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जोधपुर में 3 फायरकर्मियों की मौत के बाद जागा सिस्टम: बिना ट्रेनिंग-PPE आग में नहीं उतारे जाएंगे फायर फाइटर

Rajasthan News: जोधपुर में आग बुझाने के दौरान तीन फायरकर्मियों की मौत के बाद राजस्थान के स्वायत्त शासन विभाग ने फायरकर्मियों की सुरक्षा को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं. अब बिना निर्धारित ट्रेनिंग और जरूरी PPE के कर्मचारियों को फायर फाइटिंग में नहीं भेजा जाएगा. साथ ही आग की प्रकृति और जोखिम के अनुसार सुरक्षा संसाधन मुहैया कराने को कहा गया है.

जोधपुर में 3 फायरकर्मियों की मौत के बाद जागा सिस्टम: बिना ट्रेनिंग-PPE आग में नहीं उतारे जाएंगे फायर फाइटर
Image Credit: Zee Media

Rajasthan News: आग बुझाने वाले ही सुरक्षित नहीं, तो शहर को आग से कौन बचाएगा. जोधपुर में आग बुझाने गए तीन फायरकर्मियों की मौत के बाद स्वायत्त शासन विभाग ने आदेश निकाला है कि बिना ट्रेनिंग और PPE के किसी कर्मचारी को आग में नहीं उतारा जाए, लेकिन इस आदेश ने व्यवस्था पर ही बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या अब तक बिना पर्याप्त ट्रेनिंग के फायरकर्मियों को आग बुझाने भेजा जा रहा था और जब फायर स्टेशनों पर PPE किट पर्याप्त नहीं, हेलमेट-ग्लव्स पुराने हैं और आग की प्रकृति के मुताबिक सुरक्षा संसाधन तक पूरे नहीं हैं, तो सिर्फ आदेश से फायरकर्मी कितना सुरक्षित हो जाएगा. जोधपुर हादसे के बाद निकले आदेश ने समाधान के साथ सिस्टम की कमियां भी सामने ला दी हैं.

जोधपुर में अग्निशमन के दौरान हुए हादसे ने प्रदेश के नगरीय निकायों में फायरकर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, तो अब स्वायत्त शासन विभाग ने नियमों की फायर लाइन खींच दी है. अब बिना निर्धारित फायर ट्रेनिंग और जरूरी डिप्लोमा या प्रमाण-पत्र वाले कर्मचारी को सीधे आग बुझाने के काम में नहीं उतारा जा सकेगा. वहीं फायर फाइटिंग पर रवाना करने से पहले कर्मचारी के पास जरूरी पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) होना अनिवार्य होगा.

विभाग ने प्रदेश के नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं के लिए इस संबंध में आदेश जारी किया है. आदेश में फायर फाइटिंग के दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा, प्रशिक्षण और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निकायों पर डाली गई है, लेकिन अब यही आदेश कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है. फायर स्टेशनों पर यदि पर्याप्त PPE किट ही नहीं हैं, ग्लव्स और हेलमेट पुराने हैं और आग की अलग-अलग प्रकृति के हिसाब से जरूरी सुरक्षा संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, तो केवल आदेश निकालने से जमीन पर फायरकर्मी की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी.

PPE ही नहीं तो आदेश की पालना कैसे

स्वायत्त शासन विभाग के आदेश में फायर सूट, ड्रेस, हेलमेट, ग्लव्स, सेफ्टी शूज-बूट, सुरक्षात्मक चश्मे, फेस प्रोटेक्शन सहित काम की प्रकृति के मुताबिक, सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की बात कही गई है. यहां तक कहा गया है कि जरूरी पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) के बिना कर्मचारी को फायर फाइटिंग में नहीं भेजा जाए. यहीं सवाल खड़ा होता है, जिन फायर स्टेशनों पर पर्याप्त और मानक PPE उपलब्ध नहीं हैं, वहां आग लगने की सूचना आने पर क्या होगा. फायरकर्मी बिना पूरे सुरक्षा उपकरणों के जाएगा या संसाधन आने तक आग बुझाने का काम रुकेगा.

अब तक बिना ट्रेनिंग वाले बुझा रहे थे आग

आदेश का सबसे चौंकाने वाला पहलू प्रशिक्षण को लेकर है. अब स्पष्ट निर्देश देना पड़ा है कि निर्धारित फायर ट्रेनिंग और जरूरी डिप्लोमा, प्रमाण-पत्र नहीं रखने वाले कर्मचारियों को अग्निशमन और प्रत्यक्ष फायर फाइटिंग में नहीं लगाया जाए. इससे सवाल उठता है क्या प्रदेश के निकायों में अब तक बिना निर्धारित प्रशिक्षण या योग्यता वाले कर्मचारियों को भी आग बुझाने के लिए भेजा जा रहा था.

दूसरी ड्यूटी पर प्रशिक्षित फायरमैन

आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रशिक्षित और डिप्लोमाधारी फायरकर्मियों की सेवाएं मूल रूप से अग्निशमन कार्य में ली जाएं. दूसरी ड्यूटी लगाने पर यह सुनिश्चित किया जाए कि फायर ब्रिगेड की उपलब्धता और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रभावित नहीं हो. यह निर्देश भी मौजूदा व्यवस्था पर सवाल छोड़ता है. क्या प्रशिक्षित फायरकर्मियों को लिपिकीय या दूसरे कामों में लगाकर फायर स्टेशनों पर दूसरे कर्मचारियों से काम कराया जा रहा था.

आग की 'प्रकृति' अब क्यों याद आई

आदेश में कहा गया है कि फायरकर्मी को घटनास्थल पर भेजने से पहले आग की प्रकृति, जोखिम के प्रकार और संभावित खतरे को देखते हुए जरूरी सुरक्षा संसाधन उपलब्ध कराए जाएं. इस निर्देश ने पुरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या अब तक हर आग से एक ही तरीके से लड़ा जा रहा था. केमिकल, इलेक्ट्रिकल, गैस, मैटल या सामान्य आग में जोखिम और जरूरी सुरक्षा संसाधन अलग हो सकते हैं. ऐसे में हादसे से पहले आग की प्रकृति के मुताबिक फायरकर्मियों की सुरक्षा और संसाधनों की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी, इसकी समीक्षा भी जरूरी है.

बहरहाल, सुरक्षा निर्देशों की अनदेखी कर फायरकर्मी को जरूरी उपकरणों के बिना जोखिमपूर्ण काम में लगाया और दुर्घटना हुई तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, लेकिन सवाल है जिम्मेदारी हादसे के बाद ही क्यों... आयुक्त और अधिशासी अधिकारियों को अब फायर स्टेशनों में ट्रेनिंग, PPE और सुरक्षा संसाधनों की समीक्षा कर कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं. ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि अब तक फायर स्टेशनों में PPE और प्रशिक्षण का नियमित ऑडिट कौन कर रहा था. कमी थी तो पहले क्यों नहीं पकड़ी गई और संसाधन उपलब्ध कराने की जवाबदेही किसकी थी.

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