Rajasthan Transport Rules: अब RTO में नहीं चलेगा खेल! रजिस्ट्रेशन से पहले बनाया जाएगा 10 मिनट का वीडियो
राजस्थान में बस, ट्रक और पिकअप जैसे चैसिस पर तैयार होने वाले वाहनों के पंजीयन नियम अब सख्त होंगे. परिवहन विभाग ने पंजीयन के समय वाहन की कम से कम 10 मिनट की वीडियोग्राफी और चारों तरफ के फोटो लेना अनिवार्य किया है. वीडियो में चैसिस, इंजन नंबर, वाहन की पूरी बॉडी और सुरक्षा मानकों की जांच रिकॉर्ड होगी. रिकॉर्ड को हार्ड ड्राइव में सुरक्षित रखना होगा और लापरवाही पर संबंधित परिवहन निरीक्षक व DTO की जिम्मेदारी तय की जाएगी.
Rajasthan News: वाहन पंजीयन के बाद वाहन में बदलाव कर सिटिंग स्पेस बढ़ाने वाले बस संचालकों या फिर ट्रकों में लोडिंग स्पेस बढ़ाने के लिए अल्टरेशन करने वाले ट्रक मालिकों को लेकर अब नियम कड़े होने जा रहे हैं. परिवहन विभाग अब वाहन के पंजीयन के समय की वीडियोग्राफी अनिवार्य करने जा रहा है. इस नई प्रक्रिया से RTO कार्यालयों में गड़बड़झाला अब नहीं चलेगा. अब तक कई बार किसी वाहन को बिना ऑफिस बुलाए केवल कागज देखकर पंजीयन कर दिया जाता था लेकिन अब चैसिस पर बनने वाले बस, ट्रक या पिकअप जैसे वाहनों की पंजीयन के समय वीडियोग्राफी कराई जाएगी. आरटीओ के निरीक्षक वाहन के चैसिस नंबर, इंजन नंबर समेत वाहन की पूरी फिजिकल अपीयरेंस को वैरीफाई करेंगे.
परिवहन विभाग ने राजस्थान में चैसिस पर बनने वाले वाहनों के लिए एक नया नियम लागू कर दिया है. अब चैसिस पर बनने वाले वाहनों के पंजीयन के समय उसकी पूरी वीडियोग्राफी की जाएगी. साथ ही फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी का रिकॉर्ड लंबे समय तक सुरक्षित भी रखना होगा. दरअसल अभी फील्ड में जब परिवहन विभाग के उड़नदस्ते ऐसे बसों, ट्रकों या अन्य कमर्शियल वाहनों पर कार्रवाई करते हैं तो वाहन मालिक का सीधा सा तर्क होता है कि आपने ही इसे अप्रूव किया है.
अब पंजीयन की वास्तविक स्थिति का रहेगा रिकॉर्ड
वाहन पंजीयन के समय वाहन की वास्तविक स्थिति क्या थी, इसे वेरीफाई करने का कोई तरीका परिवहन निरीक्षक के पास नहीं होता. ऐसे में वाहन पर कार्रवाई करने में बाधा सामने आती है. इससे कई प्रकरण न्यायालयों में लम्बित होते हैं, साथ ही विभागीय जांच और शिकायत निस्तारण के मामले बढ़ जाते हैं. इसे देखते हुए अब परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा ने सभी आरटीओ-डीटीओ को नए नियमों के तहत पंजीयन प्रक्रिया करने के निर्देश दिए हैं.
क्या हैं परिवहन विभाग के नए नियम ?
निरीक्षण प्राधिकारी सभी नियमों-मानकों से वाहनों का भौतिक परीक्षण करेंगे.
प्रत्येक वाहन की न्यूनतम 10 मिनट की वीडियो रिकॉर्डिंग करना अनिवार्य होगा.
रिकॉर्डिंग में वाहन के फ्रंट, रियर, लेफ्ट और राइट साइड व्यू दिखाने होंगे.
वाहन के चैसिस नम्बर, इंजन, मोटर नम्बर दर्शाने होंगे.
सम्पूर्ण बॉडी निर्माण और उसकी गुणवत्ता को भी रिकॉर्ड करना होगा.
टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट, फॉर्म 22ए, AIS मानकों के अनुरूप निरीक्षण जरूरी.
वाहन पर लागू प्रमुख सुरक्षा अवयव, निरीक्षण बिन्दुओं की रिकॉर्डिंग करनी होगी.
पंजीयन फाइल में वाहन का निरीक्षण करते चारों तरफ के 4 रंगीन फोटोग्राफ रखने होंगे.
परिवहन निरीक्षक व वाहन के फोटो स्कैन कर वाहन पोर्टल पर भी अपलोड किए जाएंगे.
संबंधित DTO ये तस्दीक करेंगे कि पंजीयन के समय वाहन के फोटो अपलोडेड हों.
प्रत्येक दिन, महीने का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य
प्रत्येक वाहन की वीडियो रिकॉर्डिंग को परिवहन विभाग के कार्यालयों में लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाएगा. इसके लिए प्रत्येक कार्यालय को एक हार्ड ड्राइव खरीदकर सुरक्षित रखनी होंगी. प्रत्येक दिन के वाहनों की वीडियो रिकॉर्डिंग इस हार्ड ड्राइव में सुरक्षित रखी जाएगी. इसका प्रत्येक दिन, महीने और साल का रिकॉर्ड फोल्डर वाइज सुरक्षित रखना होगा.
कैसे होगी वीडियो-फोटोज की सुरक्षा?
प्रत्येक RTO-DTO कार्यालय 1 TB क्षमता की हार्ड डिस्क की खरीद करेगा.
इसमें सभी चैसिस निर्मित वाहनों के पंजीयन के समय वीडियो रिकॉर्ड रखे जाएंगे.
आईटी शाखा के कार्मिकों को इस हार्ड ड्राइव का कस्टोडियन बनाया जाएगा.
कार्मिक के ट्रांसफर की स्थिति में हार्ड ड्राइव का भी हैंडओवर-टेकओवर होगा.
रिकॉर्डिंग के व्यवस्था नियमित रूप से जारी रहे, यह DTO की जिम्मेदारी होगी.
हार्ड डिस्क को कार्यालय से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं होगी.
फिटनेस सेंटरों पर सख्ती की तरह मास्टर स्ट्रोक
परिवहन मुख्यालय ने साफ कहा है कि यदि किसी वाहन के निरीक्षण के समय वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी नहीं की जाती है अथवा इसका डेटा सुरक्षित नहीं रखा जाता है तो इसकी जिम्मेदारी व्यक्तिगत रूप से संबंधित निरीक्षण अधिकारी यानी परिवहन निरीक्षक और पंजीयन अधिकारी यानी डीटीओ की होगी. ऐसी स्थिति में सम्बंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. इसे फिटनेस सेंटरों पर की गई सख्ती की तरह ही परिवहन मुख्यालय का एक और मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है. फिटनेस सेंटरों की गड़बड़ियों पर रोक के लिए भी इसी तरह 16 फरवरी 2026 से वीडियोग्राफी को अनिवार्य किया गया था.