काशी के बारे में पूरा भारत जानता है. कहा जाता है कि वहां हर घर में मंदिर होता है. लेकिन आज हम एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जो बनारस में ना होते हुए भी छोटी काशी कहलाती है.
ये जगह यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित है. इस मंदिर का नाम गोला गोकर्णनाथ है. इस मंदिर पूरे देश में अपना एक अलग पहचान रखता है.
इस मंदिर के शिवलिंग का अपना एक अलग इतिहास है. कहा जाता है इसका सीधा संबंध लंकापति रावण से है.
इस मंदिर से जुड़े कई पौराणिक कथाएं हैं. जिसके वजह से इस मंदिर का दर्शन करने के लिए लोग दूर-दूर से खींचे चले आते हैं. आज इस खबर में हम इस मंदिर के बारे में डिटेल से बताएंगे.
शिवलिंग की बात सुनकर आपको लगा होगा कि, इस मंदिर में सिर्फ शंकर भगवान की पूजा होती होगी. लेकिन ये मंदिर खास है यहां कई देवी-देवताओं की पूजा होती है.
मंदिर में काले पत्थर से बनी मां काली की मूर्ति है, जो देखने में बहुत भव्य लगती है. मूर्ति में माता की 8 भुजाएं दिख रही हैं.
साथ ही उनको लाल कपड़े पहनाए गए हैं. जो उनके भव्यता को और बढ़ा देती है. उनके गले में कपालों की माला है जो उनकी शोभा बढ़ाती है.
इसके अलावा मंदिर के परिसर में आपको मां दुर्गा की भी मूर्ति मिल जाएगी.
आपके मन में यही सवाल आ रहा होगा कि इस मंदिर का रावण से क्या कनेक्शन है. वहां के कथाओं की मानें तो लंकापति रावण ने भगवान शिव को खुश करने के लिए कठोर तपस्या की थी.
खुश होकर महादेव ने रावण को एक शिवलिंग दिया कि वो इसे लंका ले जा सकता है.
लेकिन इसके लिए भगवान ने कुछ शर्त भी रख दी थी. उनका शर्त ये था कि अगर शिव लिंग को रावण ने कहीं रास्ते में रख दिया तो वो वहीं स्थापित हो जाएगी.
रावण आराम करने के लिए इसी मंदिर के जगह पर रुका. लेकिन शिव लिंग को नीचे नहीं रख सकता था. जिसकी वजह से रावण ने शिवलिंग को एक ग्वाले को पकड़ने के लिए दे दिया. ये उसकी सबसे बड़ी भूल थी.
लेकिन ग्वाले से वजन संभाला नहीं गया और उसने शिवलिंग को नीचे रख दिया. फिर क्या था रावण ये देखकर तिलमिला उठा.
रावण ने शिवलिंग उठाने की बहुत कोशिश की. लेकिन वो उठा नहीं सका. इसी वजह से रावण के अंगुठे का निशान शिवलिंग पर आज भी है.
गोकर्णनाथ मंदिर के पास ही एक बहुत ही प्राचीन और पवित्र कुंड स्थित है. इस कुंड का धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से बहुत बड़ा महत्व माना गया है.
यहां आने वाले लोग मंदिर में जाने से पहले इस कुंड में स्नान करते हैं. लोगों का ऐसा अटूट विश्वास है कि इस पवित्र कुंड में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं.
यहां दर्शन करने के बाद उतना ही आशीर्वाद मिलता है, जितना काशी में दर्शन करने के बाद मिलता है. इसी वजह से इस जगह को छोटी काशी भी कहा जाता है.
इस पूरे इलाके की प्राकृतिक बनावट और वातावरण भी इस मंदिर को बहुत खास बनाते हैं.
सड़क या रेल मार्ग से यात्रा करते हुए जब आप यहां पहुंचते हैं, तो चारों तरफ आपको सुंदर हरियाली और घने जंगल देखने को मिलते हैं.
ये जगह धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी एक शांत और सुकून भरा अनुभव प्रदान करती है.
भगवान शिव के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा इस स्थान को हमेशा जीवंत रखती है. साल भर यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सावन के महीने और महाशिवरात्रि पर यहां बड़ा मेला लगता है.
दूर-दूर से कांवड़िए और भक्त यहां आकर जल चढ़ाते हैं. सच्चे दिल से मांगी गई हर मुराद यहां पूरी होती है, ऐसा भक्तों का पुराना विश्वास है.
(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और पारंपरिक जानकारियों पर आधारित है.