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Monsoon Effects On Crops: इस बार कमजोर मानसून के चलते खरीफ फसल की उपज में भी कमी देखने काे मिली है. छितराई और कमजोर बारिश के चलते एक तरफ जहां बुवाई का क्षेत्रफल लक्ष्य की तुलना में काफी कम रहा. वहीं अब उपज को लेकर आए ताजा अनुमानों में भी गिरावट देखने को मिली है. राजस्थान में इस बार कमजोर मानसून के चलते बारिश की मात्रा पिछले वर्षों के औसत से 22 फीसदी कम रही है. अब कमजोर बारिश का असर खरीफ फसलों की उपज पर भी देखने को मिल सकता है. राज्य में कृषि विभाग ने खरीफ फसलों की उपज का अनुमान जारी किया है, जिसके तहत न केवल ज्वार-बाजरा, मक्का जैसी प्रमुख फसलों के उत्पादन में कमी आई है. इसके अलावा मूंग दाल, तुअर दाल सहित दालों के उत्पादन में भी कमी देखी गई है. राज्य में खरीफ फसलों की कटाई प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है. ऐसे में किसानों के घर उपज पहुंचना शुरू हो गई है. कृषि विभाग के ताजा अनुमानों के मुताबिक बाजरा की उपज इस बार पिछले साल के मुकाबले 1.34 लाख टन कम हुई है. ज्वार की उपज भी 58 हजार टन कम हो सकती है. चावल की उपज पिछले साल के लगभग बराबर ही रहेगी. वहीं मक्का की उपज 1.08 लाख टन कम होगी. मूंग की दाल की उपज में 2.34 लाख टन की कमी होने का अनुमान है. कुलमिलाकर सभी तरह खाद्यान्नों का उत्पादन पिछले साल जहां 1.11 करोड़ टन था, जबकि इस बार 1.07 करोड़ टन उपज होने का अनुमान है. यानी खाद्यान्नों के मामले में राजस्थान में करीब 4 लाख टन उपज कम हो सकती है. हालांकि इस बार सोयाबीन, मूंगफली आदि उपज में बढ़ोतरी हो सकती है. कुल ऑयल सीड्स का उत्पादन पिछले साल 39.21 लाख टन था, जो इस बार 45.11 लाख टन हो सकता है.
इतना घटा कृषि उपज का उत्पादन
- बाजरा की उपज पिछले साल 50.73 लाख टन थी
- इस बार बाजरा की उपज 49.39 लाख टन होने का है अनुमान
- ज्वार की उपज पिछले साल थी 5.50 लाख टन, इस बार 4.92 लाख टन हो सकती
- चावल की उपज पिछले साल 10.17 लाख टन, इस बार 10.20 लाख टन हो सकती
- मक्का की उपज पिछले साल 22.05 लाख टन, इस बार 20.97 लाख टन का अनुमान
- मूंग दाल पिछले साल 16.74 लाख टन, इस बार 14.40 लाख टन हो सकती
- मूंगफली का उत्पादन पिछले साल 24.65 लाख टन, इस बार 28.21 लाख टन संभव
- सोयाबीन का उत्पादन पिछले साल 10.89 लाख टन, इस बार 12.27 लाख टन संभव
- ग्वार का उत्पादन पिछले साल 17.64 लाख टन, इस बार 17.85 लाख टन होना संभव
5 लाख हैक्टेयर कम हुआ बुवाई क्षेत्रफल
आपको बता दें कि कमजोर बारिश का असर इस बार खरीफ सीजन की फसलों पर शुरू से ही रहा था. बारिश के देरी से आने की वजह से फसलों की बुवाई में भी देरी हुई और बुवाई के कुल रकबे में कमी आई. कृषि विभाग के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो पिछले साल 158.83 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफल में खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई हुई थी. जबकि इस बार 153.72 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई हो सकी थी. अकेले बाजरा का रकबा ही करीब 3 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफल घट गया था. इसके अलावा कुछ अन्य फसलों के रकबे में भी कमी देखने को मिली है. कहा जाता है कि बारिश अन्नदाता की फसल का भविष्य तय करती है, ऐसे में इस बार रही कमजोर बारिश ने अन्नदाता को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचाया है. वहीं कृषि विभाग के लिए भी अपनी बुवाई और फसल उपज के लक्ष्य को पूरा करना मुश्किल हो गया है.