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रेगिस्तान में खजूर की मिठास: श्रीगंगानगर में तैयार हो गए खजूर के 8 बाग

श्रीगंगानगर के रेतीले टिब्बों और अकालग्रस्त इलाके में सातवीं पास किसान बद्रीनारायण शर्मा ने अपनी मेहनत से खेती की तस्वीर बदल दी. साल 2009 में 28 बीघा जमीन पर खजूर की खेती शुरू करने वाले बद्रीनारायण आज लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं. उनकी प्रेरणा से क्षेत्र में अब खजूर के 8 बाग विकसित हो चुके हैं.

Written By Zee Rajasthan Web Team
Published: Oct 31, 2026, 03:25 PM IST | Updated: Oct 31, 2026, 03:35 PM IST
Image Credit: सातवीं पास किसान का कमाल
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श्री गंगानगर जिले के राजियासर उपतहसील के देईदासपुरा व कौणपालसर गांव चारों ओर बड़े-बड़े रेतीलों टिब्बों से घिरा इस इलाके में ग्रामीण लोग वर्षों अकाल की मार झेलते रहे हैं. किसानों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो जाती हैं. बारिश नहीं होने पर अकाल के दिनों में अधिकतर लोगों का गांव से पलायन हो जाता था लेकिन अब इस क्षेत्र में खजूर के आठ बाग लहरा रहे हैं. 

जैसलमेर में खजूर की खेती देखकर आया आइडिया, 28 बीघा में लगाया पहला बाग 
इस क्षेत्र में सातवीं पास एक बुजुर्ग प्रगतिशील किसान देईदासपुरा निवासी बद्रीनारायण शर्मा ने अपनी मेहनत के बल पर टिब्बा क्षेत्र में चमत्कार कर दिया हैं. इन्होंनें इस क्षेत्र अनेक अकालों को झेला और अभावग्रस्त जीवन जिया. कई वर्ष पहले इनका किसी काम की वजह से जैसलमेर क्षेत्र में जाना हुआ, जहां उन्होंने एक खजूर की बाग की खेती देखी. उस क्षेत्र के किसानों से प्रेरित होकर उन्होंने इस बारानी टिब्बा क्षेत्र में ट्यूबवेल खोदकर ड्रिप सिस्टम से वर्ष 2009 में 28 बीघा भूमि पर खजूर का बाग लगाया.

खजूर की खेती से लाखों की कमाई 
इनकी प्रगतिशील किसान की मेहनत रंग लाई और आज यह बुजुर्ग किसान अपने खजूर के बाग से लाखों रुपये की आमदनी ले रहे हैं. मेहनत और सीखने की प्रेरणा की बदौलत आज इस बुजुर्ग प्रगतिशील किसान को खजूर की खेती का बेजोड़ ज्ञान हैं. वर्तमान में बद्रीनारायण शर्मा स्थानीय और बाहर के क्षेत्र के किसानों के प्रेरणा स्रोत बन गए हैं. किसान बद्री नारायण शर्मा किसानों को निःशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं और खजूर का बाग लगाने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं. इन्ही की प्रेरणा से अब तक इस क्षेत्र में खजूर के आठ बाद लग चुके हैं, जिसमें गौरीशंकर शर्मा की खेत में 10 बीघा, रतिराम के 14 बीघा, किशन पूनिया के 40 बीघा सहित अन्य किसानों की ओर से खजूर की खेती की जा रही हैं.

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टीशू कल्चर की चार और बीजू की 35 किस्मों से महक रहा मरुस्थल
इन बगीचों में टीशू कल्चर की चार किस्में खुनेजी, खलास, बरही, मेडजूल तथा बीजू की पैंतीस किस्में लगी हुई है. आज टिब्बा क्षेत्र के इस अभाव ग्रस्त इलाके में खजूर की खेती से किसानों को लाखों रुपए की आमदनी हो रही हैं और अनेक किसानों को रोजगार मिल रहा हैं. साथ ही मरूक्षेत्र खजूरों की मिठास के लिए सरोबार हो गया है. यह किसी चमत्कार से कम नहीं है. दूसरी ओर इन खजूरों के बाग लगने से वर्षा करवाने में सहायक सिद्ध होंगे.

पंजाब-हरियाणा से दिल्ली तक पहुंच रही खजूरों की मिठास 
यहां के खजूरों की महक पंजाब हरियाणा और दिल्ली के अनेक शहरों में जाती हैं और किसानों का मेला लगता हैं. यहां जुलाई अगस्त में मेला भरता हैं. पंजाब हरियाणा, गुजरात, दिल्ली, नोएडा, आगरा, मथुरा और राजस्थान के जयपुर, नागौर जालौर जैसलमेर किसान मेले में भाग लेने आते हैं. खजूरों के बागों का बड़े-बड़े प्रशासनिक अधिकारी और बागवानी से जुड़े हुए अनेक अधिकारी भी भ्रमण कर चुके हैं. टिब्बा क्षेत्र की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए यह फसल किसानों के लिए वरदान साबित हो रही हैं. 

Report- Pradeep Suthar
 

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