राजस्थान सरकार का एग्जाम: 16 हजार गांव और 52 शहरों में सूखे का असर, 4 IAS बना रहे महा एक्शन प्लान
Rajasthan Drought: राजस्थान में इस बार पश्चिमी और मध्य हिस्से के कई इलाकों में कम बारिश के कारण सूखे और अकाल जैसे हालात की चुनौती सामने है. करीब 16,400 गांव और 52 शहर प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं. सरकार ने पानी, चारे और रोजगार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक्शन प्लान तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. चार आईएएस अधिकारी और जलदाय, जल संसाधन, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज तथा आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी इस योजना पर काम कर रहे हैं.
Rajasthan News: राजस्थान में इस बार बारिश की कमी ने पश्चिमी और मध्य हिस्से के सामने सूखे और अकाल जैसी स्थिति से निपटने की चुनौती खड़ी कर दी है. राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से काफी कम रहने की बात सामने आई है. खासतौर पर पश्चिमी राजस्थान के 9 जिले और मध्य राजस्थान के 2 जिले पानी, चारे और रोजगार से जुड़ी संभावित परेशानियों का सामना कर रहे हैं. सरकार के स्तर पर इसे लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और 16 जिलों के लिए एक विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है.
इस पूरी कवायद का उद्देश्य प्रभावित इलाकों में पानी की उपलब्धता बनाए रखना, जरूरत के मुताबिक चारे की व्यवस्था करना और रोजगार से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना है. करीब 16,400 गांव और 52 शहर इस प्लान के दायरे में बताए गए हैं. सरकार की कोशिश है कि आने वाले समय में जिन क्षेत्रों में पानी और दूसरी जरूरी सुविधाओं की अधिक जरूरत हो सकती है, वहां पहले से व्यवस्था तैयार रखी जाए.
किन इलाकों में कम बारिश का असर?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 16 जिलों के करीब 16 हजार से अधिक गांवों में बारिश बेहद कम हुई है. कई इलाकों में सामान्य से 33 प्रतिशत बारिश भी नहीं हुई. इन परिस्थितियों में सबसे अधिक प्रभावित गांवों की संख्या बाड़मेर में 2,460 बताई गई है. इसके बाद जोधपुर में 1,838, नागौर में 1,589 और जयपुर में 1,400 गांव शामिल हैं. इसके अलावा अजमेर में 1,134, जालौर में 1,117, फलौदी में 1,064, पाली में 1,030, जैसलमेर में 961, बीकानेर में 919, चूरू में 934, बालोतरा में 1,216, ब्यावर में 787 और सिरोही में 530 गांव काफी हद तक सूखे और अकाल की चपेट में बताए गए हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि चुनौती किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है. पश्चिमी राजस्थान के बड़े हिस्से के साथ मध्य राजस्थान के कुछ जिलों में भी बारिश की कमी का असर दिखाई दे रहा है.
सरकार का फोकस किन तीन जरूरतों पर?
सरकार की तैयारियों में मुख्य रूप से पानी, चारा और रोजगार को केंद्र में रखा गया है. इनमें सबसे तत्काल जरूरत पानी की है. कम बारिश की स्थिति में पेयजल उपलब्धता बनाए रखना बड़ी प्राथमिकता है. इसके लिए सरकार ने पानी की व्यवस्था को लेकर काम शुरू कर दिया है. सरकार की ओर से पानी के संकट को दूर करने के लिए 650 वाहन और 3,200 श्रमिक लगाए गए हैं. इसके अलावा हैंडपंपों की मरम्मत के लिए 150 वाहनों की स्वीकृति दी गई है. यानी जहां पानी से जुड़ी स्थानीय दिक्कतें सामने आएंगी, वहां मौजूदा संसाधनों के जरिए व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.
कलेक्टरों को भी दिए गए खर्च के अधिकार
पानी की समस्या से निपटने के लिए जिला स्तर पर भी अधिकारियों को अधिक सक्रिय किया गया है. आपात मद में कलेक्टर को 75 लाख रुपए तक व्यय का अधिकार दिया गया है. इसके अलावा कलेक्टर अपने स्तर पर पानी से जुड़े कामों के लिए 25 लाख रुपए तक मंजूर कर सकेंगे. इस व्यवस्था का मकसद यह है कि पानी से जुड़ी तत्काल जरूरत के लिए हर फैसले के लिए लंबी प्रक्रिया का इंतजार न करना पड़े और जिला स्तर पर जरूरी काम जल्दी कराए जा सकें.
4 IAS और चार विभाग बना रहे प्लान
राजस्थान में सूखे और अकाल से निपटने के लिए एक्शन प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी चार प्रमुख विभागों से जुड़े अधिकारियों को दी गई है. जलदाय, जल संसाधन यानी सिंचाई, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज और आपदा प्रबंधन विभाग इस तैयारी में शामिल हैं. चार आईएएस अधिकारी 16 जिलों में सूखे और अकाल के प्रभाव को कम करने की योजना तैयार कर रहे हैं. इसमें यह देखा जा रहा है कि अलग-अलग क्षेत्रों में पानी की कितनी जरूरत होगी, उपलब्ध संसाधन कितने हैं और आने वाले समय में किस तरह की व्यवस्था करनी होगी. मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के मुताबिक पानी को लेकर यह भी देखा जा रहा है कि अभी कितना पानी उपलब्ध है और कितना अतिरिक्त पानी चाहिए. इसी आधार पर जल वितरण के लिए स्टेट एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है.
IGNP वाले जिलों के लिए अलग प्लान
राजस्थान के जिन जिलों का संबंध इंदिरा गांधी नहर परियोजना यानी IGNP से है, उनके लिए अलग प्लान तैयार किया जाएगा. इसका कारण अलग-अलग क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता और वितरण की जरूरतों के हिसाब से व्यवस्था करना है. सरकार की योजना में जिलों के भीतर जल वितरण की नियमित मॉनिटरिंग को भी सख्त रखने की बात कही गई है. यानी केवल पानी उपलब्ध कराने तक ही तैयारी सीमित नहीं होगी, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि उपलब्ध पानी का वितरण किस तरह हो रहा है और जरूरत वाले क्षेत्रों तक व्यवस्था पहुंच रही है या नहीं.
सरकार के सामने क्यों बड़ी चुनौती?
यह स्थिति सरकार के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बीजेपी सरकार बनने के बाद यह पहला बड़ा सूखा पड़ने वाला है. पश्चिमी राजस्थान प्रदेश के करीब 70 प्रतिशत इलाके में फैला हुआ है और इस क्षेत्र के कई जिलों में बारिश की कमी का असर सामने आया है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार से दो बार सूखे का प्लान और पैकेज मांगा है. उनका कहना है कि मारवाड़ में 33 प्रतिशत से कम बारिश हुई है और अकाल-सूखे के हालात बन चुके हैं. उन्होंने सरकार से सूखा घोषित कर पैकेज जारी करने की मांग की है. वहीं सरकार ने फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है. मुख्यमंत्री अधिकारियों को पहले ही एक्टिव मोड में एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दे चुके हैं.
अगले 15 दिन में सामने आ सकता है बड़ा प्लान
सरकार की ओर से तैयार किया जा रहा एक्शन प्लान आने वाले समय में यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि प्रभावित क्षेत्रों में पानी, चारा और रोजगार की जरूरतों को किस तरह पूरा किया जाए. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के मुताबिक अगले 15 दिनों में सूखे और अकाल का बड़ा प्लान सामने आ सकता है. इसके साथ ही सूखा प्रभावित जिलों के लिए बड़े पैकेज की घोषणा भी की जा सकती है. फिलहाल सरकार ने पानी से जुड़ी तत्काल जरूरतों के लिए संसाधन लगा दिए हैं. 650 वाहन और 3,200 श्रमिक पानी की व्यवस्था में लगाए गए हैं, जबकि हैंडपंप मरम्मत के लिए 150 वाहनों की मंजूरी दी गई है.