अभी भी है समय, जान लें क्या है दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का उत्तम मुहूर्त, गणेश जी और लक्ष्मी जी की आरती से उपासना करें संपन्न!
आज दिवाली पर लक्ष्मी जी की पूजा करने का उत्तम मुहूर्त क्या है? आइए इस बारे में विस्तार से जानें. इसके साथ ही पूजा को मां लक्ष्मी और गणेश जी की आरती करके संपन्न करें.
Deepawali, Diwali Puja Shubh Muhurat: दिवाली का त्योहार हर साल कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है. इस साल यह पर्व 8 नवंबर 2026, रविवार के दिन यानी आज बड़े ही धूमधाम से देशभर में मनाया जा रहा है. दिवाली पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करने का विशेष महत्व है. हालांकि, किसी भी पूजा का पूरा फल तभी मिलता है, जब वह शुभ मुहूर्त में की जाए. इस साल कार्तिक अमावस्या तिथि पर दिवाली की पूजा के लिए कई अद्भुत मुहूर्त बन रहे हैं. जिसमें गृहस्थ से लेकर व्यापारी वर्ग मां लक्ष्मी और गणेश जी की उपासना कर सकते हैं. आइए दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त देख लें.
दिवाली 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
दीपावली की पूजा वृष लग्न में करना अति शुभ माना जाता है लेकिन अगर इस काल में पूजा करने का मौका हाथ से निकल जाए तो रात को निशीथ काल मुहूर्त में देवी लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा की जा सकती है. इस साल लक्ष्मी पूजा के लिए 3 अति उत्तम शुभ मुहूर्त बन रहे हैं. आइए इन तीनों मुहूर्त पर एक नजर डालें.
पूजा करने का सबसे उत्तम समय वृष काल (स्थिर लग्न)- शाम 05:54 बजे से लेकर रात 7:50 बजे तक होगा.
प्रदोष काल शाम 5:30 से शुरू होगा. प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जा सकती है.
शुभ चौघड़िया 7:11 तक होगी और फिर अमृत की चौघड़िया शाम 5:30 बजे से लेकर रात 8:09 बजे तक होगी.
निशीथ काल मुहूर्त- रात 8:11 से लेकर रात 10:52 बजे तक होगा. इसी समयावधि में अमृत और चर की चौघड़िया भी पड़गी.
महानिशीथ काल मुहूर्त- रात 11:44 बजे से लेकर रात 12:36 (9 नवंबर) बजे तक है. इस मुहूर्त में काली उपासना की जाती है.
'॥ आरती श्री लक्ष्मी जी ॥'
'ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता।'
'तुमको निशिदिन सेवत,हरि विष्णु विधाता॥'
'ॐ जय लक्ष्मी माता॥'
'उमा, रमा, ब्रह्माणी,तुम ही जग-माता।'
'सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत,नारद ऋषि गाता॥'
'ॐ जय लक्ष्मी माता॥'
'दुर्गा रुप निरंजनी,सुख सम्पत्ति दाता।'
'जो कोई तुमको ध्यावत,ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥'
'ॐ जय लक्ष्मी माता॥'
'तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।'
'कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता॥'
'ॐ जय लक्ष्मी माता॥'
'जिस घर में तुम रहतीं,सब सद्गुण आता।'
'सब सम्भव हो जाता,मन नहीं घबराता॥'
'ॐ जय लक्ष्मी माता॥'
'तुम बिन यज्ञ न होते,वस्त्र न कोई पाता।'
'खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता॥'
'ॐ जय लक्ष्मी माता॥'
'शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर,क्षीरोदधि-जाता।'
'रत्न चतुर्दश तुम बिन,कोई नहीं पाता॥'
'ॐ जय लक्ष्मी माता॥'
'महालक्ष्मीजी की आरती,जो कोई जन गाता।'
'उर आनन्द समाता,पाप उतर जाता॥'
'ॐ जय लक्ष्मी माता॥'
'॥' श्री गणेशजी की आरती ॥'
'जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
'माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥' x2
'एकदन्त दयावन्त,चार भुजाधारी।
'माथे पर तिलक सोहे,मूसे की सवारी॥' x2
'(माथे पर सिन्दूर सोहे,मूसे की सवारी॥')
'पान चढ़े फूल चढ़े,और चढ़े मेवा।
'(हार चढ़े, फूल चढ़े,और चढ़े मेवा।)
'लड्डुअन का भोग लगे,सन्त करें सेवा॥' x2
'जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
'माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥' x2
'अँधे को आँख देत,कोढ़िन को काया।
'बाँझन को पुत्र देत,निर्धन को माया॥' x2
'सूर' श्याम शरण आए,सफल कीजे सेवा।
'माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥' x2
'(दीनन की लाज राखो,शम्भु सुतवारी।
'कामना को पूर्ण करो,जग बलिहारी॥' x2)
'जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
'माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥' x2
(डिस्क्लेमर: यह लेख पंचांग और ज्योतिषीय गणना पर आधारित है. मुहूर्त स्थान के अनुसार बदल सकता है. कृपया पूजा से पहले अपने स्थानीय पंडित या पंचांग से पुष्टि अवश्य कर लें.)