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किसी की भी जिंदगी बिगाड़ सकता है शनि-राहु का पिशाच योग, जानिए इसका असर और उपाय

Pishach Yoga Remedies: पिशाच योग का गहरा प्रभाव व्यक्ति के जीवन की समस्याओं को बढ़ा सकता है. वहीं किसी भी कुंडली के जिस भाव में यह योग बनता है तो उस भाव से जुड़ी परेशानियां व्यक्ति के जीवन में देखने को मिलती हैं.

Written By Padma Shree Shubham
Published: Aug 31, 2026, 12:47 PM IST | Updated: Aug 31, 2026, 01:55 PM IST
Image Credit: Pishach Yog
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Pishach Yoga Effects: कुछ लोगों की कुंडली में ऐसे योग भी बनते हैं जिसकी वजह से उन्हें अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. मन में उलझन बनी रहती है और आर्थिक तंगी बढ़ने लगती है. इसी तरह का एक योग है पिशाच योग जो कुंडली में ग्रहों की अलग-अलग स्थितियों के कारण बनता है. शनि की राहु के साथ अगर किसी भाव में युति हो जाए तो पिशाच योग बनता है. इसी तरह से राहु और चंद्रमा भी इस योग को बनाते हैं. यह योग कब-कब बनता है, इसका जीवन पर प्रभाव कैसा होता है और इसके प्रभाव को कम करने के लिए कौन से उपाय करें. आइए इस बारे में विस्तार से जानें.

पिशाच योग बनने की स्थितियां

शनि-राहु की युति वाला पिशाच योग

जहां तक शनि और राहु के द्वारा बनने वाले पिशाच योग की बात करें तो इसका प्रभाव बहुत ही नकारात्मक बताया गया है. राहु भ्रम का कारक है और मानसिक उलझन को बढ़ाता है. वहीं जब राहु-केतु एक सेना के जैसा काम करते हुए शनि के कष्टकारी प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं.  

भाव के अनुसार पिशाच योग

जब किसी की कुंडली में पिशाच योग बनता है तो उस व्यक्ति की जिंदगी बिना किसी लक्ष्य के ही आगे बढ़ेती जाती है. कुंडली के जिस भाव में यह योग बन रहा होता है, उस भाव से जुड़ी परेशानियां व्यक्ति को घेर लेती है. जैसे अगर सातवें भाव में अगर शनि-राहु युति बन रही है तो शादी टूट सकती है. आठवें भाव में पिशाच योग बनने से व्यक्ति को ऊपरी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. 10वें भाव में बना यह योग करियर के संघर्ष को बढ़ा सकता है. 11वें भाव में बनी यह युति आय में कमी ला सकती है. ध्यान दें उम्र के 7 से लेकर 12 या 36 से लेकर 47 साल तक की अवधि तक यह योग जीवन की परेशानियों को बढ़ाए रखता है.

पिशाच योग के उपाय

पितरों का अच्छे से श्राद्ध कर्म करें.
शनि चालीसा का पाठ करें.
कन्या राशि वाले गाय का दान या कन्या दान करें.
दोनों कान छिदवाकर उसमें सोना धारण करें.
छाया दान करें और अंधों को भोजन करवाएं.
कुत्तों को हर दिन रोटी खिलाएं. 
शराब न पीएं और मांस न खाएं.
ब्याज से जुड़े काम न करें और न तो पराई स्त्री से संबंध रखें.
महामृत्युंजय मंत्र का जाप करवाएं.
अंधे, अपंगों, सेवकों और सफाइकर्मियों के लिए अच्छे काम करें. उनका सम्मान करें.
अहंकार और घमंड का भाव न रखें. विनम्रता का भाव रखें.
देवी, देवता और गुरुओं का अपमान न करें.
तिल, उड़द, भैंस, लोहा, तेल, काले कपड़े, काली गौ और जूते का दान करें.

(डिस्क्लेमर- यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं की व्याख्याओं पर आधारित है. इसे सामान्य सूचना के रूप में देखें, न कि किसी निश्चित परिणाम या भविष्यवाणी के दावे के रूप में. किसी भी व्यक्ति पर ग्रह गोचर का प्रभाव उसकी जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति, दशा, अंतर्दशा तथा अन्य ज्योतिषीय कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है.)

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About the Author

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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