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भोजन के नियम: किसी का जूठा खाना या अपना जूठा खिलाना पड़ सकता है भारी? पुराणों के ये 10 रहस्य बदल देंगे जिंदगी

साथ में खाने या जूठा खाने से प्‍यार बढ़ता है...ऐसा कहना या करना वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टि से सही नहीं है. हिंदू धर्म में भोजन सिर्फ पेट भरना नहीं है, बल्कि इसमें अन्‍न को ब्रह्म माना गया है. जानिए हिंदू धर्म पुराणों में बताए गए भोजन से जुड़े जरूरी नियम और उनका जिंदगी पर प्रभाव.

भोजन के नियम: किसी का जूठा खाना या अपना जूठा खिलाना पड़ सकता है भारी? पुराणों के ये 10 रहस्य बदल देंगे जिंदगी
Image Credit: हिंदू पुराणों में बताए गए भोजन के नियम और उनके पीछे की वजहें. (Photo:AI)

लोग भोजन को सिर्फ भूख मिटाने और स्‍वाद से जोड़ते हैं, जबकि हिंदू धर्म और परंपरा में भोजन को इससे कहीं ज्‍यादा महत्‍व दिया गया है. यहां तक कि तैत्तिरीय उपनिषद में अन्‍न को ब्रह्म कहा गया है. इसलिए भोजन को संस्‍कार (अन्‍नप्राशन संस्‍कार) से जोड़ा गया है. लेकिन लोग जाने-अनजाने में भोजन को लेकर कई गलतियां कर बैठते हैं. फिर चाहे वह जूठा खाना-खिलाना हो, भोजन करने का गलत समय हो, गलत तरीका हो या भोजन की निंदा करना हो. आज हम भोजन से जुड़े 10 ऐसे रहस्‍यों के बारे में जानते हैं जिनका वर्णन हिंदू धर्म पुराणों में मिलता है.

भोजन से जुड़े नियम और उनके पीछे के रहस्‍य

1. एकान्त में भोजन  

वशिष्ठ स्मृति में लिखा है कि हमेशा भोजन एकांत में करना चाहिए. अन्‍न दृष्टि-दोष तुरंत पकड़ता है. कई लोगों के सामने भोजन करने से उनकी दृष्टि की ईर्ष्‍या, लालच, घृणा का आपके भोजन पर पड़ सकता है. ऐसा भोजन आपके शरीर में जाकर नकारात्‍मकता, अशांति बढ़ाता है.

2. खाने से पहले शरीर के 5 अंग धोना

पद्मपुराण के अनुसार, भोजन करने से पहले शरीर के 5 अंग जरूर धोना चाहिए. ये हैं दोनों हाथ, दोनों पैर और मुख. बिना ये अंग धोए भोजन करने से कई तरह की अशुद्धियां शरीर में जा सकती हैं. वहीं हाथ-पैर धोने से शरीर का परिधीय रक्तसंचार पेट की ओर लौटता है, जिससे पाचन अग्नि बढ़ती है और खाना अच्‍छे से पचता है.

3. भोजन करते समय न बोलें

स्कन्दपुराण समेत कई पुराणों में लिखा है भोजन करते समय मौन रहना चाहिए. वरना बोलते हुए खाने से भोजन के साथ वायु भी अंदर जाती है, जो दोष पैदा करती है. साथ ही बोलते हुए खाने से भोजन का पूरा स्‍वाद और रस नहीं मिलता है.

4. खाते समय बुराई करना

तैत्तिरीय उपनिषद में कहा गया है कि खाना बनाते समय और खाते समय किसी की बुराई न करें. वरना ऐसा भोजन विष के समान हो जाता है.

5. रात में भरपेट न खाएं

स्कन्दपुराण, आयुर्वेद, जैन धर्म समेत कई ग्रंथों में कहा गया है कि सूर्यास्‍त के बाद भोजन न करें. यदि मजबूरी में करना ही पड़े तो बहुत कम खाएं. क्‍योंकि रात में सूर्य की रोशनी न होने से जठराग्नि मंद है. रात में किया गया भोजन पेट में सड़ता है और कई तरह की बीमारियां देता है.

6. अपवित्र स्‍थान पर भोजन करना

गोद में थाली रखकर खाना, बिस्‍तर पर खाना या किसी गंदी-अपवित्र जगह पर भोजन करना दरिद्रता लाता है. यहां भोजन करने से आलस्‍य बढ़ता है. लक्ष्‍मी जी रुष्‍ट होती हैं. साथ ही अत्‍यधिक थके होने पर भी भोजन न करें. पहले 10 मिनट विश्राम करें, फिर भोजन करें. वरना इससे शरीर का तापमान गड़बड़ा जाता है.

7. जूठा खाना या खिलाना

जूठा खाना या खिलाना वैज्ञानिक दृष्टि और धार्मिक दृष्टि दोनों से ही ठीक नहीं है. यह लार के जरिए एक व्‍यक्ति की बीमारियां दूसरे तक ले जा सकता है. मनुस्मृति में जूठा को प्राण-उच्छिष्ट कहा गया है. अपना जूठा किसी को देना या किसी का जूठा खाना प्राण बांटने जैसा है. प्राण को अपवित्र करना है, लिहाजा इससे बचें.

9. अंधेरे में या जूते पहन कर न खाना

कूर्मपुराण में उन स्थितियों का वर्णन किया गया है, जिसमें भोजन नहीं करना चाहिए. जैसे- अंधेरे में, खुले आसमान के नीचे, बिस्‍तर पर, चलते हुए, जूते पहन कर, हंसते या रोते हुए भोजन करना. अंधेरे में या खुले आसमान के नीचे भोजन करने से कीड़ा, बाल या अन्‍य किसी तरह की अशुद्धि भोजन में आ सकती है. जो कि हो सकता है कि दिखे भी नहीं. इसके अलावा जूते पहनकर, चलते हुए, बिस्‍तर पर बैठकर किया गया भोजन तमोगुण बढ़ाता है. वहीं भोजन करते समय हंसना-रोना, चिल्‍लाना, बात करना श्‍वास नली में भोजन अटका सकता है.

10. भूखे सेवक या गुस्‍से में बनाया भोजन न खाएं

चरकसंहिता में इस नियम को बहुत महत्‍व दिया गया है कि भोजन पकाने वाले का मन कैसा है. गुस्‍से, भूख, घृणा या किसी भी तरह के नकारात्‍मक विचार के साथ पकाया गया भोजन शरीर में कई दोष देता है. यदि आपका खाना पका रहा सेवक भूखा है और वह आपको भोजन करवा रहा है तो ऐसा न करें. उसके भी भोजन की व्‍यवस्‍था करें. साथ ही जो प्रेम से भोजन न पकाए उसके हाथ का अन्‍न भी नहीं खाना चाहिए.

(Disclaimer- इस लेख में बताए गए धार्मिक और तात्विक विचार विभिन्न शास्त्रीय/परंपरागत मान्यताओं पर आधारित हैं. इनके आधुनिक वैज्ञानिक अर्थ या स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को चिकित्सा सलाह न माना जाए.) 

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Shraddha Jain

Shraddha Jain

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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