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क्या ये भारत में ऐसा पहला सिस्टम है ?
भारत में ये पहला सिस्टम नहीं है.राजस्थान के रणथंभौर में लगाये जाने वाला ये सिस्टम केरल मॉडल पर आधारित है. हालांकि केरल के अलावा असम, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत में हाथियों को रेलवे ट्रैख और गांव से दूर रखने के लिए भी AI आधारित सेंसर काम करते हैं. अब राजस्थान में इसका पहली बार इस्तेमाल किया जाएगा.
क्या दुनिया में ऐसा सिस्टम पहले से है ?
दुनिया के कई देशों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम ,मोशन सेंसर के साथ साथ साइलेंट मॉनिटरिंग तकनीक का इस्तेमाल होता आ रहा है. जैसे- उत्तरी अमेरिका और जापान में भालू और भेड़ियों की आबादी को ट्रैक करने और उन्हें रिहायशी इलाकों में घुसने से रोकने के लिए ऑटोमैटिक सेंसर अलार्म के साथ ही थर्मल इमेजिंग का इस्तेमाल किया जाता है.
ये सिस्टम काम कैसे करता है ?
सिस्टम के तहत जंगल से गांव की तरफ आने वाले रास्तों (पगडंडियों) पर 'हाई ट्रैक सेंसर'और 'साइलेंट डिवाइस' लगाये जाते हैं. जब भी कोई लेपर्ड (तेंदुआ), बाघ या अन्य जानवर उस रास्ते से गुजरेगा,तो सेंसर बिना किसी फ्लैश के उसकी गति रिकॉर्ड कर सकते है. इसके बाद आबादी वाले क्षेत्र में एक बहुत तेज ऑटोमैटिक अलार्म बजेगा,जिससे ग्रामीण सतर्क हो जाएंगे और तेज आवाज के कारण तेंदुआ भी वापस जंगल की ओर लौट जाएगा.

रणथंभौर के लिए क्यों है जरूरी ?
रणथंभौर में लेपर्ड की मॉनिटरिंग के लिए इस साइलेंट डिवाइस और हाई ट्रैक सेंसर बहुत काम का होगा. अलार्म इतना तेज होगा कि सैकड़ों मीटर दूर तक इसकी आवाज सुनाई देगी, जिससे ग्रामीणों को संभलने का मौका मिलेगा और आवाज के चलते संभवता वन्यजीव भी भाग जाएगा. आपको बता दें कि रणथंभौर टाइगर रिजर्व में तकरीब 170 से ज्यादा लेपर्ड है. आये दिन लेपर्ड रणथंभौर की परिधि से निकलकर आबादी में आ जाते हैं. ऐसे में लेपर्ड ओर इंसानों के बीच लगातार संघर्ष बढ़ रहा है. जिसे रोकने के लिए रणथंभौर वन प्रशासन द्वारा ये पहल की जा रही है. रणथंभौर टाइगर रिजर्व के डीएफओ मानस सिंह ने बताया की वन विभाग केरलम तर्ज पर इस अत्याधुनिक तकनीक को रणथंभौर में अपनाने जा रहा है. उन्होंने बताया कि केरला में हाथियों की निगरानी करने और ग्रामीणों को वक्त रहते सतर्क करने के लिए इस साइलेंट डिवाइस और हाई ट्रैक सेंसर का सफल प्रयोग किया जा रहा है,जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामलों में भारी कमी दर्ज की गई है. अब ये ट्रायल रणथंभौर टाइगर रिजर्व में किया जा रहा है.

सवाईमाधोपुर के किन इलाकों में लगेगा सेंसर ?
डीएफओ मानस सिंह के मुताबिक वन विभाग सवाई माधोपुर के पुराने शहर के आसपास के क्षेत्रों के साथ ही फलोदी रेंज के दूमोंदा,हिंदवाड़ और टोडरा को चिह्नित कर चुका है. जहाँ इस साइलेंट डिवाइस और हाई ट्रैक सेंसर को लगाया जाएगा.ताकि अनहोनी को वक्त रहते रोका जा सके. डीएफओ ने बताया कि अगर रणथंभौर में साइलेंट डिवाइस और हाई ट्रैक सेंसर सफल रहा है तो आने वाले वक्त में रणथंभौर के सभी पैराफेरी वाले इलाकों और आबादी से सटे इलाको में इसे लगाया जायेगा.