जयपुर में रिटायर्ड टीचर से 61 लाख की ठगी: 7 दिन तक रखा डिजिटल अरेस्ट, साइबर पुलिस खंगाल रही मनी ट्रेल
राजस्थान में साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने जयपुर निवासी किशोर कुमार को गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर बांसवाड़ा के रिटायर्ड टीचर विद्याशंकर व्यास को 7 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा और मनी लॉन्ड्रिंग व गिरफ्तारी का डर दिखाकर 61 लाख रुपये से अधिक की ठगी की.
राजस्थान के जयपुर में मनी लॉन्ड्रिंग और गंभीर आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी देकर रिटायर्ड टीचर से 61 लाख की ठगी के एक आरोपी को साइबर क्राइम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. आरोपियों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का पुलिस इंस्पेक्टर बताकर पीड़ित को सात दिन डिजीटल अरेस्ट रखा और गिरफ्तारी का डर दिखाकर 61 लाख रुपए से ज्यादा की रकम ट्रांसफर करवा ली. मामले में राजस्थान पुलिस के सेंट्रल साइबर पुलिस स्टेशन ने जयपुर के एक आरोपी किशोर कुमार को गिरफ्तार किया है. अब पुलिस ठगी की रकम की मनी ट्रेल खंगालने के साथ पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है.
वीडियो कॉल पर वर्दीधारी फर्जी पुलिस अधिकारी, गिरफ्तारी का डर और लाखों रुपये की ठगी... साइबर अपराधियों ने बांसवाड़ा निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक विद्याशंकर व्यास को अपना निशाना बनाया. 29 जुलाई 2025 को उनके पास व्हाट्सऐप वीडियो कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का पुलिस इंस्पेक्टर बताया. आरोपी पुलिस की वर्दी में था, जिससे पीड़ित को उसकी बातों पर भरोसा हो गया. इसके बाद ठग ने पीड़ित को इस्लामिक संगठन से संबंध, मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक खातों से जुड़े गंभीर अपराधों में फंसाने की धमकी दी. गिरफ्तारी वारंट जारी होने का भय दिखाकर उन्हें मानसिक दबाव में ले लिया.
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डर ऐसा बनाया कि खातों में रकम ट्रांसफर करते चले गए पीड़ित
आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचाने और पुलिस कार्रवाई रुकवाने का झांसा दिया. इसी बहाने अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए रकम जमा करवाई गई. 30 जुलाई से 5 अगस्त 2025 के बीच पीड़ित से 61 लाख रुपए से अधिक की ठगी की गई. इसके अलावा पेटीएम के जरिए दो ट्रांजेक्शन में एक लाख रुपए भी ट्रांसफर करवाए गए. ठग यहीं नहीं रुके, लगातार वीडियो कॉल कर पीड़ित को धमकाते रहे और 30 लाख रुपए की अतिरिक्त मांग भी की गई.
बैंक ट्रांजेक्शन की पड़ताल से आरोपी तक पहुंची पुलिस
पीड़ित ने 8 अगस्त 2025 को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन बांसवाड़ा में शिकायत दर्ज करवाई. मामले की जांच के दौरान कॉल डिटेल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट, बैंक स्टेटमेंट, केवाईसी दस्तावेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया. जांच में सामने आया कि ठगी की रकम का कुछ हिस्सा 30 जुलाई 2025 को कोटक महिंद्रा बैंक के एक खाते में यूपीआई ट्रांजेक्शन के जरिए पहुंचा था. बैंक रिकॉर्ड से इस खाते के धारक की पहचान जयपुर निवासी किशोर कुमार के रूप में हुई. इसके बाद पुलिस ने किशोर कुमार को दस्तयाब कर पूछताछ की और गिरफ्तार कर लिया.
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आरोपी के खाते में रकम आई फिर हुआ सेल्फ विड्रॉल
पुलिस के मुताबिक, आरोपी किशोर कुमार की भूमिका ठगी की रकम प्राप्त करने वाले बैंक खाते के खाताधारक के रूप में सामने आई है. बैंक रिकॉर्ड के अनुसार, पीड़ित से ठगी गई रकम में से कुछ राशि उसके खाते में पहुंची और इसके बाद खाते से सेल्फ विड्रॉल किया गया. हालांकि, ठगी की पूरी रकम का लेनदेन और आरोपी की भूमिका से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच अभी जारी है. पुलिस अब व्हाट्सऐप रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सीएएफ, आईपीडीआर और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की मनी ट्रेल का विश्लेषण कर रही है. जांच का मकसद यह पता लगाना है कि ठगी की रकम आगे किन खातों में पहुंची और इस साइबर नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं.
साइबर ठगी से बचाव
किसी भी व्यक्ति को फोन या वीडियो कॉल पर पुलिस अधिकारी बताकर डराना, गिरफ्तारी की धमकी देना और मामले को खत्म करने के नाम पर पैसे मांगना साइबर ठगी का संकेत हो सकता है. याद रखें किसी भी धमकी के दबाव में आकर रकम ट्रांसफर न करें. संदिग्ध कॉल की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें और साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाएं.
फिलहाल जयपुर से गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ और पैसों के लेन-देन की जांच जारी है. पुलिस का फोकस अब ठगी की रकम के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान करने पर है. यह मामला एक बार फिर चेतावनी देता है कि वर्दी, वीडियो कॉल और गिरफ्तारी की धमकी देखकर घबराने के बजाय सतर्क रहना जरूरी है.