राजस्थान में बारिश के बाद मौसमी बीमारियों के बीच स्क्रब टाइफस जानलेवा साबित हो रहा है. जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में बीते तीन महीनों में स्क्रब टाइफस के चलते 15 मरीजों की जान जा चुकी है. सितंबर के महीने 213 से ज्यादा नए केस सामने आए और 9 मरीजों की इलाज के दौरान मौत हो गई.जनस्वास्थ्य निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि प्रदेशभर में अब तक करीब 2100 केस दर्ज हुए हैं और सभी सीएमएचओ को बुखार के हर संदिग्ध मरीज की तत्काल जांच और प्रभावी उपचार के निर्देश दिए गए हैं.

सवाई मानसिंह अस्पताल में जनवरी से सितंबर तक स्क्रब टाइफस के कुल 360 से अधिक मरीज पहुंचे हैं,जिनमें से 224 मरीज अकेले सितंबर माह में भर्ती हुए. एसएमएस अस्पताल में जनवरी से जून तक जहां सिर्फ 16 केस आए थे,वहीं जुलाई में 17 मरीज़ आये. जिनमें से 2 की मौत हुई, अगस्त में 93 मरीज़ और 4 मौतें और सितंबर में एकाएक उछाल के साथ 213 केस व 9 मौतें दर्ज की गईं. डॉक्टरों का कहना है कि मौतों की मुख्य वजह इलाज में देरी है. मरीज शुरुआती बुखार को सामान्य मौसमी बुखार समझकर घर पर दवा लेते रहते हैं जिससे संक्रमण फेफड़ों, किडनी और लिवर तक फैल जाता है और मल्टी ऑर्गन फेल्योर की नौबत आ जाती है. विद्याधर नगर और वैशाली नगर से आए मामलों में भी देरी के चलते मरीजों को बाइलेटरल निमोनिया और यूरिन संबंधी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा.
पार्क में नंगे पैर ना घूमे
पब्लिक हेल्थ डायरेक्टर डॉ.रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि इस साल सितंबर-अक्टूबर तक साढ़े तीन हजार से ज्यादा मामले आए थे, जिसकी तुलना में इस बार अब तक करीब 2100 केस रिपोर्ट हुए हैं. हालांकि, शहरी इलाकों में संक्रमण बढ़ने की बड़ी वजह लोगों का पार्कों और बगीचों में नंगे पैर घूमना है.

स्क्रब टाइफस क्यों है जानलेवा ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक,ये बीमारी संक्रमित चिगर माइट यानी कीट के लार्वा के काटने से होती है. काटने वाली जगह पर सिगरेट से जले जैसा एक काला निशान बन जाता है,जिसे 'एस्कार' कहा जाता है. स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि पार्कों या झाड़ियों वाले इलाके में नंगे पैर ना जाएं,पूरे आस्तीन के कपड़े और जूते पहनें और हल्का बुखार होने पर भी खुद डॉक्टर बनने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचकर जांच करवाएं. डेंगू और मलेरिया के बीच स्क्रब टाइफस का ये तेजी से फैलता जाल बेहद खतरनाक मोड़ ले चुका है. अगर वक्त रहते जागरूकता और सावधानी नहीं बरती गई तो आप मुसीबत में पड़ सकते हैं.
क्या स्क्रब फाइसट वाला कीट शरीर में घुस जाता है ?
नहीं, ये बीमारी किसी कीड़े के काटने से नहीं बल्कि उसके लारवा जिसे चिगर माइट कहते हैं, के काटने से फैलती है. ये इतने छोटे होते हैं कि इन्हे आखों से देखा भी नहीं जा सकता है. जब कोई इंसान घास या पार्क में जाता है तो ये लार्वा कपड़ों या नंगे पैरों के जरिए त्वचा पर आ जाते है और शरीर के नरम हिस्से पर चिपक जाते हैं. जैसे पैर, कमर या बगल में.और फिर काटते वक्त ये कीट अपनी लार के जरिए ओरिएंटिया सुट्सुगामुशी नाम का बैक्टीरिया इंसान के शरीर पर छोड़ देता है.

चिगर माइट के काटने पर कैसा निशान बनता है ?
जहां ये कीट काटता है वहां पर पहले छोटा लाल फफोला बनता है, जो बाद में सूखकर सिगरेट से जले हुए या काले रंग के गहरे पपड़ीदार निशान की तरह दिखता है. जैसे किसी ने सिगरेट से जला दिया हो. ये ही इस बीमारी का सबसे बड़ा लक्षण माना जाता है.