Rajasthan Politics: बीजेपी की बाड़ेबंदी, अलग-अलग बसों में लाए जा रहे प्रत्याशी, बोले- विकास बोलेगा, कमल खिलेगा
Rajasthan Politics: राजस्थान निकाय चुनाव की काउंटिंग से पहले जयपुर में भाजपा ने पार्षदों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है. अलग-अलग बसों से पार्षदों को शहर कार्यालय लाया गया. पार्षदों ने जीत का दावा करते हुए कहा- विकास बोलेगा, कमल खिलेगा.
Rajasthan Politics: राजस्थान निकाय चुनाव के नतीजों से पहले भाजपा प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी शुरू हो गई है. राजधानी जयपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर एक रिसोर्ट में भाजपा के पार्षद प्रत्याशियों को रखा गया है. पार्टी के मेयर पद के दावेदारों को भी इसी प्रशिक्षण शिविर में शामिल किया गया है. रिसोर्ट के भीतर और बाहर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. रिसोर्ट प्रबंधन की अनुमति के बिना किसी भी व्यक्ति को अंदर प्रवेश नहीं दिया जा रहा है और कड़ी सुरक्षा जांच के बाद ही एंट्री मिल रही है.
पार्टी कार्यालय में पहले पार्षदों की हाजिरी लगाई गई, इसके बाद उन्हें अलग-अलग बसों में बैठाकर रवाना किया गया. खास बात यह रही कि पार्षदों के साथ बस ड्राइवरों को भी यह नहीं बताया गया कि उन्हें आखिर कहां ले जाया जा रहा है. अब सबकी नजर निकाय चुनाव के नतीजों पर है, जो तय करेंगे कि कौन प्रत्याशी सत्ता के करीब पहुंचेगा और कौन बाहर होगा.
पार्षदों का कहना है कि पार्टी ने उन्हें प्रशिक्षण के लिए बुलाया है. उनका कहना है कि करीब 10 दिन तक प्रशिक्षण में उन्हें बताया जाता है कि संगठन के साथ कैसे काम करना है. कुछ पार्षदों ने कहा कि पार्टी नेतृत्व जहां भेज रहा है, वे वहीं जा रहे हैं. बस में बैठे प्रत्याशियों ने जीत का भरोसा जताते हुए कहा कि हमारी जीत पक्की है. वहीं कुछ पार्षदों ने कहा, "विकास बोलेगा, कमल खिलेगा." कुछ पार्षदों का कहना है कि यह कोई ट्रेनिंग कैंप नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्हें किसी प्रशिक्षण की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे जनसेवक हैं और इसी बात पर चर्चा होगी.
मासूम बच्चों के साथ बाड़ेबंदी में पहुंची महिला प्रत्याशी
जयपुर में कई महिला प्रत्याशी अपने मासूम बच्चों के साथ बाड़ेबंदी में पहुंची हैं. चुनाव परिणाम आने तक सभी प्रत्याशियों को बाड़ेबंदी में रखा गया है. नतीजों में जिन उम्मीदवारों की जीत होगी, उन्हें मेयर चुनाव तक प्रशिक्षण शिविर में रहना पड़ेगा, जबकि चुनाव हारने वाली महिला प्रत्याशियों को बाड़ेबंदी से छुट्टी मिल जाएगी.
अजमेर में भी राजनीतिक घमासान
वहीं, अजमेर निकाय चुनाव के मतदान के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है. मतदान को अपेक्षाकृत कम मानते हुए भाजपा अब बोर्ड बनाने की रणनीति पर काम कर रही है. पार्टी का फोकस उन निर्दलीय प्रत्याशियों पर है, जिन्हें जिताऊ माना जा रहा है. भाजपा अपने प्रत्याशियों को लेकर पुष्कर पहुंच गई है, वहीं कुछ बागी प्रत्याशियों ने भी अपनी अलग रणनीति तैयार कर ली है. इन बागियों का रुख न कांग्रेस के साथ जाने का है और न ही भाजपा के साथ खड़े होने का. ऐसे में उनकी नजर बोर्ड गठन के दौरान किंग मेकर की भूमिका निभाने पर है. मतदान के बाद अब सभी की निगाहें चुनाव परिणाम और निर्दलीय प्रत्याशियों के रुख पर टिकी हैं.
जालोर में भी बीजेपी की बाड़ेबंदी
भीनमाल नगर पालिका में मतदान खत्म होते ही भाजपा ने बाड़ेबंदी कर दी. मतदान समाप्त होने के साथ ही परिणाम से पहले बोर्ड बनाने को लेकर भाजपा ने अपने सभी प्रत्याशियों को एक जगह बुलाया और इसके बाद उन्हें बाड़ेबंदी में ले जाया गया. भाजपा ने अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने के साथ ही संभावित बहुमत के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है. भाजपा की ओर से अपने सभी प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी किए जाने के बाद अब निर्दलीय प्रत्याशियों पर भी दोनों प्रमुख दलों की नजर है. हालांकि बोर्ड किसका बनेगा, यह तो मतगणना के बाद ही स्थिति साफ होगी. दोनों ही दलों की ओर से बोर्ड बनाने को लेकर रणनीति शुरू कर दी गई है.
बस्सी में नगरपालिका बोर्ड बनाने को लेकर बीजेपी अलर्ट मोड पर
बस्सी में नगरपालिका बोर्ड बनाने को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने कमर कस ली है. दोनों ही दल अपने-अपने बोर्ड बनाने का दावा कर रहे हैं. बोर्ड की बाजी हाथ से न निकल जाए, इसे लेकर दोनों पार्टियों ने पार्षद प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी शुरू कर दी है. भाजपा और कांग्रेस के पार्षद प्रत्याशियों को अलग-अलग स्थानों पर रखा जा रहा है. भाजपा के पार्षद प्रत्याशियों को बस्सी-कानोता क्षेत्र से पुष्कर स्थित एक निजी होटल में शिफ्ट किया गया है. इस दौरान भाजपा नेता चन्द्रमोहन मीना ने पार्षद प्रत्याशियों से फीडबैक भी लिया. दोनों दल एक-एक पार्षद पर नजर बनाए हुए हैं और बोर्ड गठन को लेकर किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते. ऐसे में गांव की चौपालों से लेकर चाय की थड़ियों तक इन दिनों एक ही चर्चा है- सियासत का खेल है जनाब... बोर्ड की बाजी किसके हाथ लगेगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.