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Rajasthan Politics: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा और केंद्र सरकार पर विभिन्न मुद्दों को लेकर निशाना साधा. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के 'सख्ती से निपटेंगे' बयान, युवा पीढ़ी के आंदोलन, केंद्र सरकार के चुनावी वादों और भाजपा नेता संबित पात्रा के बयानों को लेकर गहलोत ने सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध करने वालों को धमकी देने के बजाय राजनीतिक मुद्दों पर जवाब दिया जाना चाहिए.
नितिन नवीन के बयान पर उठाए सवाल
अशोक गहलोत ने नितिन नवीन के 'सख्ती से निपटेंगे' बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को धमकाने की भाषा उचित नहीं है. उन्होंने सवाल किया कि भाजपा अध्यक्ष किसके इशारे पर ऐसी चेतावनी दे रहे हैं. गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार के संकेत के बिना भाजपा अध्यक्ष इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकते. गहलोत ने विपक्ष पर विदेशी ताकतों के प्रभाव और अराजकता फैलाने के आरोपों को भी गलत बताया. गहलोत ने कहा कि राजनीतिक विरोध का जवाब धमकी से नहीं, बल्कि तथ्यों और तर्कों के आधार पर दिया जाना चाहिए.
युवा आंदोलन और ट्रेन-मेट्रो सेवाओं पर सरकार को घेरा
युवा पीढ़ी के आंदोलन का जिक्र करते हुए गहलोत ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि आंदोलन से घबराकर ट्रेनें रद्द करने और करीब 57 मेट्रो सेवाएं बंद करने की नौबत क्यों आई. उन्होंने पूछा कि ट्रेनें और मेट्रो सेवाएं कब तक बंद रखी जाएंगी और इससे परेशान हो रहे यात्रियों को सरकार क्या जवाब देगी.
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं के संघर्ष को कुचलने के बजाय उनसे जुड़े मुद्दों पर संवाद करना चाहिए. उनके मुताबिक, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में ऐसी स्थिति पैदा होना दुर्भाग्यपूर्ण है.
दो करोड़ नौकरियों और किसानों की आय पर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार के पुराने चुनावी वादों को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि हर साल दो करोड़ नौकरियां देने के वादे का क्या हुआ. किसानों की आय दोगुनी करने के वादे पर भी उन्होंने केंद्र सरकार से जवाब मांगा. गहलोत ने अन्ना हजारे के आंदोलन और लोकपाल के मुद्दे का जिक्र करते हुए मोदी सरकार को घेरा. इसके साथ ही उन्होंने 2G स्पेक्ट्रम और कोयला आवंटन विवाद का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार पर लगाए गए. आरोपों का आगे क्या परिणाम निकला. उन्होंने कहा कि सरकार को चुनावी वादों और पुराने आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.
संबित पात्रा पर भी साधा निशाना
भाजपा नेता संबित पात्रा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद मीडिया के सामने अपनी बात रखी थी. गहलोत के मुताबिक, राहुल गांधी ने बताया था कि राष्ट्रपति ने इस मामले में साक्ष्य की बात कही और राहुल गांधी ने सबूत व दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात कही थी. अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि संबित पात्रा अप्रासंगिक बातें करते हैं और जनता उनकी बातों पर भरोसा नहीं करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि बहस के दौरान भाजपा नेताओं का रवैया नकारात्मक रहता है.
सरकार से जवाबदेही की मांग
अशोक गहलोत ने अपने बयानों के जरिए केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व से कई मुद्दों पर जवाब मांगा. इनमें विपक्ष के प्रति इस्तेमाल की जाने वाली भाषा, युवा आंदोलन के दौरान परिवहन सेवाओं पर असर, रोजगार और किसानों से जुड़े चुनावी वादे तथा पुराने राजनीतिक आरोप शामिल हैं. गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मुकाबला होना चाहिए, लेकिन असहमति और आंदोलनों को दबाने के प्रयास नहीं होने चाहिए.
अशोक गहलोत पर मदन राठौड़ का पलटवार
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के बयान पर गहलोत की प्रतिक्रिया को गैर जरूरी बताया. राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद से जुड़े कथित मामले को लेकर भी सवाल उठाए. मदन राठौड़ बोले कि गहलोत की समाज में बनी छवि धूमिल हो रही है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सलाह पर अशोक गहलोत की प्रतिक्रिया को अनुचित बताया.
मदन राठौड़ बोले कि निर्वाचन आयोग से मिलने के लिए कांग्रेस को उचित प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी. निर्वाचन आयोग के सामने 300-400 लोगों को ले जाने का कोई प्रावधान नहीं, निर्धारित संख्या में प्रतिनिधिमंडल जाकर अपनी बात रखे. कांग्रेस कभी 240 तो कभी 400 लोगों को ले जाने की बात करती है, आयोग के सामने शक्ति प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं है. मदन राठौड़ का आरोप है कि कांग्रेस को वास्तव में कोई शिकायत नहीं करनी, केवल जनता और मीडिया में सुर्खियां बटोरने के लिए नौटंकी कर रही है.
राहुल गांधी पर मदन राठौड़ का बयान
राहुल गांधी पर भी मदन राठौड़ ने निशाना साधा. मदन राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत अपने नेता राहुल गांधी के व्यवहार पर क्यों नहीं बोलते. महिला पुलिसकर्मी के साथ राहुल गांधी के व्यवहार पर सवाल उठाए. बोले- ऐसे व्यवहार से लोकतंत्र शर्मसार होता है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद सम्मानजनक है. इस पद पर बैठे व्यक्ति को मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए. गहलोत को राहुल गांधी को मर्यादा में रहने की सलाह देनी चाहिए.
मदन राठौड़ ने कांग्रेस सांसद से जुड़े मामले पर भी घेरा. जेएनयू में प्रोफेसर रहे कांग्रेस सांसद से जुड़े कथित मामले का जिक्र किया. आरोप- छात्राओं से अंक बढ़ाने के बदले उनकी अस्मिता की मांग करना बेहद निंदनीय है. मदन राठौड़ ने कहा कि ऐसे गंभीर मामले में केवल निलंबन पर्याप्त नहीं, दोष सिद्ध होने पर सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए.
मदन रौठौड़ ने अशोक गहलोत से सवाल किया कि कांग्रेस सांसद से जुड़े मामले पर चुप्पी क्यों. राजनीतिक नेतृत्व अपने नेताओं के खिलाफ बोलने से बच रहा है. मदन राठौड़ ने आगे कहा कि ऐसी घटनाएं भारतीय संस्कृति और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को धूमिल करती हैं.