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राजस्थान में सियासी घमासान तेज हो गया है. एक तरफ जहां बीजेपी 'लोकतंत्र बचाओ' अभियान चला रही है, तो वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों और वामपंथी संगठनों ने SIR के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जयपुर के शहीद स्मारक पर वाम दलों और जनसंगठनों ने "संविधान बचाओ, देश बचाओ" के नारों के साथ जोरदार प्रदर्शन किया. इसके बाद जब विपक्षी कार्यकर्ता राजभवन का घेराव करने आगे बढ़े, तो पुलिस ने उन्हें बैरिकेड लगाकर रोक लिया. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली.
विपक्षी और वाम दलों का कहना है कि वे लोकतांत्रिक व्यवस्था, संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती और जनता के वोट के अधिकार की रक्षा के लिए यह साझा प्रदर्शन कर रहे हैं. राजभवन कूच के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया. इस दौरान काफी देर तक धक्का-मुक्की और नोकझोंक का माहौल बना रहा.
जयपुर रेलवे स्टेशन परिसर में रेलवे पेंशनर्स सोसायटी के बैनर तले 500 से अधिक पेंशनर्स ने वित्त मंत्री के पेंशनर्स के आर्थिक योगदान संबंधी बयान के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया. सोसायटी के अध्यक्ष गुमान सिंह के नेतृत्व में 60 से 95 वर्ष की आयु के पूर्व कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.
सोसायटी के अध्यक्ष गुमान सिंह ने कहा कि पूर्ववर्ती पेंशन व्यवस्था को बिना आर्थिक योगदान वाला बताना ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी है. क्योंकि इसमें कर्मचारियों के भविष्य निधि और सरकार के अंशदान का उचित प्रावधान था. उन्होंने रेलवे कर्मचारियों के दशकों के कठिन परिश्रम और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका को भी याद किया.
प्रदर्शन के दौरान पेंशनर्स ने मांग की कि 8वें वेतन आयोग में उचित गुणांक के आधार पर पेंशन का पुनर्निर्धारण किया जाए. सेना की तर्ज पर 'वन रैंक, वन पेंशन' नीति लागू हो. साथ ही 65, 70 और 75 वर्ष की आयु पूरी होने पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन देने का प्रस्ताव भी रखा गया. पेंशनर्स ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो देशभर के केंद्रीय रेलवे पेंशनर्स सड़क पर उतरकर व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे. इस अवसर पर रामजीवन मिश्रा, गिरीश चतुर्वेदी और विनोद मेहता सहित कई वरिष्ठ पूर्व कर्मचारियों ने भी अपने विचार रखे.