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Jaipur News: गांधी जयंती के मौके पर आज राजस्थान के बाजारों में व्यापारी ‘नो UPI डे’ मना रहे हैं. मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क को लेकर व्यापारियों ने विरोध जताते हुए दुकानों पर UPI पेमेंट नहीं लेने का फैसला किया है. इसके चलते आज कई बाजारों में डिजिटल भुगतान के बजाय नकद लेनदेन पर जोर दिया जा रहा है. व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से उनके कारोबार पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा. भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने गांधी जयंती पर प्रतीकात्मक चरखा रखकर अपना विरोध दर्ज कराया. वहीं, ग्राहकों को भी आज खरीदारी के दौरान नकद राशि साथ रखने की जरूरत पड़ रही है. व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि MDR शुल्क वापस नहीं लिया गया तो विरोध-प्रदर्शन आगे भी जारी रहेगा.
आज बाजारों में सिर्फ कैश लेनदेन, UPI का विरोध क्यों?
पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. ग्राहक छोटी से छोटी खरीदारी के लिए भी UPI का उपयोग करने लगे हैं. इससे भुगतान करना आसान हुआ है और लेनदेन का ऑनलाइन रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहता है. ऐसे में UPI व्यापारियों और ग्राहकों, दोनों के लिए रोजमर्रा के कारोबार का अहम हिस्सा बन चुका है. लेकिन अब MDR शुल्क को लेकर व्यापारियों और संबंधित पक्षों के बीच विरोध देखने को मिल रहा है.
व्यापारियों के अनुसार, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ डिजिटल भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत MDR शुल्क लागू होने की बात कही जा रही है. इसी प्रस्तावित शुल्क के विरोध में राजस्थान के व्यापारी गांधी जयंती पर ‘नो UPI डे’ मना रहे हैं. भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता का कहना है कि राजस्थान में UPI पर MDR शुल्क लगाने से करीब एक करोड़ व्यापारी प्रभावित हो सकते हैं. उनका कहना है कि जब लोगों ने नकद भुगतान की जगह डिजिटल भुगतान अपनाया है, तो अब इस पर शुल्क लगाने से व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है. व्यापार मंडल ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है.
ग्राहकों के पास कैश की किल्लत, डिजिटल भुगतान की आदत बनी परेशानी
‘नो UPI डे’ का असर ग्राहकों की खरीदारी पर भी देखने को मिल रहा है. जी मीडिया से बातचीत के दौरान कुछ ग्राहकों ने कहा कि अब UPI से भुगतान करने की आदत बन चुकी है, इसलिए अचानक नकद लेकर खरीदारी करना परेशानी भरा हो सकता है. कई लोग छोटी खरीदारी से लेकर बड़े भुगतान तक के लिए मोबाइल से पेमेंट करते हैं. ऐसे में दुकानों पर UPI स्वीकार नहीं किए जाने से उन्हें नकदी की व्यवस्था करनी पड़ सकती है.
वहीं, दुकानदारों का कहना है कि MDR शुल्क के विरोध में यह कदम उठाया गया है. व्यापारियों के मुताबिक, डिजिटल भुगतान की सुविधा से ग्राहकों को आसानी होती है, लेकिन इस पर अतिरिक्त शुल्क लगने से कारोबार की लागत बढ़ सकती है. इसी मुद्दे को लेकर व्यापारी संगठनों ने विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया है.
10 और 15 अक्टूबर को फिर होगा विरोध-प्रदर्शन
व्यापारियों ने MDR शुल्क के खिलाफ आंदोलन को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है. इसके तहत 10 अक्टूबर को स्थानीय स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा. इसके बाद 15 अक्टूबर को एक बार फिर ‘नो UPI डे’ मनाने की योजना है. व्यापारियों का कहना है कि यदि उनकी मांग पर विचार नहीं किया गया और शुल्क वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन आगे भी जारी रखा जाएगा.
जयपुर व्यापार महासंघ के महामंत्री सुरेश सैनी के मुताबिक, जयपुर के व्यापारी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब अधिकतर ग्राहक ऑनलाइन UPI भुगतान करते हैं. ऐसे में डिजिटल लेनदेन पर शुल्क लगने से व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ने की चिंता है. व्यापारियों की मांग है कि सरकार इस व्यवस्था पर दोबारा विचार करे, ताकि दुकानदारों और ग्राहकों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े.
UPI के नए नियम: ग्राहकों और व्यापारियों के लिए क्या जानना जरूरी?
15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली MDR व्यवस्था को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बातें समझना जरूरी है.
एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले UPI लेनदेन पर यह MDR शुल्क लागू नहीं होगा.
2,000 रुपये तक के सामान्य UPI भुगतान पर MDR नहीं लगेगा.
2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क व्यापारी को देना होगा.
रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसी कुछ श्रेणियों में निर्धारित शर्तों के तहत अलग शुल्क व्यवस्था होगी. छोटे व्यापारियों को भी कुछ छूट दी गई है.
यहां ध्यान देने वाली बात है कि MDR शुल्क ग्राहक पर सीधे लगाने के बजाय व्यापारी की ओर से भुगतान सेवा से जुड़ी लागत के रूप में लिया जाएगा. इसलिए इसे ग्राहकों पर लगने वाला सामान्य UPI टैक्स समझना सही नहीं होगा.
आखिर क्या है मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR)?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा के बदले व्यापारी से बैंक या संबंधित भुगतान सेवा प्रदाता को दिया जाता है. यह भुगतान नेटवर्क और उससे जुड़ी सेवाओं की लागत से संबंधित है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत चुनिंदा 2,000 रुपये से अधिक के UPI व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू होगा. यह शुल्क व्यापारी को देना है, ग्राहक को नहीं.
राजस्थान में ‘नो UPI डे’ के जरिए व्यापारी इसी अतिरिक्त लागत का विरोध कर रहे हैं. अब देखना होगा कि व्यापारी संगठनों की मांग पर सरकार क्या रुख अपनाती है और आने वाले दिनों में इस विरोध का बाजारों पर क्या असर पड़ता है.