राजस्थान की तीन नदियों के लिए सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश, जोजरी, बांडी और लूनी के किनारे नहीं लगेंगे नए उद्योग
सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी, बांडी और लूनी नदियों के प्रदूषण व अवैध खनन पर सख्त निर्देश दिए हैं. हाईफ्लड लाइन और बफर जोन तय होने तक नई फैक्ट्रियों पर रोक रहेगी. नदी के दोनों ओर 100 मीटर सुरक्षा क्षेत्र होगा और 500 मीटर में रेड कैटेगरी उद्योगों पर रोक होगी.
Published: Nov 06, 2026, 11:41 PM IST
| Updated: Nov 06, 2026, 11:47 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की जोजरी, बांडी और लूनी नदियों में बढ़ते प्रदूषण और अवैध खनन को लेकर ऐतिहासिक आदेश जारी किया है. कोर्ट ने कहा है कि करीब 20 लाख लोगों की जिंदगी खतरे में है और अब सिर्फ कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, जमीन पर असर दिखना चाहिए. जस्टिस विक्रमनाथ व जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सख्त आदेश पारित करते हुए आवश्यक निर्देश जारी किए है.
सुप्रीम कोर्ट ने सबसे पहले नई फैक्ट्ररियों पर रोक लागने के निर्देश जारी करते हुए कहा कि जब तक नदियों की हाईफ्लड लाइन और बफर जोन वैज्ञानिक तरीके से तय नहीं हो जाते, तब तक नदियों के पास कोई नई औद्योगिक इकाई लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. राज्य सरकार के जल संसाधन विभाग ने सीवेज के बहाव के आधार पर नदियों की चौड़ाई घटाने की कोशिश की थी. कोर्ट ने इसे गलत और भ्रामक बताया.
कमेटी ने बताया कि बालोतरा में लूनी नदी की दर्ज चौड़ाई को घटाकर सिर्फ 8 मीटर करने की कोशिश हो रही थी. कोर्ट ने साफ कहा नदी को नाला नहीं बनने दिया जाएगा. अब नदियों की सीमा राजस्व विभाग और जल संसाधन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार ही मानी जाएगी. इसके दोनों तरफ 100 मीटर का अतिरिक्त सुरक्षा क्षेत्र होगा और 500 मीटर के दायरे में कोई भी रेड कैटेगरी उद्योग नहीं लगेगा.
अवैध बजरी खनन की जांच के लिए 3 दिन के अंदर एसआईटी बनाने का आदेश दिया गया है. एसआईटी का नेतृत्व आईजी रैंक के अधिकारी करेंगे, जिसमें जोधपुर, बालोतरा और पाली के एसपी शामिल होंगे. एसआईटी यह जांच करेगी कि अवैध खनन के पीछे कौन लोग, नेटवर्क और फायदे उठाने वाले हैं, और क्या इसमें सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत है. कोर्ट ने खान विभाग को कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि जहां पहले अवैध खनन पकड़ा गया, वहां बाद में पट्टा दे देना उसे वैध नहीं बनाता. यह अवैध काम को बाद में वैध ठहराने जैसा है.
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कोर्ट ने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर विचार करने की बात कही. कानाणा गांव, पचपदरा (बालोतरा) में 458.6 हेक्टेयर में फैले 5 खनन प्लॉटों का भी जिक्र किया गया, जो करीब 8.1 किमी नदी तल को प्रभावित कर रहे हैं. बालोतरा ब्लॉक 1990 के दशक से ही डार्क जोन / ओवर-एक्सप्लॉइटेड घोषित है. कोर्ट ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण को मामले में पक्षकार बनाया है.सीजीडब्ल्यूए को जोधपुर, बालोतरा और पाली में भूजल की स्थिति पर हलफनामा देना होगा.