तरंग शक्ति 2026: जोधपुर के आसमान में 'सूर्यकिरण' का जलवा, F-35 और राफेल ने बढ़ाया रोमांच
Rajasthan News: तरंग शक्ति 2026 के तहत जोधपुर में 8 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना ने खास एरियल डिस्प्ले किया. F-35, राफेल, A400M समेत कई देशों के विमान अभ्यास में शामिल हैं. जानें कितना बड़ा है यह बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास और इसका मकसद क्या है.
Tarang Shakti 2026: 8 अक्टूबर को जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर तरंग शक्ति 2026 के तहत खास एयर शो और एरियल डिस्प्ले देखने को मिला. भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम और सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम ने आसमान में अलग-अलग करतब और फॉर्मेशन उड़ान का प्रदर्शन किया. इसी दिन भारतीय वायुसेना दिवस भी मनाया गया. तरंग शक्ति के ऑपरेशनल फेज में भारत के साथ सात विदेशी देशों की वायुसेनाएं शामिल हैं. यह अभ्यास 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक चल रहा है और इसका फोकस अलग-अलग देशों की वायुसेनाओं के बीच तालमेल और साझा ऑपरेशन की क्षमता बढ़ाना है.
कितना बड़ा है तरंग शक्ति 2026?
तरंग शक्ति 2026 भारतीय वायुसेना का एक बड़ा बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास है. इसका आयोजन राजस्थान के जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर हो रहा है. यह अभ्यास 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक चलेगा और इसकी थीम ‘पावर इन पार्टनरशिप’ यानी साझेदारी में शक्ति रखी गई है. इसमें ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका और बांग्लादेश की वायुसेनाएं हिस्सा ले रही हैं. कई अन्य देश पर्यवेक्षक के तौर पर भी अभ्यास से जुड़े हैं.
एक साथ उड़ते हैं अलग-अलग देशों के विमान
इस तरह के अभ्यास में अलग-अलग देशों के विमानों को एक ही हवाई क्षेत्र में साथ उड़ाना आसान काम नहीं होता. हर देश के एयरक्रू और वायुसेना की अपनी प्रक्रियाएं और काम करने का तरीका होता है. तरंग शक्ति का एक बड़ा मकसद इन्हीं अलग-अलग तरीकों के बीच बेहतर तालमेल बनाना है. इसमें सिर्फ पायलट ही नहीं, बल्कि मिशन प्लानर और ऑपरेशनल सपोर्ट से जुड़े कर्मचारी भी एक-दूसरे के साथ काम कर रहे हैं. इससे उन्हें दूसरे देशों की कार्यप्रणाली समझने और अपने अनुभव साझा करने का मौका मिल रहा है.
F-35 से राफेल तक, कई खास विमान शामिल
इस अभ्यास में लड़ाकू विमानों के साथ परिवहन विमान और हवा में ईंधन भरने वाले विमान भी शामिल हैं. विदेशी विमानों में अमेरिकी F-35 Lightning II, फ्रांस के राफेल, F-16, A400M, MRTT, C-130, C-130J और KC-30A जैसे विमान शामिल हैं. खास बात यह है कि अमेरिकी F-35 की भारत में किसी सैन्य अभ्यास में पहली भागीदारी हो रही है. भारतीय वायुसेना के विमानों के साथ F-35 और दूसरे विदेशी विमान संयुक्त प्रशिक्षण में हिस्सा ले रहे हैं.
जर्मनी का A400M भी निभा रहा खास भूमिका
तरंग शक्ति में जर्मनी का A400M सैन्य परिवहन विमान भी शामिल है. यह सिर्फ सैनिकों या सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े लड़ाकू विमान अभियानों में भी हिस्सा ले रहा है. इसे लार्ज फोर्स एंगेजमेंट का हिस्सा बनाया गया है. यानी परिवहन विमान भी बड़े हवाई अभियान में लड़ाकू विमानों के साथ मिलकर अभ्यास कर रहा है. A400M को जर्मन वायुसेना के लिए अहम विमान माना जाता है, जो रणनीतिक और लॉजिस्टिक दोनों तरह के मिशन में काम आता है.
सिर्फ आसमान में उड़ान तक सीमित नहीं है अभ्यास
तरंग शक्ति का दायरा केवल विमानों की उड़ान और एरियल डिस्प्ले तक नहीं है. इसमें हवाई सुरक्षा, संयुक्त ऑपरेशन और अलग-अलग देशों की संचालन प्रक्रिया को समझने पर भी जोर दिया जा रहा है. अभ्यास के दौरान पेशेवर बातचीत के साथ सेमिनार, औद्योगिक दौरे, सेखों मैराथन, विरासत स्थलों का भ्रमण और योग जैसी गतिविधियां भी रखी गई हैं. इस अभ्यास का पहला संस्करण 2024 में आयोजित हुआ था और 2026 का आयोजन उसी कड़ी को आगे बढ़ा रहा है.