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मारपीट के 30 साल पुराने केस में फैसला: हाईकोर्ट ने दोषी को दिया परिवीक्षा का लाभ, 2 साल तक इन शर्तों का करना होगा पालन

Rajasthan High Court: राजस्थान हाईकोर्ट ने करीब 30 साल पुराने मारपीट मामले में मांगीलाल को गंभीर चोट पहुंचाने के आरोप में दोषी करार दिया है. कोर्ट ने उसे जेल भेजने के बजाय दो साल तक शांति और सदाचार बनाए रखने की शर्त पर परिवीक्षा का लाभ दिया.

Written ByAman Singh
Published: Oct 13, 2026, 11:26 PM IST|Updated: Oct 13, 2026, 11:31 PM IST
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मारपीट के 30 साल पुराने केस में फैसला: हाईकोर्ट ने दोषी को दिया परिवीक्षा का लाभ, 2 साल तक इन शर्तों का करना होगा पालन
Image Credit: Zee Media

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Aman Singh

Aman Singh

जून 2023 से ज़ी राजस्थान के साथ कार्यरत अमन लगातार अपनी क्रिएटिविटी और प्रोफेशनल स्किल्स के जरिए पाठकों तक तेज, सटीक और भरोसेमंद खबरें पहुंचा रहे हैं. वे उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं, अमन ने जौनपुर से ही अपनी इंटरमीडिएट तक की शिक्षा पूरी की. इसके बाद उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया. डिजिटल पत्रकारिता में गहरी समझ, तेज खबर पकड़ने की क्षमता के कारण अमन सिंह एक उभरते हुए और भरोसेमंद मीडिया प्रोफेशनल के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहे हैं.
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Rajasthan High Court: राजस्थान हाईकोर्ट ने करीब 30 साल पुराने मारपीट के मामले में फैसला सुनाते हुए निचली कोर्ट के निर्णय में आंशिक बदलाव किया है. हाईकोर्ट जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने आरोपी मांगीलाल को साधारण चोट पहुंचाने के आरोप से बरी रखा, लेकिन गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में उसकी दोषमुक्ति को निरस्त करते हुए दोषी करार दिया.

कोर्ट ने जेल भेजने के बजाय परिवीक्षा का दिया लाभ

घटना के लंबे समय बाद फैसला आने और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी को जेल भेजने के बजाय परिवीक्षा का लाभ दिया है. मामला 6 अक्टूबर 1996 का है. अभियोजन के अनुसार, मांगीलाल ने गोपालदास के साथ लाठी और लात-घूंसों से मारपीट की थी.

घटना में गोपालदास को कई चोटें आई थीं, जिनमें फ्रैक्चर भी शामिल था. मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 17 नवंबर 1998 को गवाहों के बयानों में अंतर के आधार पर आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 325 के आरोपों से बरी कर दिया था.

राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई

राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने माना कि निचली कोर्ट ने गवाहों के बयानों में मौजूद छोटी विसंगतियों को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया. घायल के बयान और चिकित्सकीय साक्ष्य मारपीट की घटना की पुष्टि करते हैं. कोर्ट ने धारा 325 के तहत आरोपी को दोषी ठहराते हुए दो वर्ष तक शांति और सदाचार बनाए रखने की शर्त पर परिवीक्षा का लाभ दिया.

घायल को मुआवजा देने का निर्देश

कोर्ट ने आरोपी को 2 हजार रुपए का शांति बंधपत्र भरने और घायल गोपालदास को तीन महीने के भीतर 50 हजार रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया. आरोपी को चार सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में उपस्थित होकर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी.

क्या होती है परिवीक्षा ?

परिवीक्षा का मतलब है कि अदालत दोषी ठहराए गए व्यक्ति को तुरंत जेल भेजने के बजाय कुछ शर्तों के साथ समाज में रहने का मौका देती है. इस दौरान उसे अच्छे व्यवहार और शांति बनाए रखने जैसी शर्तों का पालन करना होता है. शर्तों का उल्लंघन करने पर अदालत उसके खिलाफ आगे कार्रवाई कर सकती है. इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने मांगीलाल को दो साल तक शांति और सदाचार बनाए रखने की शर्त पर परिवीक्षा का लाभ दिया है.

Reporter- Rakesh Kumar Bhardwaj

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