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राजस्थान के 1 करोड़ ग्रामीणों के लिए बड़ी खबर! अब हर व्यक्ति को मिलेगा 55 लीटर पानी

Rajasthan News: राजस्थान में जल जीवन मिशन की O&M पॉलिसी लागू हो गई है. 1.07 करोड़ ग्रामीण उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा. गांवों में पानी की सप्लाई, रखरखाव, गुणवत्ता और शुल्क वसूली की जिम्मेदारी तय होगी.

Edited By SAGAR CHAUDHARY
Published: Aug 25, 2026, 06:53 PM IST | Updated: Aug 25, 2026, 07:04 PM IST
Image Credit: JJM News O&M Policy
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JJM O&M Policy: राजस्थान में जल जीवन मिशन में आखिरकार ओएंडएम पॉलिसी लागू हो गई. गांवों में जेजेएम के तहत पेयजल सप्लाई के लिए पॉलिसी को सरकार ने लागू कर दिया. पेयजल योजनाओं के लिए संचालन संधारण के लिए दिशा निर्देश जारी कर दिए. जिसके तहत अब गांवों में पेयजल सप्लाई होगी.

1 करोड़ पेयजल उपभोक्ताओं के लिए खबर
राजस्थान के 1 करोड 7 लाख ग्रामीणों के लिए पेयजल ओएंडएम पॉलिसी लागू हो गई. राज्य सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी किया,जिसके बाद पीएचईडी प्रमुख सचिव हेमंत गेरा ने अधिसूचना जारी की. अधिसूचना जारी होते ही गांव ढाणियों में पेयजल की नीति लागू हो गई.

नीति का दायरा राजस्थान की सभी ग्रामीण पेयजल योजनाओं पर रहेगा. इसमें एकल ग्राम योजना (SVS), बहुग्राम योजना (MVS), बल्क वाटर सप्लाई योजना (BWS), आरओ प्लांट, सौर ऊर्जा आधारित नलकूप और सौर ऊर्जा आधारित डी-फ्लोराइडेशन यूनिट शामिल हैं. ग्राम पंचायत और ग्राम जल स्वच्छता समिति (VWSC) को गांव की पेयजल व्यवस्था के संचालन रखरखाव के लिए विकेंद्रीकृत इकाई के रूप में काम करना होगा. जल जीवन मिशन के तहत बनी योजनाओं के साथ पहले से मौजूद नलकूप, पंप हाउस, फिल्टर प्लांट, आरओ प्लांट और अन्य संसाधन भी व्यवस्था के तहत लिए जाएंगे.

ये समितियां बनाई गई
बहुग्राम योजनाओं में गांवों की सीमा तक बल्क पानी की आपूर्ति और ट्रांसमिशन व्यवस्था की जिम्मेदारी PHED तथा राजस्थान जल आपूर्ति एवं सीवरेज निगम (RWSSC) की रहेगी. वहीं गांव के भीतर की आधारभूत व्यवस्था ग्राम पंचायत और VWSC संभालेंगी. इससे गांव के स्तर पर पानी की रोजाना आपूर्ति, पंप संचालन, पाइपलाइन, वाल्व और स्टैंड पोस्ट का रखरखाव तथा पानी की गुणवत्ता की निगरानी की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर तय होगी. नीति में पांच से छह ग्राम पंचायतों को मिलाकर क्लस्टर समितियां बनाने का प्रावधान है. इन समितियों में PHED के कनिष्ठ अभियंता, VWSC प्रतिनिधि, पंचायती राज विभाग के तकनीकी अधिकारी, नल जल मित्र, स्वयं सहायता समूह के प्रतिनिधि और PHED/RWSSC द्वारा नियुक्त कनिष्ठ तकनीकी पर्यवेक्षक शामिल होंगे. क्लस्टर स्तर पर योजनाओं के संचालन, रखरखाव, मरम्मत, राजस्व वसूली, तकनीकी सहायता, वित्तीय निगरानी, जल गुणवत्ता और शिकायत निवारण की निगरानी होगी.

गुणवत्ता के लिए मानकों का पालन जरूरी
ब्लॉक स्तर पर PHED की O&M,सपोर्ट टीम क्लस्टर और VWSC की तकनीकी निगरानी करेगी. जिला स्तर पर जिला जल एवं स्वच्छता मिशन (DWSM) समग्र क्रियान्वयन की निगरानी करेगा, जबकि जिला तकनीकी इकाई (DTU) को ग्रामीण पेयजल योजनाओं की तकनीकी और परिचालन व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है. DTU, PHED की विस्तारित तकनीकी शाखा के रूप में काम करेगी और तकनीकी, संचालन संबंधी मामलों में DWSM को रिपोर्ट करेगी.पानी की गुणवत्ता के लिए मानकों का पालन जरूरी होगा. नियमित क्लोरीनेशन, फील्ड टेस्ट किट से जांच और प्रदूषित पानी की स्थिति में निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार तत्काल कार्रवाई का प्रावधान है. नीति में हर ग्रामीण परिवार के प्रत्येक सदस्य को प्रतिदिन कम से कम 55 लीटर शुद्ध पानी उपलब्ध कराने का सेवा मानक तय किया गया है.वित्तीय स्थिरता के लिए उपभोक्ताओं से मासिक जल प्रभार वसूला जाएगा. VWSC को बिल वितरण और राशि संग्रह की जिम्मेदारी दी गई है. प्राप्त राशि का उपयोग पंप, वाल्व ऑपरेटर, नल जल मित्र का मानदेय, पाइपलाइन रखरखाव और पेयजल योजना से जुड़े अन्य खर्चों में किया जाएगा. राशि के लेनदेन के लिए अलग Escrow बैंक खाता रखने तथा रिकॉर्ड और वित्तीय लेखे संधारित करने का प्रावधान है. लगातार 11 माह मासिक जल प्रभार जमा करने वाले उपभोक्ता को एक माह के प्रभार की छूट प्रोत्साहन के रूप में दी जा सकेगी.

एक वर्ष तक ‘हैंड होल्डिंग’ सहायता देगा
जल दुरुपयोग, पानी की चोरी, अवैध कनेक्शन, पेयजल व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने पर पहले समझाइश और चेतावनी दी जाएगी. दोबारा उल्लंघन होने पर निर्धारित जुर्माना, जल संबंध विच्छेद और जरूरत पड़ने पर आपराधिक रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई की जा सकेगी.योजना के हस्तांतरण के बाद PHED ग्राम पंचायत और VWSC को एक वर्ष तक ‘हैंड होल्डिंग’ सहायता देगा. इसके बाद भी आवश्यकता के अनुसार तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. नीति को PHED के अधीन सभी ग्रामीण पेयजल योजनाओं के साथ RWSSC पर भी लागू किया जाएगा और कार्य निष्पादन, समीक्षा के आधार पर इसमें हर पांच वर्ष में या आवश्यकता के अनुसार संशोधन किया जा सकेगा.

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About the Author

सागर चौधरी, अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं.सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
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