Diwali 2026: दिवाली की अगली सुबह क्यों पीटते हैं सूप, क्या है दरिद्रता भगाने वाली ये खास परंपरा?
दिवाली मां लक्ष्मी के स्वागत का दिन है. इस दिन पूरे सम्मान के साथ और पूजा करके मां लक्ष्मी को घर में बुलाया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिवाली की अगली सुबह घर से दरिद्रता भगाने की परंपरा को निभाया जाता है. आइए इस बारे में विस्तार से जानें.
Diwali 2026: रोशनी और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व दिवाली आज यानी 8 नवंबर 2026, रविवार को बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस दिन दीप जलाए जाते हैं और रंगोली बनाई जाती है. शाम को विधि-विधान से मां लक्ष्मी व गणेश जी की पूजा की जाती है. ऐसी धार्मिक मान्यताएं हैं कि दिवाली की रात को जिस घर में साफ-सफाई कर पूजा की जाती है उस घर में मां लक्ष्मी पधारती हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि और धन पाने का आशीर्वाद देती हैं. क्या आप जानते हैं लक्ष्मी जी के स्वागत के बाद अगली ही सुबह घर से दरिद्रता भगाने की भी एक विशेष परंपरा निभाई जाती है. आइए इस परंपरा के बारे में विस्तार से जानें.
दिवाली की अगली सुबह क्यों पीटते हैं सूप?
धार्मिक मान्यता है कि दिवाली की रात को जब मां लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है तो उसी की अगली सुबह सूप पीटकर घर से दरिद्रता को भगाया जाता है या यह कहें कि घर से दुख व निर्धनता की देवी अलक्ष्मी को भगाया जाता है. घर से गरीबी यानी दरिद्रता को बाहर करने का यह एक प्रतीकात्मक विधान है. मान्यता है कि घर से दरीद्रता को भगाने से पूरे घर में सुख-शांति आती है, धन की वृद्धि तेजी से होती है और घर में अन्न का भंडार भरा रहता है. दरिद्रता भगाने से घर और शरीर से सभी तरह की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और घर में मां लक्ष्मी स्थायी रूप से वास करती हैं. रोग, कलह और आर्थिक परेशानियों का अंत होता है.
कितने बजे सूप पीटा जाता है?
धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार, सूप पीटकर दरिद्रता भगाने की विधि को दिवाली की अगली ही सुबह पूरी की जाती है. सूर्योदय के समय ब्रह्म मुहूर्त से थोड़ा पहले सूप पीटा जाता है, वहीं कुछ जगहों पर जब पूरा परिवार सो रहा होता है तो घर की कोई बड़ी महिला तड़के सुबह 3:30 से 4 बजे के बीच ही सूप पीटती हैं. दरिद्रता निकालने की यह परंपरा विशेष रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के गांवों में निभाई जाती है.
सूप पीटने की विधि
सूप पीटने की परंपरा घर की महिलाएं या परिवार के बड़े निभाते हैं.
दिवाली की अगली सुबह सूर्योदय से पहले उठें और स्नान आदि कर लें.
पुराना सूप और लकड़ी की डंडी लें.
अब घर के कोने-कोने में घूमते हुए सूप को डंडी से पीटें.
आंगन और मुख्य दरवाजे तक इसी तरह सूप बजाते हुए आएं.
सूप पीटते हुए बोलते रहें ‘दरिद्र भाग जा, लक्ष्मी घर आ’ ‘ईश्वर बैठे, दरिद्र निकले’.
अब सूप को घर से बाहर रख दें और इसका इस्तेमाल न करें.
सूप को गांव या घर से दूर ले जाकर फेंक दें.
इसके बाद घर की साफ-सफाई करें और गंगाजल छिड़कें.
(Disclaimer- यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक जानकारी और इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है. पूजा-विधि अपनाने से पहले किसी विद्वान से सलाह अवश्य लें.)