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Rajasthan News: राजस्थान के चर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से दो आरोपियों को बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी संजय बड़ाया और शुभांशु दीक्षित को जमानत दे दी है, लेकिन अभी भी पानी के घोटाले में आरोपी जेल की सलाखों के पीछे है. पूर्व मंत्री समेत 10 आरोपी अभी जेल में बंद हैं.
900 करोड़ के घोटाले में कई आरोपियों की याचिका
राजस्थान में 900 करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले के दो आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है. पीएचईडी के एडिशनल चीफ इंजीनियर शुभांशु दीक्षित और प्रॉपर्टी कारोबारी संजय बड़ाया को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. दोनों आरोपियों को एसीबी की एसआईटी ने जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया था. शुभांशु दीक्षित को करीब 7 महीने बाद और 5 महीने बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है. इससे पहले हाईकोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की थी.
घोटाले का मास्टरमाइंड है संजय बड़ाया
आरोप है कि संजय बड़ाया घोटाले का मास्टरमाइंड है. वह बिचौलिया की भूमिका में रहा था. बड़ाया थाईलैंड में हुई एक शादी में शामिल होकर भारत लौटा था. दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचते ही ब्यूरो इमीग्रेशन ने तुरंत एसीबी को सूचना दी थी. इसके बाद एसीबी ने संजय बड़ाया को गिरफ्तार किया था. बड़ाया के खिलाफ पहले से ही लुक आउट नोटिस जारी किया गया था. जांच एजेंसियों के अनुसार संजय बड़ाया पूर्व मंत्री महेश जोशी के करीबी हैं. पर्दे के पीछे संजय बढ़ाया विभाग को संभालता था. जांच एजेंसियों का दावा है कि वह पैसों के लेन-देन, ट्रांसफर-पोस्टिंग, नए लोगों को जोड़ने और टेंडरों में कथित गड़बड़ियों के काम में सक्रिय भूमिका निभाता था.
इंश्योरेंस कंपनी में नौकरी करता था संजय बड़ाया
जयपुर के रहन वाले संजय बड़ाया को एसीबी से पहले ईडी ने उसे 16 जुलाई 2024 को गिरफ्तार किया था, जबकि 17 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट से उसे जमानत मिली थी. अब एसीबी के भ्रष्टाचार के केस में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है. जांच में सामने आया कि वह 2022 तक एक इंश्योरेंस कंपनी में करीब 7 लाख रुपए सालाना वेतन पर नौकरी करता था, लेकिन जेजेएम घोटाले के कुछ ही समय में करोड़पति बन गया.
शुभांशु दीक्षित के आरोप
अतिरिक्त मुख्य अभियंता शुभांशु दीक्षित RWSSM बोर्ड के सचिव थे. इस घोटाले में शुभांशु दीक्षित की भूमिका के भी आरोप थे. श्रीश्याम और गणपति ट्यूबवेल फर्म को फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए टेंडर हासिल किए थे. जिसमें 900 करोड़ टेंडर दिए थे.
ये 10 आरोपी अभी जेल की सलाखों के पीछे
पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी, पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल तत्कालीन पीएचईडी एसीएस, केडी गुप्ता तत्कालीन शहरी चीफ इंजीनियर, दिनेश गोयल तत्कालीन स्पेशल प्रोजेक्ट चीफ इंजीनियर, DK गौड़ तत्कालीन तकनीकी चीफ इंजीनियर, निरिल कुमार तत्कालीन अधीक्षण अभियंता जेजेएम, सुशील शर्मा तत्कालीन वित्तीय सलाहकार जेजेएम, एमपी सोनी तत्कालीन अधीक्षण अभियंता डीडवाना, विशाल सक्सेना तत्कालीन अधिशाषी अभियंता और मुकेश पाठक इरकॉन कंपनी में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाला ये 10 आरोपी अभी जेल में हैं.
पूर्व मंत्री ने लगा रखी याचिका
पूर्व मंत्री महेश जोशी समेत कई आरोपियों की हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका दायर की हुई है. केंद्र सरकार की उपक्रम कंपनी इरकॉन कंपनी के नाम से गणपति और श्रीश्याम ट्यूबवेल फर्म को करीब 969 करोड़ के टेंडर दिए थे.