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स्मार्ट बन रही राजस्थान पुलिस, AI की मदद से साइबर अपराधियों का कर रही पीछा, गोवा मॉडल का प्रदेश में भी असर

Rajasthan Police: साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच राजस्थान पुलिस अब जांच को हाईटेक बनाने पर काम कर रही है. पुलिस फर्जी इन्वेस्टमेंट वेबसाइट, म्यूल अकाउंट और पैसों के लेयरिंग नेटवर्क का पता लगाने में AI की मदद ले रही है. वहीं, गोवा पुलिस की AI आधारित 1930 हेल्पलाइन और Smart Force Project को भी राजस्थान में लागू करने की संभावनाएं देखी जा रही हैं.

स्मार्ट बन रही राजस्थान पुलिस, AI की मदद से साइबर अपराधियों का कर रही पीछा, गोवा मॉडल का प्रदेश में भी असर
Image Credit: Rajasthan Police

साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच राजस्थान पुलिस अब अपराधियों से निपटने के लिए तकनीक का सहारा ले रही है. साइबर अपराध की जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल शुरू हो गया है. इसका उपयोग फर्जी वेबसाइट की पहचान से लेकर पैसों के ट्रांजेक्शन और संदिग्ध बैंक खातों का पता लगाने तक किया जा रहा है.


गोवा मॉडल पर राजस्थान की नजर
साइबर क्राइम से निपटने के लिए गोवा पुलिस की तकनीकी पहल को राजस्थान में भी मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है. गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने 22 जुलाई 2026 को राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र भेजकर वहां चल रहे तकनीकी प्रयोगों की जानकारी दी थी.

पत्र में खास तौर पर क्लाउड आधारित 1930 साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन और Smart Force Project का जिक्र किया गया. इसके बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को गोवा की इन पहलों का अध्ययन कर जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए.


AI कॉल एजेंट की भी पहल
गोवा पुलिस ने AI आधारित कॉल एजेंट का परीक्षण किया है. यह एजेंट साइबर ठगी के पीड़ित से शुरुआती बातचीत कर शिकायत से जुड़ी जरूरी जानकारी दर्ज करने में मदद कर सकता है. हालांकि बातचीत पर अंतिम नियंत्रण पुलिसकर्मी का ही रहता है. जरूरत पड़ने पर कॉल टेकर बातचीत में हस्तक्षेप कर सकता है या खुद पूरी कॉल संभाल सकता है.


फर्जी वेबसाइट से म्यूल अकाउंट तक नजर
राजस्थान पुलिस ने भी साइबर जांच में AI का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. साइबर क्राइम डीआईजी शांतनु कुमार सिंह के मुताबिक AI की मदद से फर्जी इन्वेस्टमेंट वेबसाइट की पहचान की जा रही है. वेबसाइट फर्जी मिलने पर उसे टेक डाउन कराने की कार्रवाई की जाती है. इसके अलावा पुलिस म्यूल हंटर अकाउंट की पहचान करने और पैसों के लेयर-टू-लेयर ट्रांजेक्शन को ट्रैक करने में भी तकनीक का इस्तेमाल कर रही है. चालान पेश करने से पहले केस में जरूरी तथ्यों और सबूतों की समीक्षा में भी AI मददगार साबित हो रहा है.

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Smart Force Project भी चर्चा में
गोवा का Smart Force Project पुलिस के फील्ड वर्क और वेरिफिकेशन सिस्टम को डिजिटल बनाने पर आधारित है. एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कई पुलिस सेवाओं को उपलब्ध कराने की योजना है. इससे काम की प्रक्रिया तेज होने और डेटा को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है.

राजस्थान पुलिस का मानना है कि साइबर अपराध का तरीका लगातार बदल रहा है. ऐसे में जांच एजेंसियों के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल जरूरी होता जा रहा है. हाल के मामलों में पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ठगी की रकम को होल्ड करवाने और केस को मजबूत बनाने की दिशा में भी कार्रवाई की है.

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About the Author

Ansh Raj

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अंश राज Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर उनकी पैनी नजर रहती है. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर से जुड़ी खबरों में उनकी खास दिलचस्पी है. नई चीजों को सीखने की फिराक में रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनावों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बड़े बयान तक, अंश राज खबरों की नब्ज पर नजर रखते हैं. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करना और किसी भी स्टोरी को ज्यादा प्रभावी और रोचक अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है. खबर को सिर्फ लिखना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से पैकेज कर दर्शकों तक पहुंचाना उनके काम का अहम हिस्सा है.  डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव रखने वाले अंश राज इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. खबरों की गंध को सबसे पहले पहचानना, उसकी तह तक पहुंचना और उसे सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे बेहतर तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना... यही अंश राज की पहचान है.
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