थाने में फरियादी से बदसलूकी पर लगेगी लगाम: अब ध्यान से बातों को सुनेंगे पुलिसकर्मी, पुलिस ने उठाया कदम
Rajasthan News: राजस्थान पुलिस अब थाने में फरियादियों से बेहतर व्यवहार और तनाव में संयम बनाए रखने की ट्रेनिंग ले रही है. जयपुर में DGP राजीव कुमार शर्मा की मौजूदगी में 15 से 17 अक्टूबर तक सॉफ्ट स्किल कार्यक्रम चल रहा है. मकसद पुलिसिंग को संवेदनशील और नागरिक केंद्रित बनाना है.
Jaipur News: राजस्थान में पुलिसकर्मियों के व्यवहार में बदलाव लाने की कवायद शुरू हो गई है. अब थाने में आने वाले फरियादी के साथ पुलिसकर्मी किस तरह पेश आएं, उसकी परेशानी को कैसे सुनें और तनाव के बीच भी संयम कैसे बनाए रखें, इसकी ट्रेनिंग दी जा रही है. जयपुर में डीजीपी राजीव कुमार शर्मा की मौजूदगी में तीन दिवसीय सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू हुआ है. इसका मकसद पुलिसिंग को ज्यादा संवेदनशील और नागरिक केंद्रित बनाना है. हालांकि, पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर हाल के दिनों में सामने आए विवादों के बीच इस पहल को अहम माना जा रहा है.
थाने में फरियादी से व्यवहार सुधारने की पहल
थाना, जहां आम आदमी अपनी शिकायत लेकर पहुंचता है. किसी को न्याय की उम्मीद होती है, तो कोई अपनी परेशानी का समाधान चाहता है. ऐसे में पुलिसकर्मी का व्यवहार पीड़ित के लिए राहत भी बन सकता है और उसकी परेशानी बढ़ा भी सकता है. इसी व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए राजस्थान पुलिस ने सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग शुरू की है. जयपुर में सांगानेर एयरपोर्ट के पास स्थित IIHMR यूनिवर्सिटी में 15 से 17 अक्टूबर तक तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य है, पुलिसकर्मियों की सोच, संवाद शैली और आमजन के प्रति व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना.
सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग
अवधि: 15–17 अक्टूबर 2026
स्थान: IIHMR यूनिवर्सिटी, जयपुर
उद्देश्य: पुलिसकर्मियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव
तीन दिन, तीन विषय
15 अक्टूबर: खुद को जानें, खुद का नेतृत्व करें
16 अक्टूबर: दबाव की परिस्थितियों में पुलिसिंग
17 अक्टूबर: सीख से सकारात्मक पुलिसिंग की ओर
क्या बोले डीजीपी राजीव शर्मा?
डीजीपी राजीव शर्मा ने उद्घाटन समारोह में कहा कि पुलिसकर्मियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने की जरूरत. थाने में आने वाले परिवादी के साथ संवेदनशील व्यवहार होना चाहिए. परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण हों, नागरिक से अच्छा व्यवहार किया जा सकता है. संवेदनशीलता का अर्थ कानून के पालन में ढिलाई नहीं, बल्कि विधिक प्रक्रिया के तहत राहत देने का प्रयास है.
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि पुलिसकर्मियों को लंबी ड्यूटी, त्वरित फैसलों और लगातार बदलती चुनौतियों के बीच काम करना पड़ता है. इसके बावजूद आमजन के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है. उन्होंने जोर दिया कि पुलिस के पास आने वाले व्यक्ति की परेशानी को ध्यान से सुना जाए और कानून के दायरे में उसके समाधान का प्रयास किया जाए. डीजीपी के मुताबिक, यह केवल औपचारिक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि विचार-मंथन के बाद तैयार किया गया एक विशेष प्रयास है. इसका उद्देश्य जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप पुलिस की छवि और व्यवहार को बेहतर बनाना है.
तीन दिन में व्यवहार सुधारने का प्रशिक्षण
तीन दिवसीय कार्यक्रम को अलग-अलग विषयों में बांटा गया है. पहले दिन 'खुद को जानें, खुद का नेतृत्व करें' विषय के तहत आत्म-जागरूकता, व्यावसायिक पहचान, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक सोच पर जोर दिया जा रहा है. दूसरे दिन तनावपूर्ण परिस्थितियों में पुलिसिंग की ट्रेनिंग होगी. इसमें नाराज शिकायतकर्ताओं से बातचीत, भावनात्मक परिस्थितियों में संयम और प्राथमिकताएं तय करने जैसे विषय शामिल हैं. तीसरे दिन प्रशिक्षण से मिली सीख को व्यवहार में उतारने पर फोकस रहेगा. प्रभावी संवाद, ध्यान से सुनने, आपसी संबंध मजबूत करने और नागरिकों के साथ विश्वास कायम करने के व्यावहारिक तरीके सिखाए जाएंगे.प्रशिक्षण में केस स्टडी, भूमिका-अभिनय, समूह अभ्यास और अनुभव साझा करने जैसी गतिविधियां भी शामिल हैं.
पुलिस के व्यवहार पर उठे सवाल, ट्रेनिंग कितनी कारगर?
राजस्थान में हाल के दिनों में पुलिसकर्मियों के आचरण को लेकर कई विवाद सामने आए हैं. जयपुर ग्रामीण के नरेना थाने में संघ प्रचारक के साथ कथित मारपीट का मामला हो या किशनगढ़ में महिला पुलिस अधिकारी और वकील के बीच विवाद, इन घटनाओं ने पुलिस के व्यवहार और जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं.
अन्य मामलों में भी पुलिसकर्मियों पर दुर्व्यवहार और हिरासत में मारपीट के आरोप सामने आते रहे हैं. ऐसे में सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग को पुलिसिंग में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. हालांकि, इसका वास्तविक असर तभी दिखाई देगा, जब प्रशिक्षण में सिखाए गए व्यवहार को पुलिसकर्मी थानों और फील्ड में भी अपनाएंगे.