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Jaipur Crime News: जयपुर के गोपालपुरा बायपास से कोचिंग संस्थानों को हटाकर कोचिंग हब में स्थानांतरित करने के मामले में नया मोड़ आ गया है. कोचिंग संस्थानों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रहे सीनियर एडवोकेट और विकास समिति के पदाधिकारियों को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है. शिप्रापथ थाना पुलिस ने भवन मालिक रघुवीर सिंह डागुर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है.
सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है मामला
गोपालपुरा बायपास से कोचिंग संस्थानों को कोचिंग हब में स्थानांतरित करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है. 10बी कॉलोनी विकास समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र अग्रवाल और महासचिव गोपाल अग्रवाल इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हैं. वहीं कॉलोनी में रहने वाले सीनियर एडवोकेट और पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजदीपक रस्तौगी सुप्रीम कोर्ट में मामले की पैरवी कर रहे हैं. मामले में 15 सितंबर को अगली सुनवाई होनी है.
केस वापस लेने का दबाव देने का आरोप
बताया गया कि अगली सुनवाई से पहले कॉलोनी के महासचिव गोपाल अग्रवाल के मोबाइल पर कॉल आया. आरोप है कि कॉल करने वाले ने खुद को रघुवीर सिंह डागुर बताते हुए गाली-गलौज की और अगली तारीख पर केस वापस लेने को कहा. आरोप है कि कॉल करने वाले ने गोपाल अग्रवाल, वीरेंद्र अग्रवाल और सीनियर एडवोकेट को जान से मारने की धमकी दी. साथ ही परिवार के लोग लाश तक नहीं पहचान पाएंगे, ऐसी धमकी देने का भी आरोप है.
पुलिस में दर्ज कराई शिकायत
धमकी मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट की मेल पर शिकायत की गई. इसके बाद अगले दिन डीजीपी और अन्य अधिकारियों को ई-मेल के जरिए शिकायत दी गई. शनिवार को शिप्रापथ थाने पहुंचकर मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई.
कोचिंग संस्थानों को लेकर समिति की आपत्ति
गोपाल अग्रवाल का कहना है कि गोपालपुरा बायपास पर कोचिंग संस्थानों के कारण कॉलोनी के लोगों के साथ-साथ पढ़ने आने वाले छात्रों को भी परेशानी हो रही है. इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए कोचिंग संस्थानों को स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई गई है.
वहीं विकास समिति अध्यक्ष वीरेंद्र अग्रवाल के अनुसार, 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जेडीए ने कार्रवाई शुरू की और संबंधित भवनों को सील करने की प्रक्रिया शुरू की. उनके अनुसार, जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र पेश कर कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरी के अवैध रूप से संचालित होने की बात कही है. समिति का आरोप है कि इसी मामले को लेकर भवन मालिक की ओर से धमकी दी गई. समिति पदाधिकारियों ने कहा कि वे धमकियों से डरने वाले नहीं हैं और लोगों के पक्ष में आवाज उठाते रहेंगे.