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नंगे पैर, अन्न का त्याग और 54 साल पुराना ताला खुलने का इंतजार: कौन हैं BJP विधायक उदयलाल भड़ाना?

Rajasthan News: भीलवाड़ा के मांडल से BJP विधायक उदयलाल भड़ाना ने करीब सवा साल से अन्न का त्याग कर रखा है. मंदिर का ताला खुलवाने तक वे अन्न नहीं खाएंगे और जूते-चप्पल नहीं पहनेंगे. संकल्प पूरा नहीं हुआ तो चुनाव नहीं लड़ेंगे.

Written By SAGAR CHAUDHARY
Published: Oct 02, 2026, 03:18 PM IST | Updated: Oct 02, 2026, 05:09 PM IST
Image Credit: Udai Lal Bhadana On Devnarayan Mandir Bhilwara
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Bhilwara News: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की मांडल विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक उदयलाल भड़ाना पिछले करीब सवा साल से अन्न का त्याग किए हुए हैं. वे न तो अन्न खा रहे हैं और न ही पैरों में जूते-चप्पल पहन रहे हैं. विधायक ने इलाके के भगवान देवनारायण मंदिर से जुड़ी समस्या को लेकर यह संकल्प लिया है. उनका कहना है कि जब तक मंदिर के पट नहीं खुलते, तब तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे और जूते-चप्पल भी नहीं पहनेंगे. विधायक फिलहाल फल, जूस और दूध लेकर ही गुजारा कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा है कि अगर उनका संकल्प पूरा नहीं हुआ तो वे अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे.

करीब 50 साल से मंदिर पर लगा है ताला
मांडल इलाके में भगवान देवनारायण का मंदिर पिछले करीब 50 साल से बंद है. विधायक उदयलाल भड़ाना ने मंदिर के पट खुलवाने को लेकर यह कठोर संकल्प लिया है. इसके तहत उन्होंने अपनी कई सुख-सुविधाएं छोड़ दी हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनका संकल्प अन्न त्यागने, नंगे पैर रहने और बाल-दाढ़ी नहीं कटवाने से जुड़ा है.

1970 के विवाद के बाद बंद हुआ मंदिर
विधायक के मुताबिक, साल 1970 में मंदिर की जमीन को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद हुआ था. इसके बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर मंदिर के दरवाजे पर ताला लगा दिया था. इसके बाद मंदिर को खोलने का मामला लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया में रहा.

भीलवाड़ा के मांडल कस्बे के सदर बाजार स्थित धार्मिक स्थल को लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है. हिंदू पक्ष इसे देवनारायण मंदिर, जबकि मुस्लिम पक्ष मिट्ठू शाह की दरगाह बताता है. विवाद के चलते 1977 से यह स्थल प्रशासनिक रिसीवरी में है और यहां ताला लगा हुआ है. दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग स्तर पर कानूनी दावे किए गए हैं, वहीं मुस्लिम पक्ष ने मामले को वक्फ बोर्ड के समक्ष भी उठाया है. इधर, गुर्जर समाज के कुछ नेताओं की ओर से सोशल मीडिया पर लगातार इस मुद्दे को लेकर पोस्ट और वीडियो सामने आने से मामला फिर चर्चा में बना हुआ है.

विधायक का कहना है कि इस मामले में साल 2000 में भीलवाड़ा कोर्ट और 2010 में मांडल कोर्ट के फैसले आए थे. उनके अनुसार, इन फैसलों में मंदिर को हिंदू और गुर्जर समाज का देवरा बताया गया और इसे वक्फ संपत्ति नहीं माना गया. विधायक का आरोप है कि इसके बावजूद कुछ लोगों ने इसे वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताते हुए मामला ट्रिब्यूनल में पहुंचाया. वहीं, उनके मुताबिक राजस्व रिकॉर्ड में जमीन राजस्थान सरकार के नाम आबादी भूमि के तौर पर दर्ज है.

जनता से किया था मंदिर खुलवाने का वादा
उदयलाल भड़ाना का कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान मांडल की जनता ने उनसे मंदिर खुलवाने की उम्मीद जताई थी. जनता से किए इसी वादे को पूरा करने के लिए उन्होंने यह संकल्प लिया. इस मुद्दे को लेकर विधायक मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से भी मुलाकात कर चुके हैं. बता दें कि इस संकल्प को पूरा करने के दौरान विधायक भड़ाना का अभी तक तकरीबन 22 किलो वजन कम हो चुका है. विधायक के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि संविधान और कानून के दायरे में रहते हुए इस समस्या का जल्द समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी.

अन्न ना खाने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?
लंबे समय तक अन्न यानी सामान्य भोजन नहीं लेने से शरीर को पर्याप्त कैलोरी, प्रोटीन, वसा, फाइबर और कई जरूरी विटामिन-मिनरल नहीं मिल पाते, जिससे वजन कम होना, कमजोरी, थकान और मांसपेशियों पर असर पड़ने का खतरा रहता है. अगर कोई व्यक्ति सिर्फ दूध, फल और जूस पर निर्भर है तो इससे कुछ पोषक तत्व और ऊर्जा जरूर मिल सकती है, लेकिन यह सामान्य संतुलित आहार का पूरा विकल्प नहीं माना जाता. खासकर फल और जूस में प्रोटीन की मात्रा कम होती है, जबकि लंबे समय तक शरीर को पर्याप्त प्रोटीन और दूसरे पोषक तत्व नहीं मिलने पर कुपोषण का खतरा बढ़ सकता है. ज्यादा जूस लेने से शुगर की मात्रा भी बढ़ सकती है. इसलिए लंबे समय तक इस तरह का सीमित आहार लेने वाले व्यक्ति में पोषण की कमी, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की निगरानी जरूरी होती है.

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सागर चौधरी, अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं.सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
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