नाथद्वारा की पुदीना चाय: एक भक्त ने की ऐसी फरमाइश कि बन गई शहर की पहचान, जानें रेसिपी
Rajasthan News: नाथद्वारा की पुदीना चाय आज शहर की खास पहचान बन चुकी है. करीब 40 साल पहले एक श्रद्धालु की फरमाइश से शुरू हुई यह चाय अब 100 से ज्यादा थड़ियों पर मिलती है. जानिए इसकी कहानी और घर पर बनाने की आसान रेसिपी.
Nathdwara Special Pudina Tea: राजस्थान के नाथद्वारा की पहचान सिर्फ श्रीनाथजी मंदिर और धार्मिक आस्था से ही नहीं है, यहां मिलने वाली खास पुदीना चाय भी लोगों के बीच काफी मशहूर है. श्रीनाथजी प्रभु की मंगला झांकी के दर्शन के बाद श्रद्धालु चौपाटी और आसपास की चाय की थड़ियों पर इस खास चाय का स्वाद लेने पहुंचते हैं. दिलचस्प बात यह है कि नाथद्वारा में यह चाय सुबह के समय करीब चार घंटे ही मिलती है. करीब 40 साल पहले एक श्रद्धालु की फरमाइश से शुरू हुई यह चाय आज शहर की खास पहचान बन चुकी है.
एक श्रद्धालु की फरमाइश से शुरू हुई कहानी
श्रीनाथजी मंदिर के पास चौपाटी पर करीब चार दशक पहले चाय की कुछ ही दुकानें हुआ करती थीं. उस समय यहां पुदीने वाली चाय के बारे में ज्यादा लोगों को जानकारी नहीं थी. इसी दौरान गुजरात से आए श्रद्धालुओं के एक दल में शामिल व्यक्ति ने चाय वाले से पुदीने की चाय बनाने को कहा.
अगले दिन थड़ी संचालक घनश्याम पुदीना और लेमन ग्रास लेकर आया. श्रद्धालु ने जिस तरह चाय बनाने के लिए कहा, उसी हिसाब से उसने मसाले मिलाकर चाय तैयार की और उन्हें पिलाई. श्रद्धालु के जाने के बाद चाय वाले ने खुद भी इस चाय को चखकर देखा. उसे भी इसका स्वाद पसंद आया.
धीरे-धीरे बन गई नाथद्वारा की पहचान
बस, यहीं से पुदीना चाय का सिलसिला शुरू हो गया. घनश्याम रोज ताजा पुदीना लाने लगा और अपनी थड़ी पर यह स्पेशल चाय बेचने लगा. समय के साथ चाय में कई तरह के प्रयोग किए गए. इसमें केसर भी मिलाया जाने लगा, जिससे इसका स्वाद और खुशबू अलग हो गई.
जब श्रद्धालुओं के बीच पुदीना-केसर चाय की मांग बढ़ने लगी तो नाथद्वारा के दूसरे चाय विक्रेताओं ने भी इसे बनाने का तरीका सीख लिया. आज शहर में 100 से ज्यादा चाय की थड़ियों पर पुदीना और केसर वाली यह खास चाय मिलती है. इससे सालाना 5 करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार होने का अनुमान है.
इन जगहों पर मिलती है स्पेशल चाय
नाथद्वारा में पुदीना चाय के स्टॉल चौपाटी, लाल बाजार, दिल्ली बाजार, माणक चौक, गांधी रोड, नया बाजार और मंदिर की परिक्रमा के आसपास लगाए जाते हैं. सुबह श्रीजी की मंगला और श्रृंगार झांकी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु दर्शन के बाद इस चाय का स्वाद लेना पसंद करते हैं.
उदयपुर, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ के आसपास के जिलों से आने वाले श्रद्धालुओं के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से आने वाले लोग भी इस चाय को पसंद करते हैं. यही वजह है कि नाथद्वारा आने वाले कई लोगों के लिए मंदिर दर्शन के साथ पुदीना चाय पीना भी यात्रा का हिस्सा बन गया है.
घर पर कैसे बनाएं नाथद्वारा स्टाइल पुदीना चाय?
अगर आप घर बैठे नाथद्वारा जैसी पुदीना चाय का स्वाद लेना चाहते हैं तो दो कप चाय के लिए 1 कप पानी, 1 कप दूध, 2 छोटी चम्मच चायपत्ती, 2-3 छोटी चम्मच चीनी, 8-10 ताजा पुदीने की पत्तियां और 1-2 हल्की कूटी हुई इलायची लें. चाहें तो करीब आधा इंच अदरक भी डाल सकते हैं.
सबसे पहले पैन में पानी उबालें. इसमें पुदीने की पत्तियां और इलायची डालकर करीब 1 मिनट तेज आंच पर पकाएं. इसके बाद चायपत्ती डालें और करीब 1 से डेढ़ मिनट तक उबलने दें. अब दूध और चीनी डालकर 2-3 मिनट तक चाय को अच्छी तरह पकाएं. चाय को बीच-बीच में ऊपर उठाकर गिराते हुए उबालने से थड़ी वाली चाय जैसा स्वाद आ सकता है. आखिर में चाय को छानकर कप में डालें.
पुदीना ज्यादा देर तक न उबालें
इस चाय को बनाते समय एक बात का ध्यान रखना जरूरी है. पुदीने को बहुत ज्यादा देर तक उबालने से उसका स्वाद कड़वा हो सकता है. अगर आपको चाय में पुदीने की तेज खुशबू पसंद है तो आखिर में कुछ ताजी पत्तियों को हल्का मसलकर चाय में डालें और करीब 30 सेकंड बाद चाय छान लें. इससे पुदीने की खुशबू ज्यादा अच्छी तरह बनी रहती है.