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Explainer: समंदर से 600 किमी दूर होकर भी 'पोर्ट स्टेट' कैसे बनेगा राजस्थान? जानें इस 567 KM लंबे फ्रेट कॉरिडोर का असली गेमप्लान

राजस्थान से गुजरने वाले 567 किमी लंबे वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से राज्य के उद्योग और व्यापार को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है. इससे माल परिवहन तेज और सस्ता होगा, लॉजिस्टिक्स लागत व समय में कमी आएगी और जयपुर, अजमेर, पाली-जोधपुर समेत मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, सिरेमिक और मार्बल उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी.

Explainer: समंदर से 600 किमी दूर होकर भी 'पोर्ट स्टेट' कैसे बनेगा राजस्थान? जानें इस 567 KM लंबे फ्रेट कॉरिडोर का असली गेमप्लान
Image Credit: 567 किमी लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर

Jaipur News: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 दिन पहले देश को डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की सौगात दी है. इस कॉरिडोर से राजस्थान के माल परिवहन को लेकर भी व्यवसायियों के लिए बड़ी राहत मिल सकेगी. देश में सबसे अधिक 567 किलोमीटर मार्ग राजस्थान राज्य से होकर गुजर रहा है. जानिए किस तरह राजस्थान को मिलेगा कॉरिडोर का फायदा.  

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने माल परिवहन की दिशा में हाई स्पीड फ्रेट रेल नेटवर्क यानी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को देश को समर्पित कर दिया है. इसका बड़े स्तर पर राजस्थान के व्यवसायियों को भी फायदा मिलेगा. दरअसल डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भारतीय रेलवे का महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य मालगाड़ियों के लिए तेज, सुरक्षित और उच्च क्षमता वाला डेडिकेटेड रेल नेटवर्क उपलब्ध कराना है.

क्या है डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर? 
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridor-DFC) रेलवे का ऐसा खास रेल मार्ग है, जिसे मुख्य रूप से मालगाड़ियों के तेज और बड़े पैमाने पर परिवहन के लिए बनाया गया है.  आमतौर पर एक ही रेलवे ट्रैक पर यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियां दोनों चलती हैं. इससे मालगाड़ियों को कई बार यात्री ट्रेनों को रास्ता देने के लिए रोकना पड़ता है. DFC में मालगाड़ियों के लिए अलग ट्रैक बनाया गया है, जिससे वे ज्यादा तेजी और कम रुकावट के साथ चल सकती हैं.

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरता है, जिससे प्रदेश के उद्योग, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन को फायदा मिलने की उम्मीद है. खासकर राजस्थान से निकलने वाले खनिज, सीमेंट, कृषि उत्पाद और औद्योगिक सामान को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाना इससे आसान हो जाएगा. राजस्थान से गुजरने वाला Western Dedicated Freight Corridor अब पूरी तरह तैयार और चालू हो चुका है. इसका निर्माण और संचालन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) द्वारा किया जाता है. 

कारोबारियों की लागत कैसे कम होगी?
इससे माल परिवहन की गति और दक्षता बढ़ने के साथ ही यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हो रही है, जिससे यात्री ट्रेनों की पंक्चुअलिटी में वृद्धि हुई है. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से लंबी दूरी के माल परिवहन को जल्दी पूरा करने में मदद मिल रही है, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत और ट्रांसपोर्टेशन का समय बच रहा है. साथ ही ग्राहकों को सामान की समयबद्ध डिलीवरी मिल पा रही है.

567 किलोमीटर का कॉरिडोर राजस्थान के लिए क्यों खास है?
देश के विभिन्न स्थानों पर विकसित किए गए गति शक्ति कार्गो टर्मिनल, लॉजिस्टिक पार्क और मल्टीमॉडल परिवहन सुविधाओं के विकास से उद्योग और व्यापार जगत को नई गति मिल रही है. स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न हो रहे हैं. राजस्थान से होकर गुजरने वाले रेवाड़ी से पालनपुर मार्ग पर लगभग 567 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए विशेष महत्व रखता है.

राजस्थान के किन उद्योगों को मिलेगा फायदा?
यह देश में किसी भी राज्य से होकर गुजरने वाला फ्रेट कॉरिडोर का सबसे लंबा खंड है. इससे जयपुर, अजमेर, पाली और जोधपुर के साथ राज्य के मेन्युफेक्चरिंग सेक्टर, कपड़ा, सिरेमिक, मार्बल और अन्य औद्योगिक समूहों को माल परिवहन में सुविधा मिल पा रही है.

मालगाड़ियों के लिए अलग ट्रैक होने से क्या बदलेगा?
देश में 1,506 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के न्यू दादरी से महाराष्ट्र के न्यू जेएनपीटी तक विस्तारित हो चुका है. इससे देश के विभिन्न स्थानों सहित समुद्री बंदरगाहों तक औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और मजबूत हुई है. 
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का उद्देश्य मालगाड़ियों के संचालन को यात्री ट्रेनों के लिए अधिक व्यस्त मौजूदा रेल मार्गों से अलग करना है.

इससे माल परिवहन के लिए सुगम रेल मार्ग उपलब्ध हुआ है. साथ ही मौजूदा भारतीय रेल नेटवर्क पर यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होने से कोचिंग ट्रेनों की समयपालनता में भी सुधार हुआ है. राजस्थान के लिए यह नेटवर्क उद्योग, व्यापार, निर्यात, रोजगार और निवेश को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा साबित हो रहा है. 

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से राजस्थान के आम लोगों को क्या होगा फायदा ? 
राजस्थान के लोगों को डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से लंबे समय के फायदे मिल सकते हैं. माल ढुलाई तेज और परिवहन लागत कम हो सकती है, जिसका फायदा सीमेंट, अनाज, खाद, स्टील और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर धीरे-धीरे पड़ सकता है. इसके साथ ही कॉरिडोर के आसपास वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग और इंडस्ट्री के बनने से वहां के लोगों को रोजगार मिलेगा. वहीं, DFC के आसपास लॉजिस्टिक्स हब और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने से संबंधित शहरों और कस्बों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी, जिससे वहां विकास होगा.

DFC से आम आदमी को सीधे ट्रेन का नया रूट नहीं मिलेगा, लेकिन सस्ता और तेज माल परिवहन, रोजगार, कारोबार और औद्योगिक विकास का असर आम लोगों की जेब और रोजगार के अवसरों पर पड़ सकता है. 

भारत में दो प्रमुख डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जो चालू हैं
पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पंजाब के लुधियाना से शुरू होकर बिहार के सोनगर (और झारखंड/पश्चिम बंगाल तक) लगभग 1,337 किमी लंबा है, जो मुख्य रूप से कोयला और भारी खनिजों इस्तेमाल किया जाता है. दूसरा पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के दादरी से शुरू होकर मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) तक लगभग 1,506 किमी लंबा है, जो औद्योगिक और कंटेनर माल ढुलाई के लिए इस्तेमाल होता है. 

Report- Kashiram Choudhary
 

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About the Author

Sneha Aggarwal

Sneha Aggarwal

मैं स्नेहा अग्रवाल जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज़ पर पकड़ रखती हूं. क्राइम और कल्चर की खबरों में दिलचस्पी है. मुझे डिजिटल मीडिया का करीब 4 साल का साल का अनुभव है. इससे पहले मैं ZeeBihar में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं. 4 साल के जर्नलिज्म करियर में लोकल, क्राइम, हेल्थ, एंटरटेनमेंट, वायरल और लाइफस्टाइल बीट पर काम किया है. मैंने यहां पर राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, ऑपेरशन सिंदूर समेत कई बड़े ईवेंट्स कवर किए हैं.
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