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बारिश के दिनों में हिंडौन शहर के प्रमुख बाजारों और रिहायशी इलाकों में होने वाला भीषण जलभराव यहां के बाशिंदों और व्यापारियों के लिए एक गहरा नासूर बन चुका है. जल निकासी नहीं होने से शहरवासियों ने पिछले दिनों सड़कों पर नाव चलने और दुकानों में पानी घुसने जैसी त्रासदी झेली है. लगातार पानी भरे रहने से शहर की सड़कें भी टूटकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं. हालांकि, राज्य सरकार द्वारा ड्रेनेज सिस्टम के लिए स्वीकृत 71 करोड़ रुपये के बजट से जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान होने की उम्मीद जगी है.
हिण्डौन शहर के कटरा बाजार, सराफा बाजार, डेम्प रोड, मंडावरा रोड, मोहन नगर, स्टेशन रोड और बयाना रोड सहित अन्य इलाकों में थोड़ी सी बारिश के दौरान ही हालात पूरी तरह बेकाबू हो जाते हैं. बारिश का गंदा पानी कटरा बाजार और सराफा बाजार की दुकानों के अंदर तक घुस जाता है, जिससे हर साल व्यापारियों का करोड़ों रुपए का माल खराब हो जाता है. इसके अलावा हिंडौन के जिला अस्पताल में जरा सी बारिश में जलभराव हो जाता है, जिससे मरीजों व तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. सरकारी विभागों, विद्यालयों, नगर परिषद और सीनियर सेकेंडरी विद्यालय के सामने वाली मुख्य बाजार की सड़क के साथ-साथ शीतला चौराहे पर भी जलभराव इतना अधिक होता है कि लोगों का पैदल निकलना तक मुश्किल हो जाता है.
इस भीषण त्रासदी के कई कारण हैं. शहर का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह खराब हो चुका है. कई कॉलोनियों में नालियां बनी ही नहीं हैं और जहां बनी हैं, वहां सफाई नहीं होती. स्टेशन रोड पर नालियों की कनेक्टिविटी बड़े नाले से नहीं होने के कारण पानी सड़क और दुकानों में भरा रहता है. इसके अलावा कई स्थानों पर सड़क के ऊपर नई सड़क बनने से मकान और दुकानें सड़क के लेवल से नीचे चले गए हैं, जिससे बारिश का पानी सीधे अंदर घुस जाता है.
पूर्व में न्यायालय के आदेश पर संवेदक (ठेकेदार) द्वारा वाटर लेवल का ध्यान रखे बिना ही नाले का पक्का निर्माण कर दिया गया था. इसके ऊपर आरसीसी (RCC) का पटाव कर दिए जाने से अंदर भारी मात्रा में कचरा जमा हो गया और निकासी पूरी तरह ठप्प पड़ गई. सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि इस नाले पर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर चेंबर बने हैं, जो पूरी तरह से खुले पड़े हैं. इन खुले चेंबरों में आए दिन लोग और बेजुबान पशु गिरकर घायल हो रहे हैं. स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2 वर्ष पूर्व इन्हीं खुले नालों में दो-तीन लोगों के शव भी मिले थे.
इस गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए व्यापारिक संगठनों ने दर्जनों बार सरकार के मंत्रियों और विधायकों को ज्ञापन सौंपकर गुहार लगाई थी, जिसके परिणामस्वरूप अब राजस्थान सरकार ने 71 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया है. इसके टेंडर हो चुके हैं. शहर के लोगों और व्यापारियों की अब सरकार से यही मांग है कि इस बार निर्माण कार्य में "वाटर लेवल" का विशेष ध्यान रखा जाए और पूरे शहर के पानी की निकासी के लिए एक ऐसा मजबूत ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाए, जिससे जलभराव की समस्या से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके.
नगर परिषद हिंडौन के नवनियुक्त उपसभापति विक्रम सिंह तोमर ने इस मामले को लेकर कहा कि जलभराव को लेकर हमारे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के द्वारा हिंडौन के लिए जो 71 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है, उसके बहुत जल्द वर्क ऑर्डर जारी होने वाले हैं. हमने भी संपर्क किया है, संभवत: अगले महीने तक वर्क ऑर्डर जारी हो जाएंगे.
उन्होंने अपनी प्राथमिकता स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारा, सभापति और हमारे सभी पार्षदों का एक ही विजन है कि इस 71 करोड़ को सही ढंग से धरातल पर उतारा जाए.
सरकार ने जिस उद्देश्य से यह बजट दिया है, उसे पूरी तरह से इस तरह लगाया जाए कि हिंडौन की यह जलभराव की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो और आमजन को पूरी तरह निजात मिले. मेरा मानना है कि जब हम इस 71 करोड़ रुपए को जल्दी से जल्दी धरातल पर लगवाने में सफल हो जाएंगे, तो वास्तव में ही हिंडौन अपने आप में जगमगा उठेगा.