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बात पौराणिक कथाओं की हो, धर्म की हो या ज्योतिष की. अक्सर इनसे जुड़े शब्दों का हम इस्तेमाल करते रहते हैं, लेकिन हम में से कई को उनके सही मतलब नहीं पता होते. उदाहरण के लिए भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण हाथ में सुदर्शन चक्र धारण करते हैं. सुदर्शन चक्र से जुड़ी कई कहानियां भी हमने सुनी हैं. लेकिन ये बात शायद ही पता हो कि सुदर्शन चक्र अस्त्र है या शस्त्र? कई लोगों को तो यह भी लग सकता है कि अस्त्र-शस्त्र एक ही बात है, जिससे किसी का वध किया जाता है. हालांकि, ये दोनों एक तरह से हथियार ही हैं जिनका उपयोग किसी को मारने में ही होता है, लेकिन इनके मतलब अलग-अलग हैं.
पौराणिक कहानियों में देवी-देवता, योद्धा, युद्ध में अपने शत्रुओं के खिलाफ अस्त्र-शस्त्र का उपयोग करते थे.
अस्त्र : अस्त्र का अर्थ है वह हथियार जिसे हाथ से पकड़कर नहीं, बल्कि किसी मंत्र, अग्नि या यंत्र के माध्यम से दूर फेंका जाता है. इसमें योद्धा हथियार को हाथ में पकड़कर दुश्मन पर प्रहार नहीं करता है. बल्कि मंत्र या किसी अन्य शक्ति के जरिए चलाता है.
जैसे- ब्रह्मास्त्र, सुदर्शन चक्र, बाण (जिन्हें धनुष जैसे यंत्र से छोड़ा जाए).
शस्त्र : जबकि शस्त्र वह हथियार जिसे हाथ में पकड़कर सीधे दुश्मन पर प्रहार किया जाता है. इन्हें फेंका नहीं जाता है.
जैसे - तलवार, गदा, फरसा या कटार.
यंत्र-मंत्र-तंत्र
इसी तरह यंत्र-मंत्र-तंत्र शब्द भी एक-दूसरे से बिल्कुल अलग-अलग हैं. इन तीनों का ही उपयोग किसी न किसी मकसद को पूरा करने के लिए किया जाता है लेकिन ये अलग-अलग होते हैं. इनके अर्थ भी जान लीजिए.
यंत्र : यंत्र किसी मशीन को भी कहा जा सकता है. लेकिन धर्म के संदर्भ में बात करें तो यह किसी विशेष उद्देश्य, पूजा या ऊर्जा को केंद्रित करने के लिए बनाया गया ज्यामितीय चित्र होता है, जिसे किसी देवी-देवता का 'शरीर' या प्रतीक माना जाता है.
जैसे- श्रीयंत्र, महालक्ष्मी यंत्र, श्री विष्णु यंत्र.
मंत्र : मंत्र कुछ शब्दों का समूह होता है, जिसमें विशेष शक्ति होती है. उसका उच्चारण (जाप) करने से मन एकाग्र होता है और विशेष दैवीय ऊर्जा या शक्ति जाग्रत होती है. मंत्र का उपयोग भी किसी विशेष मकसद को पूरा करने के लिए किया जाता है.
जैसे - गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र या किसी भी देवी-देवता से जुड़ा मंत्र.
तंत्र : तंत्र का उपयोग भी किसी न किसी मकसद के लिए होता है. यह पूरी विधि या प्रणाली या विज्ञान होता है. इसमें मंत्र और यंत्र दोनों शामिल होते हैं और उनकी मदद से कोई विशेष नियम या प्रक्रिया बनाई जाती है.
कई बार लोग यज्ञ और हवन को भी एक ही समझ बैठते हैं. जबकि यज्ञ एक बड़ा अनुष्ठान है. जिसमें मंत्र, आहुति और विधियां शामिल होती हैं. वहीं हवन अग्नि में निर्धारित सामग्री की आहुति देने की क्रिया को कहते हैं, जो यज्ञ का हिस्सा होता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी हिंदू धार्मिक परंपराओं, पौराणिक मान्यताओं और प्रचलित शब्दार्थों पर आधारित है. अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में इनके वर्णन में अंतर हो सकता है.)