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Expaliner: राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में टोंक से धौलपुर तक सियासी पारा हाई, करोड़पति प्रत्याशी मैदान में और बागी बिगाड़ेंगे दलों का खेल, जानें कैसे

राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में नामांकन वापसी के बाद मुकाबला और रोचक हो गया है. टोंक में करोड़पति प्रत्याशियों की संपत्ति और कांग्रेस के बागी उम्मीदवार चुनौती बने हैं. नीमकाथाना में दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है, जबकि धौलपुर में बागी प्रत्याशी और महिला वोटर चुनावी गणित बदल सकते हैं. कोटा में सिंधी और जाट समाज की टिकट को लेकर नाराजगी पार्टियों की चिंता बढ़ा रही है. अंता में 35 वार्डों पर 142 प्रत्याशी मैदान में हैं. कुल मिलाकर पार्टी सिंबल के साथ जातीय समीकरण, बागावत, धनबल, महिला वोट और स्थानीय मुद्दे चुनाव के नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे.

Written By Sneha Aggarwal
Published: Sep 03, 2026, 01:29 PM IST | Updated: Sep 03, 2026, 01:39 PM IST
Image Credit: राजस्थान निकाय चुनाव 2026
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Rajasthan Nikay Chunav 2026 : नामांकन वापसी के साथ ही निकाय चुनाव की बिसात पूरी तरह से बिछ चुकी है. बात टोंक, सीकर, नीमकाथाना, धौलपुर, कोटा और बारां (अंता) की करें तो इस बार का मुकाबला सिर्फ राजनीतिक दलों के बीच नहीं बल्कि बागी उम्मीदवार, जातीय समीकरण और धनबल की परीक्षा भी है. वहीं, टोंक में करोड़पति प्रत्याशियों की संपत्ति चर्चा में है और धौलपुर में महिला वोटरों की संख्या चुनावी गणित बदल सकती है यानी निकाय चुनाव की लड़ाई में सिंबल के साथ व्यक्तिगत पकड़, सामाजिक समीकरण, धनबल और स्थानीय मुद्दे भी अहम भूमिका निभाने वाले हैं.

टोंक में करोड़पति प्रत्याशियों का दबदबा
सबसे पहले बात टोंक की बात करते हैं, यहां प्रत्याशियों के शपथ पत्रों से सामने आई संपत्ति ने चुनावी चर्चा को नया मुद्दा दे दिया है. संपत्ति के मामले में कांग्रेस प्रत्याशी बीजेपी से काफी आगे नजर आ रहे हैं. कांग्रेस के 7 प्रमुख प्रत्याशियों और उनके परिजनों की घोषित कुल संपत्ति करीब 49 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि बीजेपी के 7 प्रत्याशियों और उनके परिजनों की कुल संपत्ति करीब 13.81 करोड़ रुपये है.

इनमें सबसे ज्यादा चर्चा वार्ड नंबर 17 से कांग्रेस प्रत्याशी मोहिउद्दीन निजाम की है. उनकी व्यक्तिगत घोषित संपत्ति करीब 20.57 करोड़ रुपये, जबकि परिवार की कुल संपत्ति करीब 29.31 करोड़ रुपये बताई गई है. उनके आय के स्रोतों में बीड़ी फैक्ट्री, रियल एस्टेट, कृषि और अन्य कारोबार शामिल हैं. कांग्रेस के सुनील बंसल की संपत्ति करीब 6.33 करोड़ और गायत्री चौधरी की करीब 3.20 करोड़ रुपये बताई गई है. बीजेपी में बीना जैन छामुनिया की संपत्ति करीब 2.22 करोड़ और शैलेंद्र जैन की करीब 1.84 करोड़ रुपये है. ऐसे में टोंक में सवाल सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि यह भी है कि धनबल और व्यक्तिगत प्रभाव किस प्रत्याशी के पक्ष में जाता है.

टोंक में टिकट कटने के बाद बगावत
इसी वार्ड नंबर 17 में कांग्रेस के सामने एक और चुनौती है. पूर्व पार्षद अशरफ गूंज ने टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोक दी है. अशरफ गूंज का दावा है कि उनके परिवार का कांग्रेस से पुराना राजनीतिक जुड़ाव रहा है और इस बार टिकट कटने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. उनके समर्थन में बड़ी सभा भी हुई, जिसमें युवाओं और समर्थकों की भीड़ जुटने का दावा किया गया यानी एक ही वार्ड में कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती दिखाई दे रही है-एक तरफ अधिकृत प्रत्याशी, दूसरी तरफ पार्टी से नाराज होकर मैदान में उतरे मजबूत स्थानीय चेहरे.

नीमकाथाना में हॉट सीटों पर दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
सीकर जिले के नीमकाथाना में भी कई वार्ड हॉट सीट बन चुके हैं. वार्ड नंबर 3, 17, 21, 33 और 37 में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है. वार्ड नंबर 3 में कांग्रेस के पूर्व पालिका अध्यक्ष त्रिलोक चंद दीवान के सामने बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रमोद सिंह बाजोर हैं. वार्ड नंबर 17 में कांग्रेस के पूर्व पालिका उपाध्यक्ष महेश मेगोतिया और बीजेपी के पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र गोयल के बीच मुकाबला है. वार्ड नंबर 21 में बीजेपी ने मौजूदा पार्षद शाकिर अली पर दोबारा भरोसा जताया है, जबकि कांग्रेस से ब्लॉक अध्यक्ष मदनलाल सैनी मैदान में हैं. इसी वार्ड में सैनिक कल्याण सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजोर ने बीजेपी के बोर्ड बनने का दावा किया और पार्टी के 30 सीटें जीतने की बात कही.

इस दौरान समर्थकों ने प्रेम सिंह बाजोर और बीजेपी प्रत्याशी शाकिर अली को केलों से तौलकर अपना समर्थन जताया यानी नीमकाथाना में चुनाव सिर्फ वार्ड का नहीं, बल्कि स्थानीय दिग्गजों की राजनीतिक प्रतिष्ठा का भी मुकाबला बन गया है.

धौलपुर में बागियों से बिगड़ सकता है गणित
अब बात धौलपुर की करते हैं, यहां नाम वापसी के बाद यह तय होगा कि बीजेपी और कांग्रेस अपने कितने नाराज दावेदारों को मनाने में कामयाब हुईं. पिछले निकाय चुनाव में धौलपुर नगर परिषद के 60 वार्डों में बीजेपी और कांग्रेस को 22-22 सीटें मिली थीं. 15 निर्दलीय और एक बसपा प्रत्याशी भी जीता था. किसी दल को बहुमत नहीं मिला और बोर्ड गठन में निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण रही इसलिए इस बार भी बागी और निर्दलीय प्रत्याशी बेहद महत्वपूर्ण हैं.अगर किसी वार्ड में मजबूत जनाधार वाला बागी मैदान में रहता है तो वह पार्टी के वोट बैंक में सेंध लगा सकता है और मुकाबले को सीधा होने के बजाय त्रिकोणीय या बहुकोणीय बना सकता है.

महिला वोटर बन सकते हैं गेमचेंजर
धौलपुर में चुनावी गणित का एक और अहम पहलू महिला मतदाता हैं. यहां नगर परिषद के 60 वार्डों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से करीब 12 प्रतिशत ज्यादा बताई गई है. ऐसे में सड़क, नाली, जलभराव, पेयजल, सफाई, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा जैसे स्थानीय मुद्दे महिला मतदाताओं के रुख को प्रभावित कर सकते हैं. करीबी मुकाबले में महिला वोटरों का झुकाव किसी भी प्रत्याशी की जीत-हार का अंतर बदल सकता है.

कोटा में जातीय नाराजगी से पार्टियों की चिंता बढ़ी
कोटा में बीजेपी और कांग्रेस के सामने अलग तरह की चुनौती है. यहां टिकट वितरण को लेकर सिंधी और जाट समाज की नाराजगी खुलकर सामने आई है. सिंधी समाज का आरोप है कि बीजेपी ने 100 वार्डों में समाज को केवल एक टिकट दिया. वहीं, जाट समाज का कहना है कि कांग्रेस ने 100 वार्डों में एक भी टिकट नहीं दिया. दोनों समाजों की नाराजगी सोशल मीडिया और बैठकों के जरिए सामने आ रही है. ऐसे में आज नाम वापसी के आखिरी दिन दोनों पार्टियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती डैमेज कंट्रोल की है क्योंकि टिकट वापस लेकर नया प्रत्याशी उतारने का विकल्प अब नहीं है. ऐसे में पार्टियों को नाराज समाजों और स्थानीय नेताओं को साधकर अधिकृत प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करनी होगी.

अंता में 35 वार्ड, 142 प्रत्याशी
बारां जिले के अंता में भी चुनावी रंगत तेज हो चुकी है. 35 वार्डों के लिए 142 प्रत्याशी मैदान में हैं. बीजेपी, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनाव कार्यालय खोलने और डोर-टू-डोर जनसंपर्क का सिलसिला शुरू कर दिया है. कई प्रत्याशी बुजुर्गों से आशीर्वाद लेकर चुनावी अभियान आगे बढ़ा रहे हैं. हालांकि नाम वापसी के बाद ही यह साफ होगा कि 142 में से कितने प्रत्याशी वास्तव में चुनाव मैदान में रहते हैं.

पुलिस भी अलर्ट मोड पर
निष्पक्ष और भयमुक्त मतदान (9 और 11 सितंबर) सुनिश्चित करने के लिए धौलपुर पुलिस अलर्ट मोड पर है. अफवाहों पर रोक लगाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रमुख बाजारों और संवेदनशील इलाकों में लगातार फ्लैग मार्च और पैदल गश्त की जा रही है. कुलमिलाकर निकाय चुनाव 2026 की तस्वीर ये बताती है कि ये चुनाव सिर्फ पार्टी के सिंबल पर नहीं लड़ा जा रहा है. मजबूत निर्दलीय प्रत्याशी, टिकट कटने से उपजी सामाजिक नाराजगी, करोड़पतियों का धनबल और महिला मतदाताओं के रुख के साथ तय होगा कि टोंक, सीकर, नीमकाथाना, धौलपुर, कोटा और बारां (अंता) में स्थानीय सत्ता का ताज किसके सिर सजेगा.
 

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About the Author

मैं स्नेहा अग्रवाल जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज़ पर पकड़ रखती हूं. क्राइम और कल्चर की खबरों में दिलचस्पी है. मुझे डिजिटल मीडिया का करीब 4 साल का साल का अनुभव है. इससे पहले मैं ZeeBihar में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं. 4 साल के जर्नलिज्म करियर में लोकल, क्राइम, हेल्थ, एंटरटेनमेंट, वायरल और लाइफस्टाइल बीट पर काम किया है. मैंने यहां पर राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, ऑपेरशन सिंदूर समेत कई बड़े ईवेंट्स कवर किए हैं.
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