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राजस्थान की राजस्व अदालतों में 6.66 लाख मुकदमे पेंडिंग:SDO कोर्ट में सबसे बुरा हाल,340 मामले 30 साल से ज्यादा पुराने

राजस्थान में जमीन के विवादों में इंसाफ का इंतजार इतना लंबा हो गया कि तारीखें बढ़ती रहीं और पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन फैसले नहीं आए.

Reported By Deepak Goyal
Published: Oct 12, 2026, 04:09 PM IST | Updated: Oct 12, 2026, 04:42 PM IST
Image Credit: rajasthan court pending cases sdo revenue board report
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प्रदेश की राजस्व अदालतों में 6 लाख 66 हजार से ज्यादा मुकदमे लंबित हैं. चौंकाने वाली बात ये है कि 83 मुकदमे ऐसे हैं, जो 40 साल से भी ज्यादा समय से फैसले का इंतजार कर रहे हैं वहीं,340 मुकदमे 30 साल और करीब 79 हजार मामले 10 साल से ज्यादा पुराने हैं. अकेले एसडीओ अदालतों में 4 लाख 42 हजार से ज्यादा मुकदमों का अंबार लगा है. अब राजस्थान हाईकोर्ट ने इस पेंडेंसी पर गंभीरता दिखाते हुए जिलेवार और अदालतवार पूरा हिसाब मांगा है.

जमीन का मालिकाना हक,खातेदारी,बंटवारा और राजस्व से जुड़े विवादों में न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हजारों लोगों की जिंदगी तारीखों के इंतजार में गुजर रही है. राजस्थान की राजस्व अदालतों में मुकदमों का अंबार इस कदर बढ़ गया है कि कई मामले तीन से चार दशक बाद भी फैसले की दहलीज तक नहीं पहुंच पाए हैं. किसी मुकदमे को 10 साल बीत गए तो किसी को 20 साल,लेकिन फैसला अब तक नहीं हो पाया.

हालात ऐसे हैं कि प्रदेश की राजस्व अदालतों में 83 मुकदमे 40 साल से भी ज्यादा पुराने हैं. वहीं 257 मामले 30 से 40 साल और 6,363 मामले 20 से 30 साल से फैसले का इंतजार कर रहे हैं. यानी 6,703 मुकदमे ऐसे हैं, जो 20 साल से ज्यादा समय से लंबित हैं. राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्व अदालतों में लंबित मुकदमों की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अब प्रत्येक जिले और अदालत का अलग-अलग हिसाब मांगा है। राजस्व अदालतों में लंबित मुकदमों का सबसे बड़ा बोझ उपखंड अधिकारी यानी एसडीओ अदालतों पर है. प्रदेश की एसडीओ अदालतों में 4,42,262 मुकदमे लंबित हैं. ये कुल लंबित मामलों का करीब 66.35 प्रतिशत है. इनमें 36,513 मुकदमे 10 से 20 साल, 2,436 मुकदमे 20 से 30 साल, 178 मुकदमे 30 से 40 साल और 48 मुकदमे 40 साल से अधिक पुराने हैं.

यानी एसडीओ अदालतों में ही 39,175 मुकदमे दस साल से ज्यादा समय से लंबित हैं. वही राजस्व मंडल अजमेर में भी लंबित मुकदमों का अंबार है. यहां कुल 72,085 मामले लंबित हैं. इनमें 23,554 मामले 10 से 20 साल,2,960 मामले 20 से 30 साल और तीन मामले 40 साल से ज्यादा पुराने हैं. यानी राजस्व मंडल में ही 26,519 मुकदमे दस साल से ज्यादा पुराने हैं. दूसरी ओर,अतिरिक्त जिला कलक्टर की अदालतों में 28 मामले 40 साल से अधिक समय से लंबित हैं.

बहरहाल,राजस्व अदालतों में लंबित मुकदमे महज आंकड़े नहीं हैं। ये उन परिवारों की पीड़ा हैं,जो पीढ़ियों से अपनी जमीन,अपने हक और इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं. कहीं मालिकाना हक अब भी अधर में है, तो कहीं चार दशक से ज्यादा वक्त गुजरने के बाद भी फैसला दूर है. ऐसे में सवाल सिर्फ देरी का नहीं, बल्कि उस न्याय का है,जिसकी उम्मीद में पूरी जिंदगी बीत जाती है.अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राजस्व अदालतों में तारीखों का सिलसिला थमेगा या वर्षों से अटके मुकदमों को आखिरकार इंसाफ की मंजिल मिलेगी.

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