MBBS की डिग्री ही फर्जी: आठवीं पास बना अस्पताल का मालिक! 2 गिरफ्तार, SOG के रडार पर 7 डॉक्टर
Rajasthan News: राजस्थान में फर्जी MBBS डिग्री और मेडिकल दस्तावेजों से रजिस्ट्रेशन कराने के आरोप में SOG ने पंकज यादव और नानंजी राम चौधरी को गिरफ्तार किया है. अब मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन पदाधिकारियों की भूमिका और 7 अन्य डॉक्टरों की जांच जारी है.
Fake MBBS Degree Scam: राजस्थान में डॉक्टरों की डिग्रियों पर बड़ा सवाल, कहीं फर्जी डिग्री तो कहीं 3 जाली डिप्लोमा वाले डॉक्टर पकड़े गये है. SOG ने ऐसे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर फर्जी MBBS डिग्री - दस्तावेजों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने का आरोप है. एक आरोपी पर फर्जी MBBS डिग्री और मेडिकल काउंसिल का प्रमाणपत्र इस्तेमाल करने का आरोप है, तो दूसरा आरोपी आठवीं पास होने के बावजूद MBBS डिग्री और गायनेकोलॉजी के डिप्लोमा के दस्तावेज पेश कर चुका था. जालोर के रानीवाड़ा में भास्कर हॉस्पिटल चलाने वाले आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है. इन दो डॉक्टरों के अलावा फर्जी एमबीबीएस डिग्री धारक 7 और डॉक्टर एसओजी के राडार पर हैं. आखिर फर्जी डिग्रियों के सहारे मेडिकल रजिस्ट्रेशन का यह खेल कैसे चला?
फर्जी डिग्रियों का खेल
राजस्थान में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीयन कराने के मामले में SOG ने बड़ी कार्रवाई की है. SOG ने पंकज यादव और नानंजी राम चौधरी को गिरफ्तार किया है. मामला राजस्थान मेडिकल काउंसिल में फर्जी दस्तावेज पेश कर रजिस्ट्रेशन हासिल करने से जुड़ा है. इस मामले में 6 अक्टूबर 2024 को राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार की रिपोर्ट पर जयपुर के अशोक नगर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था. शुरुआती शिकायत में आठ लोगों के नाम सामने आए. जांच आगे बढ़ी तो नानंजी राम चौधरी के खिलाफ भी अतिरिक्त रिपोर्ट पेश की गई.
इन आठ लोगों के खिलाफ RMC ने मामला दर्ज कराया
शांतनु कुमार चारण
दीपक चौधरी
देवेंद्र नेहरा
गीता कुमारी
पंकज यादव
महेश कुमार गुर्जर
सरीमूल मजूमदार
रामकिशोर महावर
FMGE में फेल, फर्जी MBBS का सहारा!
पहला आरोपी है सीकर जिले का पंकज यादव. जांच के मुताबिक, उसने 2013 से 2018 के बीच कजाकिस्तान में MBBS की पढ़ाई की. इसके बाद विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए होने वाली FMGE परीक्षा करीब छह बार दी, लेकिन सफल नहीं हो सका. आरोप है कि परीक्षा में सफलता नहीं मिलने के बाद उसने बिहार के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज, मुजफ्फरपुर की फर्जी MBBS डिग्री और अंकतालिका तैयार की. साथ ही बिहार मेडिकल काउंसिल के पंजीयन का कथित फर्जी प्रमाणपत्र भी राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पेश किया. जांच के दौरान दस्तावेजों का संबंधित मेडिकल कॉलेज, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय और बिहार मेडिकल काउंसिल से सत्यापन कराया गया. विश्वविद्यालय से मिले जवाब के मुताबिक, डिग्री और अंकतालिका फर्जी पाई गईं. कॉलेज में भी आरोपी का पंजीयन नहीं मिला. इसके बाद SOG ने पंकज यादव को हरियाणा के कैथल से गिरफ्तार किया. पूछताछ में गिरफ्तारी से बचने के लिए वहां रहने की बात सामने आई.
आठवीं पास, लेकिन MBBS और गायनेकोलॉजी डिप्लोमा के दस्तावेज
अब बात दूसरे आरोपी नानंजी राम चौधरी की. जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, वह केवल आठवीं कक्षा तक पढ़ा है. इसके बावजूद उसके द्वारा दसवीं और बारहवीं की अंकतालिकाएं, MBBS डिग्री और गायनेकोलॉजी एवं ऑब्स्टेट्रिक्स के डिप्लोमा से जुड़े दस्तावेज पेश किए जाने की बात सामने आई है. SOG के मुताबिक, नानंजी राम चौधरी ने मुंबई के कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स से जुड़े DGO डिप्लोमा के दस्तावेजों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराया था. संबंधित संस्था से सत्यापन में डिप्लोमा प्रमाणपत्र, अलॉटमेंट लेटर, पासिंग सर्टिफिकेट और अटेम्प्ट सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए. SOG ने आरोपी को जालोर जिले के रानीवाड़ा से गिरफ्तार किया. वह वहां भास्कर हॉस्पिटल का मालिक है.
क्लीनिक के काउंटर से अस्पताल के मालिक तक का सफर
जांच में नानंजी राम चौधरी के बारे में एक और अहम जानकारी सामने आई है. बताया गया है कि वर्ष 2010 के आसपास उसने रानीवाड़ा में एक निजी चिकित्सक के क्लीनिक पर OPD काउंटर में पर्चियां काटने का काम किया. इसके बाद कुछ साल रेडीमेड कपड़ों की दुकान पर काम किया. वर्ष 2014 में वह रानीवाड़ा के राजदेव हॉस्पिटल में OPD काउंटर पर काम करने लगा. वर्ष 2015 में अस्पताल खरीदने और 2016 में उसका नाम बदलकर भास्कर हॉस्पिटल करने की जानकारी सामने आई है. शुरुआत में अस्पताल में जनरल मेडिसिन के चिकित्सक काम करते थे. वर्ष 2019 में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक को भी नियुक्त किया गया. जांच एजेंसी के अनुसार, अस्पताल में कार्यरत चिकित्सकों के पंजीयन संबंधी काम के सिलसिले में आरोपी का राजस्थान मेडिकल काउंसिल के कार्यालय आना-जाना होता था. इसी दौरान तत्कालीन पदाधिकारियों और कुछ कर्मचारियों से संपर्क स्थापित कर पंजीयन कराने की बात सामने आई है. हालांकि, इस पहलू पर विस्तृत जांच अभी जारी है.
अब मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन पदाधिकारी भी जांच के दायरे में
SOG की जांच अब केवल दो गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है. एजेंसी उन लोगों की पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी डिग्रियां और प्रमाणपत्र तैयार किए या उपलब्ध कराए. इसके अलावा राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों की संभावित भूमिका, आरोपियों को पंजीयन दिलाने में मदद करने वाले लोगों और मामले में नामजद शेष आरोपियों की भूमिका भी जांची जा रही है. जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन कराने वाले अन्य लोग भी इस नेटवर्क का हिस्सा हैं या नहीं.
SOG पूछताछ कर रही है
फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस अभिरक्षा में हैं और SOG उनसे पूछताछ कर रही है. जांच के अगले चरण में फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों और पंजीयन प्रक्रिया में कथित मददगारों की भूमिका अहम होगी. सबसे बड़ा सवाल यही है कि मेडिकल काउंसिल जैसी संस्था में सत्यापन की प्रक्रिया को कथित तौर पर चकमा देकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन कैसे हासिल किया गया. इसका जवाब अब SOG की आगे की जांच से सामने आएगा.