गुमनाम इंटरनेट यूजर सावधान! पुलिस का डिजिटल शिकंजा, 7,800 से ज्यादा URL, प्रोफाइल और 15,326 मोबाइल नंबर कराए बंद
राजस्थान साइबर क्राइम ब्रांच ने बाल यौन शोषण संबंधी सामग्री के ऑनलाइन प्रसार के खिलाफ कार्रवाई तेज की है. पुलिस ने 7,800 से ज्यादा URL/प्रोफाइल, 15,326 मोबाइल नंबर और 100 डिवाइस चिन्हित कर ब्लॉक करवाए हैं. NCMEC की रिपोर्ट के आधार पर चूरू, नागौर, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, हनुमानगढ़ और चित्तौड़गढ़ में मामले दर्ज किए गए हैं.
Rajasthan News: राजस्थान में सोशल मीडिया पर बाल यौन शोषण संबंधी सामग्री अपलोड करने के खिलाफ साइबर क्राइम ब्रांच ने बड़ा एक्शन लिया है. टेलीग्राम और डिस्कॉर्ड के गुप्त ग्रुप हों या सोशल मीडिया के फर्जी प्रोफाइल, पुलिस की साइबर टीम डिजिटल ट्रेल के जरिए ऐसे लोगों तक पहुंच रही है. साइबर क्राइम पुलिस ने राजस्थान में 7,800 से ज्यादा URL और प्रोफाइल, 15,326 मोबाइल नंबर और 100 डिवाइस चिन्हित कर ब्लॉक करवाए गए हैं. NCMEC की टिपलाइन रिपोर्ट के आधार पर कई जिलों में FIR भी दर्ज की गई है.
इंटरनेट पर गुमनाम अपराधियों पर पुलिस की नजर
राजस्थान पुलिस साइबर क्राइम ब्रांच ने बाल यौन शोषण संबंधी सामग्री यानी CSEAM के प्रसार के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है. टेलीग्राम और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म पर बनाए गए गुप्त और पेड ग्रुप पुलिस की निगरानी में हैं. आरोपी फर्जी नाम और गुमनाम पहचान के जरिए इन ग्रुप्स में जुड़ते हैं और आपत्तिजनक सामग्री का आदान-प्रदान करते हैं.
Telegram-Discord के गुप्त ग्रुप पर कार्रवाई
ADG साइबर क्राइम वी.के. सिंह ने बताया कि प्रदेश में ऐसे मामलों में अब तक कई प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं. साइबर अपराधी बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार के लिए टेलीग्राम और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म पर गुप्त या पेड ग्रुप और चैनल बनाते हैं. इनमें सदस्य फर्जी अथवा गुमनाम पहचान के साथ जुड़ते हैं और आपस में आपत्तिजनक सामग्री का आदान-प्रदान करते हैं. कई मामलों में सामग्री सीधे निजी संदेश के जरिए भेजी जाती है, जबकि गूगल ड्राइव अथवा अन्य क्लाउड स्टोरेज पर सामग्री अपलोड कर केवल उसका लिंक साझा किया जाता है.
कोडेड शब्दों से बचने की कोशिश, फिर भी डिजिटल ट्रेल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी आरोपी पकड़ से बचने के लिए कोडेड शब्दों और हैशटैग का इस्तेमाल करते हैं. कई बार इंस्टाग्राम या फेसबुक जैसे सामान्य प्लेटफॉर्म से संपर्क शुरू करने के बाद बातचीत को कम निगरानी वाले प्लेटफॉर्म पर ले जाया जाता है. इन माध्यमों से जुड़कर ऐसी सामग्री भेजना अथवा प्राप्त करना गंभीर दंडनीय अपराध है. ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.
7,800 URL-प्रोफाइल और 15 हजार से ज्यादा नंबर ब्लॉक
एडीजी वीके सिंह ने बताया कि इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट और व्हाट्सऐप से जुड़े लगभग 7,800 यूआरएल-प्रोफाइल, 15,326 मोबाइल नंबर और 100 डिवाइस चिन्हित कर ब्लॉक करवाए गए हैं. तकनीकी विश्लेषण और एनसीएमईसी की रिपोर्ट्स के आधार पर संबंधित मोबाइल नंबर, अकाउंट और डिजिटल ट्रेल की पहचान की गई. इसके बाद संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को सूचना देकर आपत्तिजनक लिंक और मोबाइल नंबर ब्लॉक करवाए गए.
7 जिलों में दर्ज हुए मामले
NCMEC की टिपलाइन रिपोर्ट के आधार पर बार-बार ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाए गए व्यक्तियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध प्रकरण दर्ज किए गए हैं. चूरू, नागौर, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, हनुमानगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिलों के संबंधित थानों में ऐसे मामलों में प्रकरण दर्ज हुए हैं. राजस्थान पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस एजेंसियों के साथ भी समन्वय कर ऐसे ग्रुप और नेटवर्क पर लगातार नजर रख रही है.
डिजिटल ट्रेल से हो रही आरोपियों की पहचान
राजस्थान पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इंटरनेट पर गुमनाम पहचान के पीछे छिपकर बाल यौन शोषण सामग्री देखना, डाउनलोड करना, रखना या साझा करना सुरक्षित नहीं है. पुलिस तकनीकी माध्यमों से ऐसी गतिविधियों पर निगरानी रख रही है और डिजिटल ट्रेल के आधार पर संबंधित व्यक्तियों की पहचान की जा रही है. राजस्थान पुलिस ने अभिभावकों से बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट उपयोग पर ध्यान देने और उन्हें असुरक्षित ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति जागरूक करने की अपील की है. किसी भी संदिग्ध लिंक, समूह, चैनल या ऐसी सामग्री की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की सलाह दी गई है.
संदिग्ध गतिविधि की सूचना 1930 पर दें
संदिग्ध साइबर गतिविधि की सूचना 1930 साइबर हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दी जा सकती है. सवाल सिर्फ एक है- गुमनाम इंटरनेट प्रोफाइल के पीछे कौन है? राजस्थान पुलिस अब इसी डिजिटल पहचान को ट्रैक करने में जुटी हुई हैं.