App

रजिस्ट्री की फाइल संभालने का झंझट खत्म: अब फोन में मिलेगी जमीन-जायदाद की डिजिटल कॉपी, ऐसे होगी वेरिफाई

Rajasthan News: जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री अब अलमारी की फाइल में ही नहीं, आपके मोबाइल की डिजिटल तिजोरी में भी रहेगी. राजस्थान में अगले सप्ताह से रजिस्ट्री की डिजिटल कॉपी सीधे डिजीलॉकर में मिलने की तैयारी है. यानी दस्तावेज खोने-फटने की टेंशन कम होगी और जरूरत पड़ते ही मोबाइल पर रजिस्ट्री सामने होगी.

रजिस्ट्री की फाइल संभालने का झंझट खत्म: अब फोन में मिलेगी जमीन-जायदाद की डिजिटल कॉपी, ऐसे होगी वेरिफाई
Image Credit: Rajasthan Property Documents In Digilocker

Rajasthan Property Record On Digilocker: जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री की हार्ड कॉपी खो गई, फट गई या वर्षों बाद जरूरत पड़ने पर मिल नहीं रही, अब ऐसी परेशानी काफी हद तक खत्म हो सकेगी. प्रदेश में रजिस्ट्री कराने वाले लोगों को इसकी डिजिटल कॉपी डिजीलॉकर में भी उपलब्ध कराने की तैयारी है. पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग यह सुविधा प्रदेशभर में शुरू करने जा रहा है. विभाग के अनुसार राजस्थान ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य होगा, जहां रजिस्ट्री की डिजिटल जानकारी सीधे डिजीलॉकर में उपलब्ध कराई जाएगी. अजमेर के पंजीयन कार्यालय प्रथम और द्वितीय में इसका पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया. इसके बाद अब इसे प्रदेश के सभी पंजीयन कार्यालयों तक ले जाने की तैयारी है. रजिस्ट्री का पंजीयन होने के बाद संबंधित व्यक्ति आधार आधारित OTP के जरिए डिजीलॉकर में लॉगिन कर सकेगा. यहां पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग का विकल्प चुनकर रजिस्ट्री नंबर दर्ज करना होगा. इसके बाद संबंधित रजिस्ट्री की PDF कॉपी डिजीलॉकर में उपलब्ध हो जाएगी. यानी संपत्ति खरीदार को जरूरत के वक्त रजिस्ट्री देखने के लिए घर में रखी फाइल तलाशने की जरूरत नहीं पड़ेगी. मोबाइल से कहीं भी डिजिटल रिकॉर्ड देखा जा सकेगा. हालांकि फिलहाल रजिस्ट्री के समय मिलने वाली हार्ड कॉपी बंद नहीं होगी, वह पहले की तरह दी जाती रहेगी.

जानिए डिजीलॉकर के बाद कुछ सवालों के जबाव

सवाल-क्या रजिस्ट्री की हार्ड कॉपी बंद हो जाएगी?
जवाब-नहीं, रजिस्ट्री के बाद हार्ड कॉपी पहले की तरह मिलेगी.

सवाल-डिजिटल कॉपी कहां मिलेगी?
जवाब-डिजीलॉकर में पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के विकल्प के जरिए.

सवाल-क्या करना होगा?
जवाब-आधार आधारित OTP से लॉगिन कर रजिस्ट्री नंबर दर्ज करना होगा.

सवाल-फायदा क्या होगा?
जवाब-मूल दस्तावेज खोने या खराब होने पर डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और मोबाइल से कहीं भी देखा जा सकेगा.

सवाल-QR कोड का फायदा?
जवाब-दस्तावेज और उससे जुड़ी जानकारी के डिजिटल सत्यापन में मदद मिलेगी.

क्यूआर कोड से पता चलेगा कागज असली या नकली
मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग रजिस्ट्री दस्तावेजों पर क्यूआर कोड उपलब्ध कराने की भी तैयारी कर रहा है. क्यूआर कोड स्कैन करने पर रजिस्ट्री के साथ क्रेता-विक्रेता और गवाहों से जुड़ी जानकारी का डिजिटल सत्यापन किया जा सकेगा. इससे किसी दस्तावेज की वास्तविकता जांचना आसान होगा. विभाग को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से फर्जी दस्तावेज और रजिस्ट्री में छेड़छाड़ रोकने में भी मदद मिलेगी. प्रदेश में पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के 116 पूर्णकालिक सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों के साथ तहसील स्तर पर हर साल करीब 26 लाख दस्तावेजों का पंजीयन होता है. इनमें सेल डीड, रिलीज डीड, गिफ्ट डीड, एग्रीमेंट, एडॉप्शन डीड, रेंट डीड और मॉर्गेज डीड सहित अन्य दस्तावेज शामिल हैं. विभाग को चालू वित्तीय वर्ष में 18,500 करोड़ रुपए के राजस्व संग्रह का लक्ष्य मिला है. मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग के आईजी शरद मेहरा का कहना है की विभाग चरणबद्ध तरीके से पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया को पेपरलेस बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है. मॉर्गेज डीड और रेंट डीड की प्रक्रिया पहले ही ऑनलाइन की जा चुकी है. पावर ऑफ अटॉर्नी, इकरारनामा और सेल एग्रीमेंट की रजिस्ट्री भी अनिवार्य की जा चुकी है. डिजीलॉकर और क्यूआर कोड इसी डिजिटल बदलाव का अगला चरण होंगे.

बहरहाल, यानी अब रजिस्ट्री संभालने का झंझट कम होगा. कागज खोया या फटा, तो रिकॉर्ड डिजीलॉकर में सुरक्षित मिलेगा. जरूरत पड़ी, तो मोबाइल पर तुरंत देख सकेंगे. QR कोड से असली-नकली की जांच भी आसान होगी. यानी आम आदमी के लिए रजिस्ट्री अब ज्यादा सुरक्षित, आसान और हर वक्त उसकी पहुंच में होगी. 

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author