राजस्थान निकाय चुनाव: भिवाड़ी में दिखा लाल बत्ती कल्चर, उठे सवाल
Rajasthan Politics : भिवाड़ी में आम लोग और स्थानीय छुटभैये नेता धूप और धूल फांकते हुए अपने-अपने पर्चे भरने पहुंचे थे, तभी वहां एक ऐसी गाड़ी दिखी, जिसकी छत पर साल 2017 में विलुप्त हो चुकी 'लालबत्ती' पूरी शानो-शौकत के साथ लगी थी.
Rajasthan Politics : साल 2017 में 1 मई का दिन VIP के लिए त्रासदी से कम नहीं था. जब केंद्र सरकार के एक फरमान ने सब बदल दिया था. जिसमें कहा गया था कि कोई भी VIP नहीं हैं और गाड़ियों से लालबत्ती हटाई जाएगी. लेकिन भिवाड़ी के अतिरिक्त जिला कलेक्टर (एडीएम) कार्यालय के बाहर एक ऐसा चमत्कार हुआ, जिसे देखकर नास्तिकों को भी रुतबे के भगवान पर भरोसा हो जाए. मौका था भिवाड़ी नगर निकाय चुनाव के नामांकन का.
आम लोग और स्थानीय छुटभैये नेता धूप और धूल फांकते हुए अपने-अपने पर्चे भरने पहुंचे थे, तभी वहां एक ऐसी गाड़ी दिखी, जिसकी छत पर साल 2017 में विलुप्त हो चुकी 'लालबत्ती' पूरी शानो-शौकत के साथ लगी थी. पता चला कि ये गाड़ी गुरुग्राम नगर निगम की मेयर साहिबा, राजरानी मल्होत्रा जी की है. अब आप खुद सोचिए, जब गुरुग्राम जैसे हाई-टेक और साइबर सिटी की मेयर भिवाड़ी जैसे औद्योगिक कस्बे में आ रही हैं तो क्या वो चुपचाप एक आम इंसान की तरह आएंगी ? बिल्कुल नहीं ! सूरज अगर बादलों में भी छिप जाए, तो भी उसकी गर्मी महसूस होती है. मेयर साहिबा की गाड़ी पर लगी वो लालबत्ती दरअसल कोई ट्रैफिक नियम तोड़ने का साधन नहीं थी, बल्कि वो उनके 'रुतबे का लाइटहाउस' थी, जो भिवाड़ी की अनजान सड़कों पर उन्हें रास्ता दिखा रही थी.
लालबत्ती क्यों जरूरी है ?
जब देश में वीआईपी कल्चर खत्म हो गया है, तो मेयर की गाड़ी पर लालबत्ती किस नियम के तहत लगी थी ? दरअसल लालबत्ती के कुछ तार्किक और मनोवैज्ञानिक पहलु भी है. जिसका एहसास सिर्फ लालबत्ती वाले को ही नहीं उसे देखने वाले को भी होता है.अगर एक मेयर और एक आम आदमी ट्रैफिक सिग्नल पर रुकें तो आम लोगों को ये याद दिला दिया जाएगा कि ये एक सामाजिक सेवा है, ताकि जनता मुगालते में ना रहे. एडीएम ऑफिस के बाहर स्थानीय दावेदार फॉर्म भर रहे थे. उन बेचारों को क्या पता कि असली 'पॉवर' क्या होती है. लालबत्ती वाली गाड़ी ले जाकर मेयर साहिबा ने एक तरह से उन सभी उम्मीदवारों का मार्गदर्शन किया है. वीआईपी कल्चर हमारे डीएनए में बसा है. गाड़ी से लालबत्ती उतार देने से नेता का वीआईपी सिंड्रोम ठीक नहीं होता. ये वैसा ही है जैसे बुखार में थर्मामीटर को तोड़ देना और सोचना कि बुखार उतर गया.
भिवाड़ी में दिखी लालबत्ती सदियों से चले आ रहे सामंतवाद और आधुनिक लोकतंत्र का एक खूबसूरत 'फ्यूजन' है. तो अब नियम पूछना बंद कीजिए. ये मत पूछिए कि किस अनुमति के तहत बत्ती लगी थी. अनुमति की जरूरत उन्हें होती है जिन्हें नियम मानने होते हैं. जो खुद नियम बनाते हैं, उनके लिए लालबत्ती अधिकार बन जाता है.