SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

Dhanteras Ki Katha: 12 साल तक किसान के घर रहीं मां लक्ष्मी, जाते-जाते दे गईं मालामाल होने का वरदान!

आज धनतेरस है और शाम को शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्‍मी, भगवान धन्‍वंतरि और कुबेर देवता की पूजा की जाएगी. पूजा में धनतेरस की यह पौराणिक कथा जरूर पढ़ें. मान्‍यता है कि इससे लक्ष्‍मी जी प्रसन्‍न होकर धन-समृद्धि का वरदान देती हैं.

Written By Shraddha Jain
Published: Nov 06, 2026, 10:33 AM IST | Updated: Nov 06, 2026, 10:38 AM IST
Image Credit: धनतेरस की पौराणिक कथा जिसमें मां लक्ष्‍मी की कार्तिक कृष्‍ण त्रयोदशी को पूजा करने का महत्‍व बताया गया है. (Photo:AI)
Join

धनतेरस आज 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जा रही है. हर साल कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह पर्व मनाते हैं. धन, समृद्धि, आरोग्‍य देने वाले इस पर्व पर शाम को वृष लग्‍न में पूजा करना सबसे शुभ माना गया है. इस साल धनतेरस पर मां लक्ष्‍मी, धन कुबेर और भगवान धन्‍वंतरि की पूजा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त शाम को 06:01 बजे से 07:56 बजे तक है. इस समय विधि-विधान से पूजा करें और धनतेरस की कथा जरूर पढ़ें.

धनतेरस की कथा

एक समय की बात है भगवान विष्णु मृत्युलोक में विचरण करने के लिए आ रहे थे तब लक्ष्मी जी ने भी उनसे साथ चलने का आग्रह किया. विष्णु जी ने कहा कि मैं जो बात कहूं अगर आप उसे मानो तो तो फिर चलो. तब लक्ष्मी जी उनकी बात मान गईं और भगवान विष्णु के साथ भूमंडल पर आ गईं. कुछ देर बाद एक जगह पर पहुंचकर भगवान विष्णु ने लक्ष्मी जी से कहा कि जब तक मैं न आऊं तुम यहां ठहरो. मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं, तुम उधर मत आना.

विष्णुजी के जाने पर लक्ष्मी के मन में कौतुहल जागा कि आखिर दक्षिण दिशा में ऐसा क्या रहस्य है जो मुझे मना किया गया है और भगवान स्वयं चले गए. लक्ष्मी जी से रहा न गया और जैसे ही भगवान आगे बढ़े लक्ष्मी भी पीछे-पीछे चल पड़ीं. कुछ ही आगे जाने पर उन्हें सरसों का एक खेत दिखाई दिया जिसमें खूब फूल लगे थे. सरसों की शोभा देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गईं और फूल तोड़कर अपना श्रृंगार करने के बाद आगे बढ़ीं. आगे जाने पर एक गन्ने के खेत से लक्ष्मी जी गन्ने तोड़कर रस चूसने लगीं.

(यह भी पढ़ें: धनतेरस आज, पूजा से लेकर सोना-चांदी खरीदने और कार डिलीवरी तक, देखें धनतेरस के सबसे शुभ मुहूर्त) 

उसी क्षण विष्णु जी आए और उन्‍हें दक्षिण दिशा में आया हुआ देखकर नाराज हो गए. साथ ही उन्‍होंने लक्ष्मी जी को शाप दे दिया कि मैंने तुम्हें इधर आने को मना किया था,पर तुम न मानी और किसान की चोरी का अपराध कर बैठीं. अब तुम इस अपराध के जुर्म में इस किसान की 12 वर्ष तक सेवा करो. ऐसा कहकर भगवान उन्हें छोड़कर क्षीरसागर चले गए. तब लक्ष्मी जी उस गरीब किसान के घर रहने लगीं.

एक दिन लक्ष्मीजी ने उस किसान की पत्नी से कहा कि तुम स्नान कर पहले मेरी बनाई गई इस देवी लक्ष्मी का पूजन करो, फिर रसोई बनाना, तब तुम जो मांगोगी मिलेगा. किसान की पत्नी ने ऐसा ही किया. पूजा के प्रभाव और लक्ष्मी की कृपा से किसान का घर दूसरे ही दिन से अन्न, धन, रत्न, स्वर्ण आदि से भर गया. लक्ष्मी ने किसान को धन-धान्य से परिपूर्ण कर दिया. किसान के 12 वर्ष बड़े आनंद से कट गए. फिर 12 वर्ष के बाद लक्ष्मीजी जाने के लिए तैयार हुईं.

विष्णुजी लक्ष्मीजी को लेने आए तो किसान ने उन्हें भेजने से इंकार कर दिया. तब भगवान ने किसान से कहा कि इन्हें कौन रोक सकता है, यह तो चंचला हैं, यह कहीं नहीं ठहरतीं हैं. इनको बड़े-बड़े नहीं रोक सके. इनको मेरा शाप था इसलिए 12 वर्ष से तुम्हारी सेवा कर रही थीं. तुम्हारी 12 वर्ष सेवा का समय पूरा हो चुका है. किसान हठपूर्वक बोला कि नहीं अब मैं लक्ष्मीजी को नहीं जाने दूंगा.

(यह भी पढ़ें: धन की पोटली से टकराएगा जहर का घड़ा! धनतेरस पर शुभ-अशुभ की टक्कर, आपकी राशि बचेगी या डूबेगी?) 

तब लक्ष्मीजी ने कहा कि हे किसान तुम मुझे रोकना चाहते हो तो जो मैं कहूं वैसा करो. कल तेरस है. तुम कल घर को लीप-पोतकर स्वच्छ करना. रात्रि में घी का दीपक जलाकर रखना और शायंकाल मेरा पूजन करना और एक तांबे के कलश में रुपए भरकर मेरे लिए रखना, मैं उस कलश में निवास करूंगी. किंतु पूजा के समय मैं तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी.  

इस एक दिन की पूजा से वर्ष भर मैं तुम्हारे घर से नहीं जाऊंगी. यह कहकर वह दीपकों के प्रकाश के साथ दसों दिशाओं में फैल गईं. अगले दिन किसान ने लक्ष्मीजी के कथानुसार पूजन किया. उसका घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया. इसी वजह से हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्‍ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन लक्ष्मीजी की पूजा होने लगी.

(Disclaimer- यह कथा पौराणिक मान्यताओं और लोक प्रचलित कथाओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य आस्था और धार्मिक भावना को बनाए रखना है, इसे ऐतिहासिक तथ्य के रूप में न देखें.)
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES