4 करोड़ के चांदी के सिक्के खरीदकर फंसा कॉन्फेड! पटाखों पर 70% छूट का ऑफर
राजस्थान सहकारिता विभाग के उपक्रम कॉन्फेड के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है. चांदी की कीमतों में भारी गिरावट से करीब 4 करोड़ रुपये के चांदी के सिक्कों के स्टॉक पर संभावित नुकसान का खतरा है. ये सिक्के 20-25 दिन पहले ऊंचे भाव पर खरीदे गए थे.
सहकारिता विभाग के उपक्रम कॉन्फेड के सामने इन दिनों दो अलग-अलग तस्वीरें हैं. एक तरफ चांदी की कीमतों में भारी गिरावट के बाद करीब 4 करोड़ रुपये के चांदी के सिक्कों की खरीद घाटे का सौदा साबित होने की आशंका है. वहीं, दूसरी तरफ कॉन्फेड के दीपोत्सव मेले में ग्राहकों को ब्रांडेड पटाखों पर 70 फीसदी तक की छूट मिल रही है.
20-25 दिन पहले खरीदे 4 करोड़ के चांदी के सिक्के
चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने कॉन्फेड के सिक्का कारोबार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. जानकारी के अनुसार, कॉन्फेड ने करीब 20 से 25 दिन पहले तक लगभग 4 करोड़ रुपये के चांदी के सिक्के खरीदे थे. ये सिक्के MMTC के थे, जिन्हें कॉन्फेड ने बाजार में बिक्री के लिए उतारा था. जिस समय सिक्कों की खरीद की गई, उस दौरान चांदी के भाव काफी ऊंचे थे. अब कीमतों में बड़ी गिरावट के चलते इन सिक्कों के स्टॉक की मौजूदा कीमत खरीद मूल्य से कम होने की आशंका है.
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ऐसे में कॉन्फेड को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है. हालांकि वास्तविक नुकसान का आकलन सिक्कों की खरीद दर, मौजूदा बाजार मूल्य और बिक्री के आधार पर ही हो सकेगा. कॉन्फेड सहकारिता विभाग का उपक्रम है, इसलिए इस खरीद को लेकर जवाबदेही का सवाल भी महत्वपूर्ण है.
दीपोत्सव मेले में ब्रांडेड पटाखों पर 70% तक छूट
दूसरी तरफ कॉन्फेड के दीपोत्सव मेले में ग्राहकों को आतिशबाजी पर बड़ी राहत मिल रही है. मेले में ब्रांडेड पटाखों पर 70 फीसदी तक की छूट दी जा रही है. कॉन्फेड ने इस बार करीब 2 करोड़ रुपये के पटाखे बेचने का लक्ष्य रखा है.
मेले में पटाखों की जमाखोरी रोकने के लिए बेरियर लगाए गए हैं. इसके अलावा खरीदारी की सीमा भी तय की गई है. एक ग्राहक अधिकतम 12 हजार रुपये तक के पटाखे खरीद सकता है. इस व्यवस्था का उद्देश्य अधिक से अधिक ग्राहकों तक पटाखे पहुंचाना और जमाखोरी पर रोक लगाना है.
एक तरफ संभावित घाटा, दूसरी तरफ बिक्री का लक्ष्य
कॉन्फेड के सामने एक ओर चांदी के सिक्कों की खरीद से संभावित नुकसान की चुनौती है, तो दूसरी ओर दीपोत्सव मेले में 2 करोड़ रुपये की बिक्री का लक्ष्य हासिल करने की जिम्मेदारी है. चांदी के भाव में गिरावट से ग्राहकों को राहत जरूर मिली है, लेकिन ऊंचे भाव पर खरीदे गए सिक्कों का स्टॉक कॉन्फेड के लिए चिंता का विषय बन सकता है.