)
Rent A Garba Partner: नवरात्रि, गरबा और इसी उत्सव की आड़ में साइबर ठगों ने तैयार किया है ठगी का नया जाल. सोशल मीडिया पर ‘रेंट ए गरबा पार्टनर’ के नाम से पोस्टर और मैसेज वायरल किए जा रहे हैं. दावा किया जाता है कि आपको गरबा कार्यक्रम के लिए पार्टनर उपलब्ध कराया जाएगा. इसके लिए अलग-अलग कैटेगरी बनाई गई हैं-प्लेटिनम, गोल्ड और सिल्वर. हर कैटेगरी के लिए अलग फीस और फीस के नाम पर एक हजार से लेकर पांच-छह हजार रुपए तक भुगतान करवाने का प्रयास किया जा रहा है.
ऐसे फंसाते हैं साइबर ठग
सोशल मीडिया पर गरबा पार्टनर के पोस्टर
आकर्षक ऑफर और अलग-अलग कैटेगरी
व्हाट्सएप/मैसेज के जरिए संपर्क
QR कोड भेजकर पेमेंट की मांग और रकम मिलते ही संपर्क बंद
फिशिंग लिंक-एपीके से डेटा चोरी का खतरा
QR कोड से पेमेंट, फिर संपर्क बंद
साइबर ठग पहले सोशल मीडिया या व्हाट्सएप के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं. मैसेज में कहा जाता है कि अगर आपको गरबा पार्टनर चाहिए तो अपनी जानकारी दर्ज करें और निर्धारित फीस का भुगतान करें.
इसके बाद QR कोड भेजा जाता है. पीड़ित जैसे ही पेमेंट करता है, ठग संपर्क तोड़ सकते हैं. यानी गरबा पार्टनर मिलने से पहले ही बैंक अकाउंट से पैसा निकलने का खतरा.
सिर्फ QR कोड ही नहीं, साइबर ठग फिशिंग लिंक या APK फाइल के जरिए भी निशाना बना सकते हैं. मैसेज में लिंक भेजकर मनपसंद ऑफर चुनने या जानकारी दर्ज करने को कहा जाता है. लिंक या संदिग्ध APK पर क्लिक करने से मोबाइल में मौजूद निजी जानकारी और बैंकिंग डेटा खतरे में पड़ सकता है. यानी एक क्लिक और त्योहार की खुशी बदल सकती है साइबर ठगी के दर्द में.
डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने जनता को सावधान करते हुए कहा है कि इस तरह की कुछ शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें सोशल मीडिया के जरिए गरबा पार्टनर उपलब्ध कराने का मैसेज किया जाता है और भुगतान के लिए कहा जाता है. प्लेटिनम, गोल्ड और सिल्वर जैसी कैटेगरी बनाकर अलग-अलग फीस मांगी जाती है. आमजन ऐसे लुभावने ऑफर के झांसे में न आएं और किसी भी संदिग्ध मैसेज की रिपोर्ट करें.
हर बार नया तरीका
साइबर ठग हर बार फ्रॉड के लिए नया तरीका तलाशते हैं. फेस्टिवल सीजन में लोगों की भावनाओं और उत्साह को निशाना बनाना भी इसी रणनीति का हिस्सा है. गरबा कार्यक्रमों की लोकप्रियता को देखते हुए ठगों की ओर से यह नया तरीका अपनाया जा रहा है.
साइबर ठगी से बचने के 5 मंत्र
अनजान QR कोड पर पेमेंट न करें.
संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें.
अनजान APK फाइल डाउनलोड न करें.
आकर्षक ऑफर की पहले जांच करें.
ठगी होने पर तुरंत पुलिस-साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें.
पुलिस का कहना है कि किसी भी आकर्षक ऑफर पर आंख बंद करके भरोसा न करें. सोशल मीडिया पर ऑफर दिखाई दे तो पहले उसकी विश्वसनीयता जांचें. इंटरनेट पर उसके बारे में जानकारी तलाशें. अगर कोई व्यक्ति पहले इस तरह के फ्रॉड का शिकार हुआ है तो उसकी शिकायत या अनुभव सामने आ सकता है. त्योहार का सीजन खुशियों का है... साइबर ठगों के खाते भरने का नहीं.