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Kota News: कोटा स्थित राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (RTU) में फर्स्ट ईयर के छात्र अक्षित शर्मा की हॉस्टल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद हंगामा हो गया. छात्र की मौत से नाराज विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय का मुख्य गेट बंद कर प्रदर्शन किया और निष्पक्ष जांच सहित कई मांगें रखीं. गुरुवार को शुरू हुआ धरना पूरी रात जारी रहा. इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति भी बनी और पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया. छात्रों ने आरोप लगाया कि इस दौरान कुछ विद्यार्थियों को चोटें आईं. बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत हुई. एडिशनल एसपी के मुताबिक, कुल 13 मांगों को लेकर चर्चा हुई और कुछ मांगों पर सहमति बनने के बाद प्रदर्शन खत्म हो गया.
हॉस्टल में खाना खाने के बाद सोया था छात्र
अक्षित शर्मा (19) जयपुर के झोटवाड़ा का रहने वाला था. वह राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में IT ब्रांच के फर्स्ट ईयर में पढ़ रहा था. इसी सत्र में उसने कॉलेज में एडमिशन लिया था. उसके पिता आर्मी में हैं.
साथी छात्रों के मुताबिक, अक्षित भास्कर भवन के H-4 हॉस्टल के कमरा नंबर 61 में रहता था. उसके साथ कमरे में दो अन्य विद्यार्थी भी रहते थे. बुधवार को विश्वविद्यालय परिसर में एक कार्यक्रम हुआ था, जिसमें अक्षित भी शामिल हुआ था. इसके बाद रात में खाना खाकर वह अपने साथियों के साथ कमरे में सो गया.
सुबह जगाने पर नहीं उठा, रूम पार्टनर ने दी सूचना
विद्यार्थियों ने बताया कि गुरुवार सुबह अक्षित नहीं उठा तो उसके रूम पार्टनर ने उसे जगाने की कोशिश की. काफी देर तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर उसने दूसरे छात्रों और चीफ वार्डन डॉ. डीके यादव को सूचना दी. इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को मामले की जानकारी मिली.
छात्रों ने आरोप लगाया कि सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद चीफ वार्डन मौके पर पहुंचे. उनका कहना था कि अक्षित की हालत गंभीर होने के बावजूद एंबुलेंस बुलाने में देरी हुई. छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि एंबुलेंस आने के बाद उसे विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर करीब आधे घंटे तक रोककर रखा गया. हालांकि, एंबुलेंस और घटनाक्रम को लेकर छात्रों के आरोपों पर संबंधित पक्षों के बयान अलग-अलग रहे.
चीफ वार्डन बोले- एंबुलेंस में देरी हुई तो ऑटो बुलाया
चीफ वार्डन डॉ. डीके यादव ने बताया कि उन्हें सुबह 9:56 बजे कर्मचारी से छात्र के नहीं उठने की सूचना मिली थी. इसके पांच मिनट के भीतर उन्होंने दोनों वार्डन को फोन कर एंबुलेंस बुलाने के लिए कहा. एंबुलेंस आने में समय लग रहा था, इसलिए उन्होंने तुरंत ऑटो की व्यवस्था की.
उनके मुताबिक, वह करीब 10 से 15 मिनट बाद मौके पर पहुंच गए थे. उस समय उनके साथ कुलपति भी मौजूद थे. विश्वविद्यालय के दोनों डॉक्टरों ने छात्र की जांच की. चीफ वार्डन ने बताया कि डॉक्टरों ने सुबह 4 से 6 बजे के बीच सोते समय मौत होने की आशंका जताई थी. उन्होंने यह भी कहा कि कमरे की जांच की गई, लेकिन वहां सांप नहीं मिला.
डॉक्टर बोले- शरीर पर नहीं थे चोट के निशान
RTU के इलेक्ट्रॉनिक विभाग के प्रोफेसर रंजन माहेश्वरी ने बताया कि विश्वविद्यालय की डिस्पेंसरी में कार्यरत डॉ. केएल मीणा ने फोन पर छात्र की स्थिति के बारे में जानकारी दी थी. डॉक्टर के अनुसार, सुबह छात्र के नहीं उठने पर उसके रूम पार्टनर ने प्रशासन को सूचना दी थी.
प्रशासन की जानकारी मिलने पर डॉक्टर मौके पर पहुंचे. उनके मुताबिक, जांच के समय छात्र की मौत हुए करीब 3 से 4 घंटे हो चुके थे और शरीर अकड़ गया था. डॉक्टर ने शरीर पर चोट के निशान नहीं होने की बात कही. मौत की असली वजह क्या थी, इसका पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा.
डिस्पेंसरी और सुविधाओं को लेकर छात्रों ने उठाए सवाल
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय की स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी सवाल उठाए. उनका आरोप था कि कैंपस की डिस्पेंसरी दोपहर 2 बजे बंद हो जाती है और कई बार वहां डॉक्टर भी उपलब्ध नहीं रहते. छात्रों ने कहा कि हर विद्यार्थी से सेमेस्टर डेवलपमेंट के नाम पर 5 हजार रुपए लिए जाते हैं, लेकिन जरूरी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं.
विद्यार्थियों ने कैंपस में आए दिन सांप निकलने की बात भी कही. उन्होंने चीफ वार्डन को हटाने, मृतक छात्र के परिवार को मुआवजा देने और अक्षित की मौत की निष्पक्ष जांच कराने सहित अन्य मांगें रखीं. छात्रों का कहना था कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी, तब तक धरना जारी रहेगा.
धरना खत्म कराने के दौरान पुलिस से हुई कहासुनी
छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन ने कई बार उनसे बातचीत की, लेकिन शुरुआती दौर में सहमति नहीं बन पाई. शाम करीब 5 बजे धरना खत्म करने को लेकर प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच गहमागहमी हो गई. इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर छात्रों को वहां से हटाया.
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई में कुछ छात्रों को चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ा. वहीं, एडिशनल एसपी सुभाष चंद मिश्रा ने बताया कि छात्रों की कुल 13 मांगें थीं. पहले दौर की बातचीत में सहमति नहीं बनी, लेकिन दूसरे दौर में कुलपति ने कुछ मांगों पर सहमति जताई.
एडिशनल एसपी के मुताबिक, इसी दौरान कुछ छात्रों ने पानी के कैंपर पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए थे. उन्हें हटाने के दौरान माहौल तनावपूर्ण हुआ. उन्होंने बताया कि बातचीत के बाद छात्रों का प्रदर्शन खत्म हो गया. फिलहाल, अक्षित की मौत की वास्तविक वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.