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Rajasthan News: राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद सियासत थमने के बजाय और गरमा गई है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर लगाए गंभीर आरोपों के बाद अब मुख्यमंत्री ने बीकानेर से पलटवार किया है. इसी बीच जयपुर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार, पुलिस-प्रशासन और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए. ऐसे में निकाय चुनाव के नतीजों के बाद राजस्थान की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू हो गया है.
गहलोत ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को निकाय चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधा था. गहलोत ने आरोप लगाया कि निकाय चुनाव में प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल राजनीतिक तौर पर किया गया और IAS-IPS कैडर की साख प्रभावित हुई. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्षदों पर दबाव बनाने और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल हुआ. गहलोत का आरोप था कि 'भजनलाल जी, आपसे ये उम्मीद नहीं थी' और उन्होंने चुनाव में सरकार की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए.
भजनलाल शर्मा ने गहलोत के आरोपों पर किया पलटवार
गहलोत के आरोपों पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को बीकानेर में जवाब दिया. मुख्यमंत्री ने गहलोत के आरोपों को खारिज करते हुए निकाय चुनाव के वार्ड परिसीमन को लेकर उल्टा कांग्रेस सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाया. भजनलाल ने कहा कि जब गहलोत सरकार में एक नगर निगम को दो हिस्सों में बांटा गया था, तब इस फैसले पर सवाल क्यों नहीं उठाए गए. मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव हारने के बाद ही वार्डों के गठन और परिसीमन पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं. उन्होंने गहलोत के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि 'हमने ऐसा कुछ नहीं किया, जैसा आरोप लगाया जा रहा है.' मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस को जनता से मिल रहे समर्थन को स्वीकार करना चाहिए और पार्टी को अपनी स्थिति तथा अपनी रणनीति की समीक्षा करनी चाहिए. साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व और परिवारवाद को लेकर भी निशाना साधा.
डोटासरा ने पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर उठाए सवाल
इसी सियासी घमासान के बीच जयपुर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर एक साथ कई मोर्चों पर हमला बोला. डोटासरा ने कानून-व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए DGP से लेकर SP स्तर तक के अधिकारियों की भूमिका पर प्रश्न खड़े किए. उन्होंने कहा कि यदि पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं तो यह पूछा जाना चाहिए कि आखिर पुलिस किसके अधीन काम करती है.
पार्षदों पर दबाव बनाने का लगाया आरोप
डोटासरा ने आरोप लगाया कि निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस के निर्वाचित पार्षदों पर दबाव बनाने, उन्हें तोड़ने और राजनीतिक रूप से प्रभावित करने के लिए पुलिस-प्रशासन का इस्तेमाल किया गया. उन्होंने दावा किया कि इस दौरान 155 FIR दर्ज होने जैसी स्थिति सामने आई और पार्षदों को कथित तौर पर दबाव में लेने की कोशिश की गई.
IAS-IPS अधिकारियों को लेकर डोटासरा का दावा
डोटासरा ने अधिकारियों पर तीखी टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि IAS और IPS अधिकारी पार्षदों को तलाशने में लगे रहे, जबकि पुलिस को अपराध और कानून-व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए था. डोटासरा का हमला केवल सरकार और पुलिस तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुईं. उन्होंने फॉर्म-6, वोटर डेटा के IT सिस्टम और ERO के नेट एक्सेस को लेकर भी सवाल उठाए. डोटासरा ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा कि चुनावी व्यवस्था किसी एक व्यक्ति के निर्णय से नहीं चलनी चाहिए. उन्होंने चुनाव आयुक्तों की भूमिका और संवैधानिक व्यवस्था को लेकर भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं.
निकाय चुनाव के नतीजों पर BJP-कांग्रेस आमने-सामने
निकाय चुनाव के बाद राजस्थान की सियासत का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है, सत्तारूढ़ भाजपा चुनाव परिणाम को जनता के समर्थन और अपनी सरकार के कामकाज की स्वीकार्यता के तौर पर देख रही है, जबकि कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया, प्रशासनिक भूमिका, परिसीमन और पार्षदों पर कथित दबाव को लेकर सवाल उठा रही है. हालिया निकाय चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन के बाद पार्टी अब पंचायती राज चुनाव की ओर बढ़ने की बात कर रही है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बीकानेर में भी कहा कि निकाय चुनाव के बाद अब फोकस पंचायती राज चुनाव पर रहेगा. वहीं, कांग्रेस लगातार चुनावी प्रक्रिया और सरकार की भूमिका पर सवाल उठा रही है.
गहलोत और डोटासरा के निशाने पर सरकार
पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस के दो प्रमुख चेहरों-अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा ने अलग-अलग मंचों से सरकार पर निशाना साधा है. गहलोत ने मुख्यमंत्री और ब्यूरोक्रेसी की भूमिका पर सवाल उठाए, जबकि डोटासरा ने इसे आगे बढ़ाते हुए पुलिस, प्रशासन, निकाय चुनाव और चुनाव आयोग तक को सवालों के घेरे में लिया. जवाब में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस को अपने प्रदर्शन और आंतरिक राजनीति पर आत्ममंथन करने की सलाह दी है. उन्होंने खास तौर पर वार्ड परिसीमन और चुनावी परिणामों को लेकर कांग्रेस के सवालों पर पलटवार किया.
निकाय चुनाव के बाद भी सियासी घमासान जारी
निकाय चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब सिर्फ नगर निकायों तक सीमित नहीं दिख रहा. एक तरफ सरकार और भाजपा निकाय चुनाव के प्रदर्शन को आधार बनाकर आगे पंचायती राज चुनाव की तैयारी की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना रही है. यानी राजस्थान में निकाय चुनाव का परिणाम भले घोषित हो चुका हो, लेकिन उसके बाद की सियासी लड़ाई अभी जारी है, गहलोत के आरोप, भजनलाल का पलटवार और डोटासरा की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने इस लड़ाई को तीन मोर्चों पर खड़ा कर दिया है. सरकार बनाम विपक्ष, पुलिस-प्रशासन की भूमिका और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता.