क्या मरने के बाद सब कुछ यहीं रह जाता है? चिता की राख में भी नहीं जलतीं ये 5 चीजें, अगले जन्म तक नहीं छोड़ते आत्मा का पीछा
गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद शरीर भले ही राख हो जाए, लेकिन मोह, कर्ज, पुण्य, कर्म और ज्ञान आत्मा का साथ कभी नहीं छोड़ते. इस खबर में पुनर्जन्म से जुड़े ये 5 रहस्यों के बारे में जानेंगे.
आपने अपने घर को बड़े बुजुर्गों से ये कहते हुए सुना ही होगा कि, इंसान दुनिया में खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही चला जाता है. लेकिन गरुण पुराण में इस बात को पूरी तरह से सच नहीं माना जाता है.
अब गरूण पुराण की मानें तो इंसान के मरती ही उसके शरीर तो चिता की अग्नि में जलकर राख हो जाता है. लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो आपका मरने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ती हैं.
ये चीजें आत्मा के साथ अगले जन्म तक जाती हैं और नए शरीर में एंट्री करती हैं. आइए जानते हैं कि वे कौन सी चीजें हैं जो इंसान की मौत के बाद भी उसके साथ जुड़ी रहती हैं.
मन की अधूरी इच्छाएं और सांसारिक मोह-माया
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि इंसान की मृत्यु के समय उसके मन में कुछ इच्छाएं और वासनाएं होती हैं जो पूरी नहीं हो पाती हैं, वे आत्मा के साथ चली जाती हैं.
सांसारिक चीजों और रिश्तों के प्रति अधिक लगाव आत्मा को बंधनों में बांधे रखता है. यही अधूरी इच्छाएं आत्मा को नया जन्म लेने के लिए मजबूर करती हैं.
इसी वजह से हिंदू शास्त्रों में सलाह दी जाती है कि इंसान को जीवन में मोह-माया और बहुत ज्यादा लगाव से दूर रहना चाहिए, जिससे मौत के समय मन शांत रहे.
सिर पर चढ़ा कर्ज जो अगले जन्म में भी पीछा नहीं छोड़ता
शास्त्रों के अनुसार लिया गया कर्ज इंसान की मृत्यु के बाद भी खत्म नहीं होता है. अगर कोई व्यक्ति बिना अपना उधार चुकाए मर जाता है, तो उसे अगले जन्म में भी उस कर्ज का हिसाब चुकाना पड़ता है.
गरुड़ पुराण में साफ लिखा है कि कर्ज का बोझ आत्मा के साथ अगले जन्म तक सफर करता है.
इसी कारण धार्मिक मान्यताओं में कहा जाता है कि इंसान को जीते-जी अपने सभी कर्जे और नैतिक कर्तव्यों से मुक्त हो जाना चाहिए.
इंसान के किए गए अच्छे कर्म और पुण्य का फल
जीवन में किए गए दान, परोपकार और सेवा भाव के काम कभी बेकार नहीं जाते हैं. मृत्यु के बाद यमलोक में इंसान के अच्छे और बुरे कर्मों का पूरा लेखा-जोखा होता है.
व्यक्ति का किया गया पुण्य आत्मा के साथ जाता है और उसे अगले जन्म में सुख-समृद्धि दिलाता है.
खास अवसरों जैसे मकर संक्रांति, गंगा दशहरा, माघ पूर्णिमा और अक्षय तृतीया पर किए गए दान का पुण्य प्रभाव कई जन्मों तक आत्मा का साथ निभाता है.
इंसान के कर्म जिनका हिसाब भुगतना ही पड़ता है
कर्म का सीधा कनेक्शन जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म से होता है. व्यक्ति जो भी अच्छे या बुरे काम करता है, उनके परिणाम आत्मा को भुगतने ही पड़ते हैं.
महाभारत में इसका बहुत बड़ा उदाहरण मिलता है. जब भीष्म पितामह बाणों की शैया पर लेटे थे, तब उन्होंने श्रीकृष्ण से अपनी इस हालत का कारण पूछा था.
तब श्रीकृष्ण ने उन्हें याद दिलाया कि सात जन्म पहले उन्होंने एक सांप को कांटों पर फेंका था, उसी कर्म का फल उन्हें इस जन्म में भुगतना पड़ा.
अर्जित किया गया ज्ञान और सीखे गए गुण
इंसान अपने जीवन में जो भी ज्ञान, अच्छी बातें और कुशलता हासिल करता है, वह सब आत्मा के साथ अगले जन्म में जाता है. ज्ञान कभी बर्बाद नहीं होता है.
यही वजह है कि कुछ बच्चे बचपन से ही किसी खास कला या विद्या में बहुत होशियार होते हैं, क्योंकि ये उनके पूर्व जन्म के संस्कारों और ज्ञान का असर होता है.
इसलिए इंसान को अपना समय हमेशा अच्छी बातें और ज्ञान सीखने में लगाना चाहिए, क्योंकि ये कमाई कभी व्यर्थ नहीं जाती है.
(Disclaimer): यह लेख गरुड़ पुराण, हिंदू धर्मग्रंथों और प्रचलित धार्मिक मान्यताओं में उपलब्ध जानकारियों पर आधारित है.
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