राजस्थान के किसानों के लिए बड़ी खबर: फसल बीमा में देश में चौथा नंबर, पढ़ें ₹35,600 करोड़ का पूरा गणित
Jaipur News: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन में राजस्थान ने देश में चौथा स्थान हासिल किया है. 43.5 अंक के साथ राज्य ने तकनीक आधारित फसल कटाई प्रयोग और येसटेक में पूरे 10-10 अंक प्राप्त किए.
Jaipur News: राजस्थान ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन में राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति हासिल की है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में योजना के प्रभावी और तकनीक आधारित क्रियान्वयन के मामले में राजस्थान देशभर में चौथे स्थान पर रहा है. भारत सरकार की ओर से राज्यों के योजना-विशिष्ट मापदंडों के आधार पर तैयार की गई रैंकिंग में राजस्थान ने 43.5 अंक हासिल किए हैं.
भारत सरकार ने देश के सभी राज्यों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के संचालन का 10 बिंदुओं के प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन किया. इस मूल्यांकन में असम 55.5 अंक के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि उत्तर प्रदेश ने 47.5 अंक हासिल कर दूसरा स्थान प्राप्त किया. राजस्थान 43.5 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहा. इसके बाद उत्तराखंड, हरियाणा, पुडुचेरी और महाराष्ट्र का स्थान रहा. इस रैंकिंग के साथ राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है.
10 बिंदुओं के प्रदर्शन के आधार पर हुआ मूल्यांकन
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन को लेकर भारत सरकार ने राज्यों के प्रदर्शन का विस्तृत मूल्यांकन किया है. इसमें योजना से जुड़े अलग-अलग महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया. अधिसूचना जारी करने की समयबद्धता, राज्यांश सब्सिडी का भुगतान, फसल कटाई प्रयोग को ऐप के माध्यम से करना, सकल फसल क्षेत्र में बीमा कवरेज, वास्तविक उपज की स्वीकृति, दावा भुगतान की समयबद्धता, केसीसी खातों का नामांकन, येसटेक का उपयोग और किसान शिकायतों के समाधान जैसे मापदंडों पर राज्यों के प्रदर्शन को परखा गया. राजस्थान ने इन मापदंडों में कई क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है. खासतौर पर तकनीक के इस्तेमाल से जुड़े दो महत्वपूर्ण मापदंडों में राज्य को पूरे अंक मिले हैं.
फसल कटाई प्रयोग और येसटेक में मिले पूरे 10-10 अंक
राजस्थान के प्रदर्शन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में फसल कटाई प्रयोग को ऐप के माध्यम से ऑनलाइन करना और येसटेक का क्रियान्वयन शामिल है. इन दोनों मापदंडों पर राजस्थान को 10-10 अंक प्राप्त हुए हैं.
फसल कटाई प्रयोग को ऐप के माध्यम से डिजिटल तरीके से रिकॉर्ड किए जाने से फसल की उपज के आकलन को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलती है. भारत सरकार के मूल्यांकन फ्रेमवर्क के अनुसार 90 प्रतिशत से अधिक फसल कटाई प्रयोग ऐप के माध्यम से किए जाने पर अधिकतम 10 अंक निर्धारित किए गए हैं. राजस्थान ने इस मापदंड में पूरे अंक हासिल किए हैं. इसी तरह येसटेक के तहत तकनीक आधारित उपज आकलन को बढ़ावा दिया जा रहा है. मूल्यांकन में 90 प्रतिशत से अधिक जिलों में येसटेक अपनाने वाले राज्यों के लिए अधिकतम 10 अंक का प्रावधान है. राजस्थान को इस मापदंड में भी पूरे 10 अंक मिले हैं.
केसीसी एनरोलमेंट और शिकायत निवारण में भी प्रदर्शन
तकनीकी मापदंडों के अलावा राजस्थान ने केसीसी खातों के एनरोलमेंट और शिकायत निवारण के क्षेत्र में भी अंक हासिल किए हैं. केसीसी खातों के एनरोलमेंट से जुड़े मापदंड में राजस्थान को 7.5 अंक मिले हैं, जबकि शिकायत निवारण के मापदंड में राज्य को 6 अंक प्राप्त हुए.
सरकार की ओर से फसल बीमा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और किसान केंद्रित बनाने पर जोर दिया जा रहा है. डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल से फसल नुकसान का आकलन, बीमा दावों का निस्तारण और शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है.
बीमा कवरेज और क्लेम निस्तारण पर भी फोकस
राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्थान हासिल करना राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया है. हालांकि, राज्य सरकार की ओर से योजना के अन्य मापदंडों में भी सुधार पर जोर दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विशेष रूप से बीमा कवरेज, समयबद्ध दावा निस्तारण, उपज आंकड़ों की शीघ्र स्वीकृति और अन्य प्रक्रियाओं में सुधार के निर्देश दिए हैं. सरकार का उद्देश्य किसानों को त्वरित, पारदर्शी और सुगम फसल बीमा सेवाएं उपलब्ध कराना है. इसके लिए योजना में तकनीक के इस्तेमाल को लगातार बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
कृषि मंत्री बोले, डेटा और तकनीक आधारित बनेगी व्यवस्था
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने बताया कि राज्य सरकार का प्रयास है कि फसल बीमा व्यवस्था को केवल क्षतिपूर्ति की योजना तक सीमित नहीं रखा जाए. इसे डेटा और तकनीक आधारित, पारदर्शी तथा किसान केंद्रित व्यवस्था के रूप में विकसित किया जाए.
उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के अधिकाधिक इस्तेमाल से फसल नुकसान के आकलन, दावों के निस्तारण, शिकायत समाधान और योजना की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है. भारत सरकार के रैंकिंग फ्रेमवर्क में भी योजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है. इनमें अधिसूचना जारी करने की समयबद्धता, राज्यांश सब्सिडी का भुगतान, फसल कटाई प्रयोग के लिए ऐप का उपयोग, सकल फसल क्षेत्र में बीमा कवरेज, वास्तविक उपज की स्वीकृति, दावा भुगतान की समयबद्धता, केसीसी खातों का नामांकन, येसटेक और किसान शिकायतों के समाधान जैसे मापदंड शामिल हैं.
राजस्थान में किसानों को 35600 करोड़ रुपये के फसल बीमा क्लेम
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि राजस्थान में खरीफ 2016 से खरीफ 2026 तक 25.47 करोड़ फसल बीमा पॉलिसी सृजित की गई हैं. इस अवधि में किसानों ने 7800 करोड़ रुपये का प्रीमियम भरा है. इसके बदले किसानों को फसल बीमा क्लेम के रूप में 35600 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है. यह राशि किसानों की ओर से अदा किए गए प्रीमियम की 4.5 गुना है. इसी अवधि में केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने लगभग 19-19 हजार करोड़ रुपये का प्रीमियम के रूप में अंशदान दिया.
आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में लगभग 90 प्रतिशत फसल कटाई प्रयोग ऐप के माध्यम से ऑनलाइन हुए हैं, जो देश में सर्वाधिक है. इससे फसल कटाई से जुड़े आंकड़ों को डिजिटल रूप से दर्ज करने और प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में मदद मिली है.
भूमि अभिलेखों को फसल बीमा पोर्टल से जोड़ा गया
राजस्थान फसल बीमा पोर्टल के साथ भूमि अभिलेख का एकीकरण करने वाला देश का तीसरा राज्य भी बना है. राज्य में कुल 52946 गांव हैं, जिनमें से 47028 गांवों के भू-अभिलेख को पोर्टल के साथ एकीकृत किया जा चुका है. यह संख्या कुल गांवों का 89 प्रतिशत है. भूमि अभिलेखों के पोर्टल से एकीकरण का उद्देश्य फसल बीमा से जुड़ी प्रक्रियाओं में डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करना है. इससे योजना के तहत उपलब्ध आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल करने में सहायता मिलती है.
फसल बीमा योजना में फर्जीवाड़े पर सख्त रुख
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के अनुरूप प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसी भी प्रकार का फर्जीवाड़ा स्वीकार नहीं किया जाएगा. उन्होंने बताया कि फर्जीवाड़ा करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि 10 से अधिक मामलों में एफआईआर भी दर्ज कराई जा चुकी है. साथ ही शत-प्रतिशत फसल कटाई प्रयोग ऐप के माध्यम से ऑनलाइन करने के निर्देश दिए गए हैं.
कृषि विभाग के अधिकारी या कर्मचारी की भ्रष्टाचार में संलिप्तता पाए जाने पर सीधे बर्खास्त करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं. सरकार का जोर योजना में पारदर्शिता बनाए रखने और किसानों तक फसल बीमा का लाभ सही तरीके से पहुंचाने पर है.
तकनीक आधारित व्यवस्था से किसानों को लाभ पहुंचाने का प्रयास
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन में राजस्थान का देश में चौथा स्थान हासिल करना राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है. खासतौर पर फसल कटाई प्रयोग को ऐप के माध्यम से ऑनलाइन करने और येसटेक के मापदंडों में पूरे अंक हासिल करना योजना में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाता है.
राज्य सरकार अब बीमा कवरेज, दावों के समयबद्ध निस्तारण, उपज आंकड़ों की शीघ्र स्वीकृति और शिकायत समाधान जैसे क्षेत्रों में सुधार पर जोर दे रही है. सरकार के अनुसार तकनीक और डिजिटल व्यवस्था के जरिए फसल बीमा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और किसान केंद्रित बनाने का प्रयास जारी है.