प्रोबेशन पीरियड वाले कर्मचारियों के लिए राहत: अब तबादला और रिलीविंग रोकना नहीं होगा आसान, जानें कोर्ट का नया आदेश
Jodhpur News: राजस्थान हाईकोर्ट ने साफ किया कि प्रोबेशन पीरियड में भी सरकारी कर्मचारियों का तबादला किया जा सकता है. कोर्ट ने गोविंद के तबादले पर अमल करते हुए उन्हें बालोतरा से कार्यमुक्त कर शेरगढ़ में जॉइनिंग देने का निर्देश दिया.
Jodhpur News: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ किया है कि प्रोबेशन पीरियड यानी परिवीक्षा काल के दौरान भी कर्मचारी का एक स्थान से दूसरे स्थान पर तबादला किया जा सकता है. हाईकोर्ट ने माना कि राजस्थान सेवा नियम, 1951 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो प्रोबेशनर कर्मचारियों के तबादले या उन्हें कार्यमुक्त करने पर रोक लगाता हो.
कनिष्ठ सहायक के तबादले से जुड़ा है मामला
यह मामला कनिष्ठ सहायक के पद पर चयनित गोविंद से जुड़ा है, जो शेरगढ़, जोधपुर के निवासी हैं. गोविंद दो साल के प्रोबेशन पीरियड पर बालोतरा जिला कलेक्टर कार्यालय में कार्यरत थे. 10 जुलाई 2026 को उनका तबादला उपखंड अधिकारी कार्यालय, शेरगढ़, जोधपुर कर दिया गया था. तबादला आदेश जारी होने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें नए कार्यस्थल के लिए कार्यमुक्त करने से इनकार कर दिया.
अधिकारियों ने किस आधार पर रोका रिलीविंग
अधिकारियों की ओर से तर्क दिया गया कि आदेश के नोट नंबर 3 के तहत प्रोबेशन पीरियड पर चल रहे कर्मचारियों को स्थानांतरित स्थान के लिए रिलीव नहीं किया जा सकता. इसी आधार पर गोविंद को बालोतरा से कार्यमुक्त नहीं किया गया. इसके बाद उन्होंने न्यायिक रास्ता अपनाया.
एकलपीठ के आदेश के बाद खंडपीठ में अपील
गोविंद की ओर से पहले हाईकोर्ट की एकलपीठ के समक्ष याचिका दायर की गई थी, लेकिन याचिका खारिज कर दी गई. इसके बाद उन्होंने एकलपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए खंडपीठ में विशेष अपील दायर की. मामले की सुनवाई न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर और न्यायाधीश चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने की.
वकील ने मोनिका मामले की नजीर का दिया हवाला
याचिकाकर्ता के वकील मनोज बोहरा ने सुनवाई के दौरान ''मोनिका बनाम राजस्थान राज्य'' मामले की नजीर का हवाला दिया. उन्होंने तर्क दिया कि सेवा नियमों के विपरीत प्रोबेशनर कर्मचारियों के स्थानांतरण पर इस तरह की शर्त लगाना मनमाना है. मामले में इसी आधार पर याचिकाकर्ता के तबादला आदेश पर अमल किए जाने की मांग की गई.
हाईकोर्ट ने एकलपीठ का आदेश किया रद्द
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को रद्द कर दिया. कोर्ट ने साफ किया कि राजस्थान सेवा नियम, 1951 में प्रोबेशनर कर्मचारी के तबादले या उसे कार्यमुक्त करने पर रोक लगाने वाला कोई प्रावधान नहीं है. इस आधार पर कोर्ट ने राज्य सरकार को 10 जुलाई 2026 को जारी तबादला आदेश पर तुरंत अमल करने का निर्देश दिया.
गोविंद को शेरगढ़ में जॉइनिंग की अनुमति
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता गोविंद को बालोतरा से कार्यमुक्त किया जाए और उन्हें उपखंड अधिकारी कार्यालय, शेरगढ़ में जॉइनिंग की अनुमति दी जाए. इस फैसले के साथ कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि केवल प्रोबेशन पीरियड में होने के आधार पर कर्मचारी के तबादले के आदेश पर रोक नहीं लगाई जा सकती.