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Rajasthan News: सरकारी दफ्तर अब सिर्फ डिजिटल नहीं होंगे. उनकी डिजिटल सेहत भी जांची जाएगी. राजस्थान में ई-मित्र पर हर महीने करीब 60 लाख ट्रांजेक्शन हो रहे हैं और 1100 सेवाएं ऑनलाइन हैं, लेकिन अब सरकार यह भी परखेगी कि ये सेवाएं कितनी तेज, सुरक्षित और असरदार हैं. इसके लिए ई-डिलीवरी असेसमेंट सिस्टम बनेगा और ऑनलाइन सेवाओं का नियमित क्वालिटी ऑडिट होगा.
हर महीने अधिकारियों-कर्मचारियों की लगेगी 'साइबर स्वच्छता क्लास'
साइबर खतरे से निपटने के लिए हर महीने अधिकारियों-कर्मचारियों की 'साइबर स्वच्छता क्लास' लगेगी. मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने IT विभाग की समीक्षा में ये निर्देश दिए. वहीं 97 जेलों में 400 VC नोड्स लगाने से लेकर महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को आगे बढ़ाने तक का रोडमैप भी तय किया गया. प्रदेश में अलग-अलग विभागों की ऑनलाइन सरकारी सेवाएं कितनी बेहतर तरीके से काम कर रही हैं, अब इसका नियमित आकलन और ऑडिट होगा. इसके लिए राज्य स्तर पर ई-डिलीवरी असेसमेंट सिस्टम विकसित किया जाएगा.
सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म की साइबर सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग (DoIT&C) की समीक्षा बैठक में इसके निर्देश दिए. उन्होंने सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म की साइबर सुरक्षा मजबूत करने के साथ तकनीकी सेवाओं से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए हर महीने साइबर स्वच्छता वर्कशॉप कराने को भी कहा. बैठक में सामने आया कि प्रदेश में ई-मित्र के जरिए करीब 1100 सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. इसके लिए 75 हजार से ज्यादा फिजिकल कियोस्क और 56 स्थानीय सेवा प्रदाता हैं. ई-मित्र पर हर महीने औसतन 60 लाख ट्रांजेक्शन हो रहे हैं. वहीं ई-मित्र व्हाट्सएप गवर्नेंस पर 109 सेवाएं उपलब्ध हैं और अब तक 2.95 लाख से ज्यादा ट्रांजेक्शन दर्ज किए जा चुके हैं.
सरकारी वेबसाइट्स को नियमित अपडेट करने को मुख्य सचिव ने कहा
मुख्य सचिव ने विभाग को इंटेलिजेंट डैशबोर्ड, डेटा इंटीग्रेशन और नई तकनीकों का ज्यादा इस्तेमाल करने के निर्देश दिए. सरकारी वेबसाइट्स को नियमित अपडेट करने और उनपर उपलब्ध सूचनाओं तथा सेवाओं की उपयोगिता बनाए रखने को कहा. प्रस्तावित ई-डिलीवरी असेसमेंट सिस्टम के जरिए अलग-अलग विभागों की ऑनलाइन सेवाओं की गुणवत्ता का नियमित आकलन किया जाएगा.
रक्षा मानकों की नियमित समीक्षा के निर्देश दिए
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन सेवाओं के सुरक्षा मानकों की नियमित समीक्षा के निर्देश दिए. अधिकारियों-कर्मचारियों को नई साइबर चुनौतियों, सुरक्षा उपायों और डिजिटल सिक्योरिटी प्रोटोकॉल से अपडेट रखने के लिए हर महीने साइबर स्वच्छता कार्यशाला होगी. वहीं राज्य की जेलों में 400 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) नोड्स स्थापित किए जाने हैं. इससे 97 जेलों को कवर किया जाएगा.
अभय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर्स और ITMS के तहत AI आधारित वीडियो एनालिटिक्स के साथ स्पीड और रेड लाइट उल्लंघन की पहचान, PTZ कैमरे और इमरजेंसी कॉल बॉक्स जैसी व्यवस्थाओं पर भी काम किया जा रहा है. वहीं मुख्य सचिव ने बताया कि राजकाज प्लेटफॉर्म से 10.47 लाख से ज्यादा यूजर, 972 संगठन और 1.12 लाख से अधिक कार्यालय जुड़े हुए हैं. राजस्थान संपर्क में 202 विभाग इंटीग्रेट हैं. इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 62 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुई हैं और निस्तारण प्रतिशत 97.41 बताया गया.
SMART से लाखों नागरिक लाभान्वित हुए
SMART (स्मार्ट मैनेजमेंट विथ एआई एंड रियल टाइम सिस्टम ) से 2.51 लाख से ज्यादा नागरिक लाभान्वित हुए हैं. वहीं Raj eVault में नागरिकों के दस्तावेज एक बार जमा होने के बाद उन्हें अलग-अलग सरकारी सेवाओं में सुरक्षित तरीके से दोबारा इस्तेमाल करने की व्यवस्था विकसित की जा रही है. आई-स्टार्ट के तहत प्रदेश में 9,357 से ज्यादा स्टार्टअप पंजीकृत हैं. इनके जरिए 49,438 से अधिक रोजगार सृजित होने और 1,056 करोड़ रुपए से ज्यादा निवेश सक्षम होने की जानकारी बैठक में दी गई. इनमें 3,524 से ज्यादा महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप हैं. स्टार्टअप इकोसिस्टम में 700 से ज्यादा इन्क्यूबेशन सीट्स भी उपलब्ध हैं. बैठक में सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार सचिव डॉ. रवि कुमार सुरपुर, आयुक्त हिमांशु गुप्ता सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
बहरहाल, सरकार की सेवाएं अब फाइल से निकलकर मोबाइल की स्क्रीन तक पहुंच चुकी हैं, लेकिन जितनी तेजी से सिस्टम डिजिटल हो रहा है, उतना ही बड़ा खतरा साइबर सेंध का भी है. इसलिए अब सरकारी ई-सर्विसेज का सिर्फ 'स्पीड टेस्ट' नहीं, 'सेफ्टी टेस्ट' भी होगा. हर महीने साइबर स्वच्छता की क्लास लगेगी और ऑनलाइन सेवाओं का ऑडिट होगा. यानी सरकार का नया डिजिटल मंत्र साफ है. सेवा एक क्लिक में मिले, लेकिन उस क्लिक में सेंध की कोई गुंजाइश न रहे.