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राजस्थान में कमजोर मानसून की मार, दो महीने में बांधों में पहुंचा सिर्फ 13 फीसदी पानी

Jaipur News: राजस्थान में दो महीने मानसून फीका रहा, जिसका असर पर जल स्त्रोतों पर दिखाई दे रहा है. प्रदेश के बांधों की तस्वीर ठीक नहीं है क्योंकि पिछले साल के मुकाबले बांधों में पानी की मात्रा बहुत कम है. आखिरकार राजस्थान के बांधों में पेयजल और कृषि के लिए कितना पानी बचा है, चलिए बताते हैं आपको?

Written By Pragati Pant Awasthi
Published: Aug 29, 2026, 04:49 PM IST | Updated: Sep 04, 2026, 01:11 PM IST
Image Credit: राजस्थान में मानसून की बेरूखी
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Jaipur News: मरूधरा में मानसून की रफ्तार धीमी है. दो महीने से मानसून फीका है. अगस्त में भी बारिश ना के बराबर है, जिसका असर अब बांधों में दिखाई दे रहा है. मानसून के बीच बांधों में पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में कम है. जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के 693 बांधों की कुल क्षमता 13,029 MCM है, वहीं, इनमें वर्तमान जलभराव 7,517 MCM यानी 57.70% है. पिछले साल इन्ही बांधों में 10,805 MCM पानी था, जो कुल क्षमता का 82.94% था. यानी इस साल बांधों में करीब 3,288 MCM पानी, बांध में जलभराव 25.24 प्रतिशत कम है.

24 घंटे में 22.44 MCM पानी बढ़ा
आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में प्रदेश के बांधों में कुल 22.44 MCM पानी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वहीं 15 जून को बांधों में 44.46% पानी था. यानी मानसून के दौरान बांधों में सिर्फ करीब 13.24 प्रतिशत की पानी आया.

199 बांध खाली, 437 आंशिक भरे
विभाग के अनुसार, प्रदेश के 693 बांधों में 199 बांध खाली हैं, वहीं, 437 बांध आंशिक रूप से भरे हुए हैं. सिर्फ 57 बांध ही पूरी तरह भरे हैं. इनमें 4.25 MCM से अधिक क्षमता वाले 286 बांधों में 51 खाली, 210 आंशिक और 25 पूरी तरह भरे हैं. 4.25 MCM से कम क्षमता वाले 407 बांधों में 148 खाली, 227 आंशिक और 32 पूरी तरह भरे हैं.

पिछले साल की तुलना में भारी गिरावट
पिछले साल (2025) राजस्थान में रिकॉर्ड तोड़ (सामान्य से 64% ज्यादा) बारिश हुई थी, जिससे कई जगहों पर बाढ़ जैसे हालात बन गए थे. उसकी तुलना में इस साल मानसून सीजन के दौरान लगभग 55% कम बारिश आंकी गई है.

जोधपुर, कोटा, उदयपुर और जयपुर संभागों में सामान्य से लगभग 10% से 23% तक कम बारिश रिकॉर्ड हुई है. पाली, जालोर और बांसवाड़ा संभागों में हालात अधिक चिंताजनक हैं, जहां बारिश में 40% से 50% तक की कमी दर्ज की गई है. जून महीने की शुरुआत (वेस्टर्न डिस्टरबेंस के प्रभाव से) में सामान्य से काफी ज्यादा बारिश दर्ज हुई थी, लेकिन मुख्य मानसून सीजन के दौरान बारिश कमजोर पड़ गई, जिससे कई जिलों में फसलों और पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है. 

आपको बता दें कि पूरे राजस्थान में 1 सितंबर तक सामान्य से 20 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है. अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती, तो किसानों के लिए खरीफ की फसलों को बचाना और आगामी रबी सीजन की बुवाई करना बेहद मुश्किल हो जाएगा. इसके साथ ही ग्रामीण और शहरी इलाकों में भविष्य में पीने के लिए पानी का भी संकट खड़ा हो सकता है.

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मीडिया की दुनिया में 18 साल का सफर... एंकरिंग से लेकर डिजिटल की स्क्रीन तक, हर नया बदलाव दिल से अपनाया, जो सोचती हूं, वही कहती हूं, बातों को घुमाना मेरी आदत नहीं, दिल की बात जुबां पर रखना पहचान है. फिलहाल 'ज़ी राजस्थान डिजिटल' के साथ सफर जारी है और हर दिन कुछ नया सीखने की ललक बरकरार है और रहेगी. Pragati.Pant@india.com ईमेल के जरिए आप संपर्क कर सकते हैं.
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