवान शिव और सप्तऋषि उन पर बेहद प्रसन्न हुए और उनकी मनोकामना पूरी भी की. आइए जानते हैं ये रोचक कहानी, जिसका वर्णन शिव महापुराण में मिलता है.
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी. वे पत्ते, कंद-मूल खाकर कठोर तपस्या करती रहीं. एक बार भगवान शिव ने उनकी तपस्या की पूर्णता और प्रेम की गहराई को परखने की सोची. इसके लिए उन्होंने सप्तऋषियों (7 महान ऋषी) को उनके पास भेजा.
सप्तऋषियों ने माता पार्वती के मन को विचलित करने के लिए उनके सामने भगवान शिव के अवगुणों का बखान करना और निंदा करना शुरू कर दिया. उन्होंने पार्वती को समझाते हुए कहा: "तुम किसके लिए इतनी कठिन तपस्या कर रही हो? वह शिव तो श्मशान में रहता है, शरीर पर भस्म मलता है, गले में सांपों की माला पहनता है और भूत-प्रेतों के साथ घूमता है." ताकि पार्वती जी यह सब सुनकर शिव जी से विवाह करने की जिद छोड़ दें.
ऋषियों ने उनके गुरु देवर्षि नारद की भी बुराई की और कहा कि नारद के बहकावे में आकर तुमने अपना घर-बार छोड़ दिया है. उन्होंने पार्वती को सलाह दी कि वे शिव का विचार छोड़ दें और भगवान विष्णु से विवाह कर लें. जो कि अत्यंत सुंदर, सुशील और गुणवान हैं.
यह सुनते ही माता पार्वती क्रोधित हुईं और सप्तऋषियों से दृढ़तापूर्वक कहा, "चाहे महादेव अवगुणों के घर हों और विष्णु समस्त गुणों के धाम हों, परंतु मेरा मन तो शिव में ही रम चुका है. यदि स्वयं भगवान विष्णु भी आकर मुझसे कहेंगे, तब भी मैं अपना प्रण नहीं बदलूंगी. यदि मुझे शिव न मिले, तो मैं कुंवारी ही रह जाऊंगी." इसके साथ ही उन्होंने सप्तऋषियों से शिव की निंदा न करने और वहां से जाने के लिए कह दिया. इसके बाद वे फिर से तपस्या करने बैठ गईं.
माता पार्वती के इस अटूट विश्वास, प्रेम और निष्ठा को देखकर सप्तऋषि अत्यंत प्रसन्न और भावविभोर हो गए. वे वास्तव में उन्हें मनाने नहीं आए थे, बल्कि उनकी परीक्षा ले रहे थे. वहीं कैलाश पर्वत पर बैठे शिव जी भी प्रसन्न हुए. इसके बाद शिव-पार्वती विवाह संपन्न हुआ.
(Disclaimer: यह लेख पौराणिक मान्यताओं और लोक-कथाओं पर आधारित है. Zee News इसकी पूर्ण सत्यता और प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है.)