रात के समय आकाश का राजा अगर कोई होता है तो वो है चंद्रमा जिसके इर्द-गिर्द लाखों ताराओं का एक जाल सा बिछा हुआ महसूस होता है. भारतीय संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा केवल एक खगोलिय पिंड नहीं है बल्कि इसकी पूजा चंद्र देव के रूप में की जाती है, कभी शरद पूर्णिमा पर, कभी करवा चौथ पर तो कभी अन्य पूर्णिमा तिथियों पर. भारतीय माताएं चंद्रमा को अपने बच्चे का मामा कहकर पुकारती हैं. इतना ही नहीं, धार्मिक मान्यताओं में सोमदेव के रूप में चंद्रमा की स्तुति की जाती है. पर कभी आपने सोचा है कि बच्चों के साथ चंद्रमा का मामा-भांजे का रिश्ता कैसे बन गया. चंद्रमा की उत्पत्ति कैसे हुई और इसका देवी लक्ष्मी से क्या संबंध है. आइए इस बारे में विस्तार से जानें.
ऐसी धार्मिक मान्यता है कि चंद्रदेव की किरणों से अमृत की बारिश होती है. सनातन परंपरा में चंद्र देव को समर्पित शरद पूर्णिमा पर्व मनाया जाता है. आश्विन पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला पर्व शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में जब खीर बनाकर रखा जाता है तो माना जाता है कि उस खीर पर चंद्रमा की चांदनी पड़ने से उसमें अमृत खुल गया है. शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ प्रकाशित होता है और धरती के बहुत पास होता है.
शिव पुराण अनुसार शिव-पार्वती के आनंद तांडव से सूर्य और चंद्रमा की उत्पत्ति हुई. शिव जी और देवी पार्वती जब आनंद तांडव कर रहे थे तब शिवजी की आंखों से जो ऊर्जा निकली वो सूर्य बनी. वहीं, देवी पार्वती की कांतिमान देह से जो शितलता निकली वो चंद्रदेव के रूप में आकाश में जाकर स्थापित हुई.
ब्रह्नवैवर्त पुराण के अनुसार जब श्रीहरि विष्णु के नाभिकमल से ब्रह्मा उत्पन्न हुए तो उनके भीतर भावना जागी कि वो एक हैं और अकेले हैं. तब उन्होंने अपने हृदय पर हाथ रखकर अपने मन से एक शीतल पिंड निकाला जो कि साफ, सफेद और शांति की अनुभूति करता था. इसको देखकर ब्रह्मदेव ने अपने मन में असीम शांति का अनुभव किया. यही पिंड चंद्रमा के रूप में आकाश में स्थापित किया गया.
देव और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया जिसके कारण समुद्र से में14 रत्न निकले. इन रत्नों में चंद्र देव, देवी लक्ष्मी और अमृत समेत और भी चमत्कारी चीजे थीं. समुद्र से जन्म लेने की वजह से ही ज्योतिष में चंद्रमा को जल तत्व माना गया है. वहीं, दूसरी ओर समुद्र मंथन से ही देवी लक्ष्मी निकलीं. इस तरह चंद्रमा को सागर पुत्र और लक्ष्मी जी को सिंधुसुता कहा गया. इस तरह चंद्र देव को देवी लक्ष्मी का भाई कहा गया. ध्यान दें शंख भी समुद्र मंथन से ही निकला था ऐसे में उसे भी देवी लक्ष्मी का भाई कहा गया.
देवी लक्ष्मी
अपनी दिव्यता और देवी लक्ष्मी का भाई होने का कारण भारतीय जनमानस में चंद्रमा पृथ्वी वासी बच्चों के मामा कहलाए. क्योंकि देवी लक्ष्मी को मां लक्ष्मी के रूप में पूजा जाता है. वहीं, एक भाव और निकलकर आता है. वो ये कि भारतीय परंपरा में घर की प्रमुख महिला को यानी घर की मालकिन को लक्ष्मी का रूप माना जाता है जिस भाव से चंद्र देव को अपना भाई मानते हुए उन्हें अपने बच्चों का मामा कह देती हैं.
देवी पृथ्वी
पृथ्वी और चंद्रमा का एक गहरा खगोलीय संबंध है. विज्ञान के नजरिए से देखे तो चंद्रमा पृथ्वी का उपग्रह है जो हमेशा पृथ्वी के चक्कर लगाता है. यह चक्कर पृथ्वी के लिए एक रक्षा कवच की तरह देखा जाता है जो हमेशा पृथ्वी वासी की रक्षा करता है, वैसे ही जैसे एक भाई अपनी बहन की रक्षा करता है. वहीं, पृथ्वी के लोग पृथ्वी को अपनी माता मानते हैं. जिसके कारण चंद्रमा के साथ यहां के लोग मामा का संबंध मानते हैं. यही कारण है कि माएं अपने बच्चे के लिए चंदा मामा वाली लोरी सुनाती हैं और चंद्रमा को मामा के रूप में संबोधित करती हैं.
मन पर प्रभाव
ज्योतिष अनुसार चंद्रमा मन का करक है. कुंडली में मजबूत चंद्रमा व्यक्ति को शुभ फल देता है. ऐसे लोगों का मन शांत, स्थिर और प्रसन्न रहता है. ये लोग अंतर्ज्ञानी और भावनात्मक रूप से मजबूत और संतुलित रहते हैं. बुरे समय में भी संतोष और धैर्य रखते हैं. वहीं, कुंडली में कमजोर या पीड़ित चंद्रमा व्यक्ति को मानसिक तनाव, चिंता और अनिद्रा देता है. ऐसे लोग डिप्रेशन में रहने लगते हैं और घबराहट महसूस करते हैं. मन शांत नहीं रहता और बार-बार किसी भी बात पर मन बदलता रहता है. एकाग्रता की कमी आ जाती है और किसी भी काम से जल्दी मन ऊब जाता है.
धन पर प्रभाव
ज्योतिष में चंद्रमा धन और भौतिक सुख से भी संबंधित है. चंद्रमा के शुभ प्रभाव से घर और जीवन में आर्थिक स्थिरता बनी रहती है और सुख की कमी नहीं होती है. धनहानि नहीं होती है और धन बनाने या कमाने में दिमाग खूब चलता है. वहीं, कुंडली में अगर चंद्रमा की स्थिति कमजोर हो तो जीवन में आर्थिक उतार-चढ़ाव बढ़ जाती है. पैसा पानी की तरह बहता है और धनी भी देखते ही देखते दरिद्र हो जाता है.
(डिस्क्लेमर- यह लेख वैदिक ज्योतिष, पंचांग और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित सामान्य जानकारी है. इसे अंतिम सत्य न मानें। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विद्वान ज्योतिषाचार्य से व्यक्तिगत परामर्श अवश्य लें.)